Dual Face

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mihirraj2000


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Posted On: 14 Feb, 2012  
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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

भाई मिहिर जी आपकी मंशा और प्रयोग दोनों असफल इस मंच पर ऐसे ही तुक्के छोड़ कर अक्सर नए-नए लोग चर्चित होने वालों की लिस्ट में शामिल होते रहे हैं । आपका उद्यम भी इस मायने में बिल्कुल सफ़ल रहा, कि इतने सारे टिप्पणीकार मुफ़्त में पा गए, जिनके एक-एक वोट के लिये यहां बड़े-बड़े स्थापित ब्लाँगर तरसते हैं । आप एक मुर्ख इन्सान है.;ईश्वर आपको माफ करे । क्योकि यह मानवीय स्वभाव है। आपने कुछ थोड़ा सा जानकर या सुनकर अपने विचार बनाए है। किन्तु शायद आप नहीं जानते की इससे देश के हजारो लाखो लोग आहत हो सकते है । अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता हम सभी को है पर असली लेखक वो है जो लिखने के पहले समग्र जानकारी हासिल कर ले ।बाबा झूठे और बेईमानों का पर्दाफाश कर रहा है और गरीबों का भला कर रहा है. ये जो मिहिर राज विदेशी और अंग्रेजों का मानस पुत्र है. अंग्रेज चले गए, इसके जैसे काले अंग्रेज पैदा कर गए, जो आज भी उनके गुलाम हैं और गुलामी जारी करने पर आमादा हैं. हमारी सरकार जनता में फूट पैदा करके उसकी मेहनत की कमाई लूट रही है. अगर आप कोई व्यापार करके देखो, सरकारी तंत्र किस तरह गिद्ध की तरह नोच नोच कर काने को आमादा हो जाता है. आय कर विभाग अगर कर न दो तो सजा देता है कृपया अपनी गलती मने और जनता से माफ़ी मांगे

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आपके बेबाक विचारों के लिए साधुवाद. आपका हमेशा मुख्य धारा के विपरीत लिखना ही आपकी विशेषता है . लेकिन अफ्शोश क़ि आपके कुछ चापलूस टाइप प्रशंषकों ने बाबा जी पर हमला ही बोल दिया . जबकि आपने अत्यंत ही सधे हुए शब्दों में शालीनता पूर्वक बाबा जी के कुछ विचारों से असहमति व्यक्त क़ि थी जो क़ि बिलकुल सही थी . और करनी जरुरी भी थी . क्योंक़ि बाबा जी हों या कोई भी इन्सान उसके सभी विचारों क़ि पूजा तो केवल राजनीति में ही हो सकती है वास्तविक जीवन में किसी भी व्यक्ति के विचार उसके अपने अनुभवों पर आधारित होतें हैं . और निश्चित तौर पर बाबाजी को काम का और उसकी तीव्रता का अनुभव नहीं होने के कारन ही उन्होंने ऐसे विचार व्यक्त किये . इसके लिए आपको भी शालीनता से अपने विचार व्यक्त करने का पूरा अख्तियार है और आपने वैसा ही किया . किन्तु आपके कुछ प्रशंसकों द्वारा बाबाजी का अपमान करना उनके द्वारा शालीनता का उल्लंघन है जो उचित नहीं कहा जा सकता और आपकी भी ऐसी मंसा कतई नहीं थी . अंत में आपके स्वतंत्र चिंतन के लिए पुनः बधाई .

के द्वारा:

प्रिय मिहिर जी, आपको दीपावली मंगलमय हो, कोई भी साधारण सोच वाला व्यक्ति सभी महापुरुषों के द्वारा कही हुई बात को साधारण तरीके से यही सोचता है जैसा की आपने लिखा है, पर समस्या यह है की श्रधेय बाबाजी तो आजकल हर विषय पर ही अपने विचार थोक में परोसते हैं चाहे वह किसी भी विषय पर हों, हाँ एक बात में तो बाबाजी का जितना गुणगान किया जय वह कम है की बाबाजी ने मनुष्यों में योग के प्रति एक अद्भुत उत्साह का निर्माण किया है जिसके वह विशेज्ञ है पर यह कैसे हो सकता की बाबाजी हर विषय में ही परांगत ही हों , चाहे अर्थ शास्त्र हो या राजनीतिक शास्त्र हो या फिर कोई और शास्त्र ? मेरे विचार से श्रेध्य बाबा जी एक पूंजीपति राजनितिक जुंटा के आद्रश्य जाल में फंसते जारहे है, चूँकि परस्पर विरोधी बाते जब किसी के द्वारा कही जाती है तो वह मन की गहराइयों से नहीं दिशा निर्देशों के आधीन होती है, बस इतना ही,

के द्वारा:

कंफ्युस तो नहीं था सोनी जी पर मुद्दे कई थे और ज्यादा लम्बा न हो जाये आलेख सो बाँटना पड़ा दिमाग. आज सेक्स हर इंसान कर रहा है जायज या नाजायज इस पर बहस नहीं है बहस है की कर सब रहे है तो STD के चांस भी काफी है आप आकडे देखे तो आपको पता चलेगा की STD से दुनिया में अब तक ५ मिलिओन मौत हो चुकी है जिसमे इंडिया काफी आगे है सरकार सेक्स पर पाबंदी नहीं लगा सकती पर कोंडोम के कर उन्हें जागरूक तो कर सकती है न? इसका उपयोग न कर के लोग अपनी जिन्दगी गवां रहे है क्युकी मेरा भी मान न है की सेक्स बस एक इम्पल्स है जिसे आम आदमी नहीं रोक सकता. आप काफ सिराफ और कोंडोम में अंतर तो समझती है मेरे हिसाब से. कोंडोम का उपयोग सिर्फ सेक्स के लिए किया जाता है इसका उपयोग जितना हो उतना सुरक्षित है इंसान. मैं नहीं मानता सेक्स सिर्फ बच्चा पैदा करने की विधि है. जाने दीजिये मैं वैसे कुछ दिन पहले सोच रहा था की आप ना जाने कहा गम हो गयी? लिखते रहिये. आपको भी दीपावली की शुभकामनाये.

के द्वारा: mihirraj2000 mihirraj2000

काफी समय बाद आपका लेख पढ़ा और इस बार आप जबदस्त कन्फ्यूज़ लगे पता नहीं क्यों ??? आपने शुरू कही और से किया बीच में कही और पहुच गए और अंत में वापस वहीँ बाबा रामदेव हाय हाय ! आपने जो टॉपिक पकड़ा उसे आप ठीक से एक्सप्लेन नहीं कर पाए ! आपकी अदालत में अगर उन्होंने कंडोम को लेकर कुछ कहा तो उसकी वाजिब वजह भी दी थी जिन्हें आप देख नहीं पाए हर सिक्के के दो पहलु होते है अच्छा और बुरा ! कोई भी चीज़ इंसान की सहूलियत के लिए बनायीं जाती है लेकिन जब कोई उसका दुरूपयोग करे तो वो चीज़ गलत ठहराई जाती है बजाये इसके की हम उस चीज़ का दुरूपयोग करने वालो को गलत ठहराए ! शायद आपको पता हो की आज स्टेशनरी शॉप पर मिलने वाला फ्लूड भी एक बहुत बड़ा नशा है लेकिन उनके लिए जो इसका गलत इस्तेमाल करते है बाकियों के लिए तो ये सिर्फ एक स्टेशनरी प्रोडक्ट है(आंकड़ो के अनुसार भारत में सबसे ज्यादा फ्लूड रेलवे स्टेशन पर बिकता है क्योंकि ज़्यादातर चरसी वही मिलते है ) आप बता चुके है की आप एक डॉक्टर है तो फिर तो आप ये भी जानते होंगे की कितने ही ऐसे कफ़ सिरप है जिनका इस्तेमाल नशे के लिए किया जाता है और जिन्हें बिना प्रिस्क्रिप्शन के नहीं ख़रीदा जा सकता लेकिन फिर भी वो नशेड़ियों के हाथ लग जाता है मेडिकल में और भी बहुत सी दवाईयां है जिनका इस्तेमाल सही वजह से ज्यादा बुरी वजहों के लिए किया जाता है जिनमे से कंडोम भी एक है ! और अगर कोई इसके होने वाले दुरूपयोग के लिए कुछ कह रहा है तो गलत क्या है ?? बात सिर्फ दुरूपयोग को रोकने की है सदुपयोग को रोकने की नहीं और कंडोम के दुरूपयोग को रोक्लने के लिए तो सरकार भी आगे ही है ! And in last a Very HAPPY DIWALI to u nd ur fmly .....

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मिहिर जी बहुत दिनों के बाद आपका लेख पढ़ा. हमारे समाज में महिलाओ के साथ दोयम दर्जे का व्यवहार किया जाता हैं. मैंने कुछ प्रतिक्रिया में आरोप -प्रत्यारोप देखे हैं. . सभी के अपने विचार हैं., सभी को अपनी बात कहने का पूरा अधिकार हैं. यह तो सत्य हैं की हमारे समाज में जब कोई भी औरत कुवांरी होती हैं तो उसे तरह तरह के शब्दों से प्रताड़ित किया जाता हैं.और कोई पुरुष अविवाहित हैं तो उसे साधू कहा जाता हैं .दोस्तों के मामले में लडकियों को भी सतर्क रहने की आवश्यकता हैं. क्यूँ की अक्सर समाचार पत्रों और चैनलों पर फलां लड़की के साथ दुर्वव्यवहार किया गया सम्बन्धी खबरे सुनाने को मिलती रहती हैं. आप मेरे लेख पढने के लिए इस add पर जा सकते हैं. मेरी मंशा किसी को दुखी करने की नहीं हैं . www.amitkrgupta.jagranjunction.com

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के द्वारा: mihirraj2000 mihirraj2000

के द्वारा: SUNEEL PATHAK SUNEEL PATHAK

It is agreed that legally speaking there is no ban on same Gotra marriages but medical experts across the world and from different religions feel that same gotra marriages may lead to genetic disorders. Azad.K.Kaushik , Professor of Immunology, told this scribe that essentially, marriages within a gotra reflect inbreeding with significant health consequences. Kaushik is of the opinion based on an in depth study and survey on the issue that inbreeding generally increases pre-reproductive mortality and crude mortality increases with inbreeding in proportion to the mortality rate. Morbidity increases significantly with inbreeding in many diseases, studies in many countries has revealed this. According to Kaushik, studies from southern India have clearly shown that a marriage within a Gotra or close relations contributes considerably to infant mortality and morbidity and hence for these reasons, marriages within a Gotra or closely related clans are not advisable because of genetic defects that are likely to occur. Kaushik told that great Rishis of India had created the Gotra system to ensure that inbreeding does not occur and it stands to scrutiny of modern science also. In fact because of Gotra system and marriages outside Gotra, northern India has few genetic diseases as compared to others areas. Kaushik feels that in Europe and North Amercia, genetic counselling prior to marriage is conducted and it is consistent with Gotra system to maintain genetic diversity. Supporting the demand, Kaushik hoped that it is important to understand many Indian traditions that have a strong scientific basis and should not be discarded in the name of modernity. Another expert Dr. Lalji Singh, former director of Center for Cellular and Molecular Biology, Hyderabad, while warning about the consequences of same gotra marriages said that if the same are not checked coming generations will be affected by genetic diseases, adding that same Gotra marriages are non-scientific and may invite hundreds of diseases. He said that even the Parsi community has started realizing the consequences of same Gotra marriages. The Head of Psychiatry department of Pt.B.D.Sharma University of Health Sciences, Rohtak in Haryana is of the opinion that marriages between same Gotra or close relations might lead to genetic disorders. Even in agriculture sector hybridization is behind strong and quality crops. Murrah buffalo, the pride of Haryana is also the result of hybridzation . The Ministry of Environment and Forests has also given instructions that every Zoo shall endeavour to keep and maintain animals of various species in their collection in such a sex ratio that optimizes breeding and helps in developing self -sustaining population of each species. Rishi Dayanand has also opposed the marriages between the same Gotra in Satyaarth Parkash. Even Guru Ramdev has also opposed the same gotra marriages. Media is projecting the issue as issue of Jat community whereas it is fact that every community be the Gujjars, Rajputs, Banias., Brahmins and Punjabis opposes the same Gotra marriages.

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भाई मिहिर जी आपकी मंशा और प्रयोग दोनों सफ़ल रहे, इस बात की तो दाद देनी ही होगी । इस मंच पर ऐसे ही तुक्के छोड़ कर अक्सर नए-नए लोग चर्चित होने वालों की ज़मात में शामिल होते रहे हैं । आपका उद्यम भी इस मायने में बिल्कुल सफ़ल रहा, कि इतने सारे टिप्पणीकार मुफ़्त में पा गए, जिनके एक-एक वोट के लिये यहां बड़े-बड़े स्थापित ब्लाँगर तरसते हैं । आप एक अच्छे आलोचक हैं, इसलिये शायद ही आपको नीचे पड़ी गालियों से कोई कष्ट हुआ होगा । मशहूर होना है, तो मशहूर व्यक्ति के व्यक्तित्व का तियां-पांचा करो, प्रसिद्धि स्वयं दरवाज़ा खटखटाएगी । वाह! क्या नुस्खा है । एक भी टिप्पणी पर आपका कोई जवाब नहीं है, इससे भी यही साबित होता है कि आपको सिर्फ़ मखौलबाज़ी का आनन्द लेना था, अभिव्यक्ति के लिये कोई सकारात्मक या नकारात्मक भावना तो कत्तई नहीं थी । भाई साहब रामदेव जी मंच से चिल्ला-चिला कर कहते हैं कि पथरी या गांठ को डिजाल्व करने के लिये दवा के साथ ही आधा-आधा घंटे कपालभाति और अनुलोम विलोम प्राणायाम की साधना काफ़ी लम्बे समय तक करनी होती है । हां, इस श्रमसाध्य तपस्या से जब गांठ या पथरी गलती है, तब फ़िर दोबारा जन्म नहीं ले पाती । जबकि शल्य क्रिया से निकाली गई गांठ-पथरी के पुन: पनपने की नब्बे प्रतिशत सम्भावनाएं होती हैं, क्योंकि पथरी तो निकल गई, शरीर की वह प्रवृत्ति नहीं निकल पाई जिससे गांठ-पथरियां जन्म लेती हैं । यह सब कठिन योग से संभव हो पाता है, न कि वैद्य जी मिनटों में जादू से ठीक कर देंगे, जहां आप कथित मरीज को लेकर गए थे । दूसरी बात कि वह गार्ड क्या कहेगा, आपकी भाषा कहती है कि आप जैसे लोगों को कोई साधारण आदमी भी अपने दरवाज़े पर घास नहीं डालेगा, और आप उस हैसियत से मिलने चले गए जैसे कोई गांव की कुटिया में रहने वाले बाबा से मिलने यूं ही चला जाता है । यहां थोडी ठीक ठाक प्रैक्टिस वाले डाक्टर के पास इतनी फ़ुर्सत नहीं होती कि अपनी बीवी को एंटरटेन कर सके, और आप यह उम्मीद लेकर गए कि तमाम देशों के राष्ट्रपतियों प्रधानमंत्रियों से भी अधिक व्यस्त रहने वाले बाबा रामदेव मिलने के लिये आपका इंतज़ार करते बैठे होंगे, पलक पांवड़े बिछाकार । इस प्रकार की बचकानी बातें कहीं और कृपा कर मत करेंगे । गरीबों के मुफ़्त इलाज़ की वहां और बहुत सारी जगहों पर ट्रस्ट की अलग व्यवस्था है, जिसकी खास प्रक्रिया होती है, अन्यथा हर कोई मुफ़्त इलाज कराने पहुंच जाएगा । खैर आप में कुछ तो है ही, कि मुझे इतना श्रम कर लेक्चर पिलाने के लिये बाध्य होना पड़ा । फ़िर भी आपको साधुवाद अवश्य कहूंगा ।

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विभा जी, मेरा आपसे निवेदन है की कृपया करके पहले अपने ज्ञान को वैदिक और वैज्ञानिक दोनों माध्यमों से बढ़ाएँ उसके बाद अपनी बात रखे| एक गौत्र की उत्पत्ति कैसे हुई और उस गौत्र वाले सभी लोग एक खून के कैसे हुए इसके लिए आपको पहले गौत्र की परिभाषा पढ़ना पड़ेगी| बिना हाथ-पैरों वाले कमेंट और लेख लिखना बहुत आसान है लेकिन समाज और देश में जो चल रहा है उसकी असलियत और उससे लड़कर उसे ठीक करना बहुत कम लोग कर रहे है और जो कर रहे है उन्हे आप जैसे लोग बदनाम करने में कोई कसर नहीं छोड़ते है| यह पूरी तरह से अंग्रेज़ो की बनाई हुई शिक्षा पद्धति का नतीजा है की हम लोग आज भी हमारे धर्म और संस्कृति पर गर्व नहीं कर पा रहे है बस बिना किसी बात की तह तक पहुंचे उसका विरोध और समर्थन शुरू कर देते है| अगर आपको या किसी और को भी इस बारे में गलतफहमी है तो मुझसे संपर्क करें मुझे पूरा विश्वास है की आपकी गलत फहमी दूर होगी| अश्विनी सोनी 9300869298

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परम आदरणीय मिहिर जी सादर वंदे आपका परम पूज्य स्वामी रामदेवजी महाराज के सबंध मे लेख (ब्लाग) पड़ा । ईश्वर आपको माफ करे । क्योकि यह मानवीय स्वभाव है। आपने कुछ थोड़ा सा जानकर या सुनकर अपने विचार बनाए है। किन्तु शायद आप नहीं जानते की इससे देश के हजारो लाखो लोग आहत हो सकते है । अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता हम सभी को है पर असली लेखक वो है जो बोलने /लिखने के पहले समग्र जानकारी हासिल कर ले । सुबह 3.00 बजे से रात्री 10.00 तक बिना विश्राम किए व्यस्त रहने वाले स्वामी रामदेव जी के दैनिक कार्यक्रम पहले से ही तय होते है । सैकड़ो दर्शनार्थी /भक्त प्रतिदिन पतंजलि योगपीठ आते है तथा सभी स्वामी रामदेव जी से मिलना चाहते है । प्रत्येक व्यक्ति से अलग अलग मिलना असंभव है । इसलिए जब स्वामी रामदेव जी जब हरिद्वार मे होते है तब पतंजलि फेज 1 मे अपने भक्तो से अवश्य मिलते है । आप अगली बार धार्मिक मनोरंजन के लिए हरिद्वार जाए तो 12 बजे पतंजलि फेज 1 मे स्वामी जी के दर्शन कर सकते है लोग वहा स्वामी जी से अपनी बीमारियो आदि के बारे मे भी सलाह लेते है । आपने योगग्राम के एसी रूम देखे किन्तु वहा की चिकित्सा पद्धति व स्वस्थ होते लोग नहीं देखे । आपने स्वामी जी को टीवी पर आते तो देखा परंतु उनकी तर्कसम्मत बाते नहीं सुनी । स्वाइन फ्लू को गिलोई नामक आसानी से घर पर लगाई जा सकने वाले सामान्य ओषधि पौधे की मदद से काबू करने वाले स्वामी रामदेव जी ही है। पतंजलि मे आजीवन सेवा दे रहे साधको द्वारा आपसे गलत शब्द कहे गए हो ये संभव नहीं है फिर भी स्वामी रामदेव जी के शिष्य होने के नाते हम आपसे क्षमाप्रार्थी है। योग ने हमे विचारो मे शुद्धता, अल्पज्ञानी को क्षमा जैसे गुण दिये है । किन्तु यदि केवल सस्ती लोकप्रियता के लिए आपने ये किया है तो मे अपने समस्त साथियो से इतना ही कहूँगा की इस प्रकार के धार्मिक भावनाओ से खिलवाड़ करने वाले किसी गुरु या धर्म की आलोचनाओ वाले ब्लाग पर उसी तरह प्रतिक्रिया न दे जिस तरह हम किसी मनोरोगी की बातो को गंभीरता से नहीं लेते है । ध्यान रहे जहा परमपूज्य स्वामीजी ने हमे योग के माध्यम से शांति, क्षमा, संयम जैसे शिक्षा दी है वही उन्होने हमे भारत स्वाभिमान आंदोलन के माध्यम से गलत बातो का पुरजोर विरोध करने का पाठ भी पड़ाया है । आपसे पुनः अत्यंत विनम्र अनुरोध है की आप परमपूज्य स्वामी रामदेव जी को सुने, पढे, जाने फिर किसी राय पर पहुंचे । आशा है आप अपना अगला ब्लाग सोच विचार कर ही लिखेंगे । आप जैसे उपन्यासकार से सकारात्मकता की अपेक्षा है । आप इस संबंध मे मुझसे ईमेल पर भी अपनी शंका समाधान कर सकते है । आपसे विनम्र अपील है की आप परमपूज्य स्वामी रामदेव जी व राजीव दीक्षित जी को लगभग एक हफ्ता सुने । हमे पूर्ण विश्वास है आपके मन मे नकारात्मक विचारो के स्थान पर राष्ट्र प्रेम , विश्वबंधुत्व की भावना का उदय होगा । ओर हमे भारत स्वाभिमान के इस महाअभियान के लिए आप जैसा ऊर्जावान साथी मिलेगा । आप इन वेबसाइटो पर जाकर भी जानकारी प्राप्त कर सकते है । www.bharatswabhimantrust.org www.divyayoga.com www.rajivdixit.com शुभकामनाओ सहित आपका संजय जोशी देवास (मध्य प्रदेश ) email: sanjay.sansansan@gmail.com

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.  रजनी जी, अगर बाबा पैसे नहीं लेगा तो समाज सेवा कैसे करेगा? आमिर और सक्षम लोगों से पैसे लेकर बाबा झूठे और बेईमानों का पर्दाफाश कर रहा है और गरीबों का भला कर रहा है. ये जो मिहिर राज विदेशी और अंग्रेजों का मानस पुत्र है. अंग्रेज चले गए, इसके जैसे काले अंग्रेज पैदा कर गए, जो आज भी उनके गुलाम हैं और गुलामी जारी करने पर आमादा हैं. हमारी सरकार जनता में फूट पैदा करके उसकी मेहनत की कमाई लूट रही है. अगर आप कोई व्यापार करके देखो, सरकारी तंत्र किस तरह गिद्ध की तरह नोच नोच कर काने को आमादा हो जाता है. आय कर विभाग अगर कर न दो तो सजा देता है, पर लिए गए ज्यादा कर का भुगतान सालों तक नहीं होता है. क्या इस बात का कोई जवाब है आप लोगों के पास?

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मुझे बड़े पीड़ा हुयी और इस पीड़ा को बर्दास्त करने की हमें आदत डालनी होगी ! प्रेस लोबी के लिए की उनको केसे नियंत्रित किया जाये उनके माध्यम से कही गलत मेस्सेज ना चाला जाये ! पिछले 15 वर्षो में और लभग हर रोज चरित्र पर, धार्मिक चरित्र पर, वस्त्रो और कभी भी छिछोरे लेखो से हमला होता ही रहता है ! और छोटे मोटे दूरदराज के पत्रकार आवारा ( *******) की तरेह भोकने को स्वतंत्र है ! आलोचना (क्रिटिक्स) के बिना इस आधुनिक युग में लेख लिखना संभव ही नहीं चाहे जितना देश हित में हो !बिना कंट्रोवर्सी के बिना पत्रकार होता भी नहीं यह मन्ना है पत्रकारों का ! साधारण लेखन व प्रसारित (पब्लिशिंग) को प्रचार ही माना जाता है ! चाहे वेह व्यापर से सम्भंद्धित हो, देश से हो या किसी व्यक्तिगत सम्भंदित लेखन हो कही से भी व्यक्तिगत भावना से प्रेरित लेख नहीं लगना चाहिए ! ये सीमा (गाईड-लाईन) पत्कारो के साथ होती है ! जिसकी आड़ में किसीभी महान या इज्जत दार व्यक्ति को जलील कर पाई जा सकती है या विदेशी मानसिकता से प्रेरित हो धन कमाने के लिए यह अच्छा माध्यम है कितने भी प्रयास कर लो सरे के सरे सिर्फ खाली कुए में चिल्लाने के आलावा कुछ नहीं ! ऐसे में विलाप करना कितना उचित है ! आप खुद फेशला करे अर्थात कीचड़ से बचना है तो जूते डालने होगे ! पीताम्बर 09868420933

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Hi Mihir , I want to say many things but i think the space given for the comment will not accommodate it. So i have chosen only two major lacunae of your post . 1. As far as i can understand , you r comparing two different things , a profession and a religion.Don\'t you think that there r farmers who r Muslims ? Yes , it\'s true that they r far less than Hindus .Have u ever thought about the reason behind it ? They r less because for farming u need land and most of the Indian Muslims are landless. Now you we\'ll ask how it possible that a Hindu landless farmer can practice their profession but a Muslim can\'t? The reason behind it, is very simple , apart from land u need other complementary things for farming like Fertilizer , tractor , water resources etc....... for this etc s ..u need money ...And you very well know that most of the Indian Muslims are living in destitution...they don\'t have land to mortgage their loans ...and if you r not aware of this fact,plz go through the below Report : The statistical figures for Muslims in rural areas are also deeply disturbing: # A whopping 94.9 per cent of Muslims in Below Poverty Line (BPL) families in rural areas do not receive their entitlement of free foodgrains. Only 1.9 per cent of the Muslim community benefit from the Antyodaya Anna Yojana Scheme (a government programme meant to prevent starvation deaths by providing food grains at a subsidised rate); # A large percentage of rural Muslims-60.2 per cent-do not have any ownership of land; Only 3.2 per cent of rural Muslims receive subsidised loans. The committee also found shocking instances of discrimination against the community. These include cases of Muslims not getting loans from even nationalised banks. ‘There is an implicit diktat that loans should not be given in specific areas dominated by Muslims because of the high probability of default\\\', the Committee observed after a visit to Rajasthan; # Only 2.1 per cent of Muslim farmers owning tractors (this is abysmal when seen in the context of India having about 15,25,000 tractors in the country and having the 4th largest tractor-owning population in the world after the US, Japan and Italy). See the point is that we can\'t compare two things that r poles apart from each other .I don\'t know what the Prime minister of India said but what i can see here is that you creating a kind of sensation by mixing two different and incomparable things.I do believe that the farmers r the backbone of India but plz , for God\'s sake \"if u have any\", don\'t divide them in the name of religion. 2.The post is very ambiguous in term of meaning .I don\'t know what u want to convey .Are u taking about the development of the \"United\" India ,which is the land of almost every religion, or the development of the Hindu farmers , only Hindu bcoz u didn\'t talk about the Muslim farmers? So before writing or proposing your opinion ,plz check ur thoughts twice .Your single wrong opinion grave a sense of hatred in the mind of naive people. And please don\'t take personally ,it\'s just a review of your post ......Have a nice day...............

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के द्वारा: roshni roshni

के द्वारा: mihirraj2000 mihirraj2000

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प्रिय मिहिर जी, आपके आने वाले नावल के बारे में पढ़ा ! विश्वास किया जा सकता है की नावल सचमुच ही अच्छा होगा ! मैं शायद पहले भी कह चूका हूँ की लेखक वही लिखता है जो वह अपने आसपास देखता, सुनता या भोगता है ! फिर उसमें थोडा सा कल्पना का पुट भी लगाना पड़ता है ! जब कोइ पाठक उसे पढता है तो यदि वोह यह समझाता है की यह कहानी तो उसके शहर ही, उसके प्रदेश की, उसके पढोस की है उसकी अपनी है ! तभी रचना सार्थक होती है ! तब पाठक के दिल से वाह निकलती है चाहे वो अपनी प्रतिक्रिया न दे ! परन्तु लेखक का लिखना सार्थक हो जाता है ! मिहिर जी आपको मेरी और से शुभकामनाये व आशीर्वाद ! परमात्मा आपको सफलता प्रदान करे ! राम कृष्ण खुराना

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के द्वारा: mihirraj2000 mihirraj2000

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नमस्कार मिहिर जी अच्छा लगा की आपने लिखने का फ़िल्मी स्टाइल छोड़ दिया ! प्लीज़ बुरा मत मानना ! जो लेख मुझे पसंद आता है उस पर खुल कर बोलती हु और जो नहीं पसंद आता उसे नापसंद की श्रेदी मैं रख कर आगे चलती हु खेर आपका ये लेख काफी अच्छा है और लगता है किसी लड़की से बहुत जोर की पड़ी है तभी उसके बारे में इतना कुछ जान पाए हो क्योकि बिना गिरे चलना कोई नहीं सीखता ! वैसे अब आपकी औरत को न समझने की आपकी पहेली तो सुलझ ही गई होगी ! जिसकी चर्चा आपने अपने ही एक लेख में की थी ! लेकिन अगर पुरुष अपनी इगो को छोड़ दे तो उनकी औरत को ना समझने की परेशानी बिलकुल ख़त्म हो जाएगी और वैसे भी औरत और पुरुष दोनों ही एक दुसरे के पूरक है इसलिए कोई भी किसी से कम नहीं बस ज़रूरत है एक दुसरे सही नज़रिए से देखने की और समझने की !

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क्या बात है मिहिर जी लगता है शादी नहीं हुई है आपकी, (just kidding) मित्र आप सही लिखते है औरत जननी है और अगर वो नहीं तो हम सब अधूरे है, अपनी पूरी जिंदगी में हम औरत के हर रूप को देखते है,त्याग,प्यार,अपनापन का दूसरा नाम है औरत,इसके आलावा भी बहुत कुछ सीख सकते है हम इश्वर की इस अनमोल कृति से,लेकिन अगर सीखना चाहे तो, man ego हमेशा आड़े आ जाता है हमारे, की सीखे और इनसे, लेकिन कुछ और भी है जिसे हम नजर अंदाज नहीं कर सकते की आज के सामजिक ढांचे में औरत जात का नैतिक,मानसिक एवं शारारिक पतन हो चूका है,और हमेशा की तरह औरत जात औरत की दुश्मन है,इनके बीच केकड़ा पद्धति विकसित है,तुम कैसे आगे ?और इन सब के लिए पुरुष ही दोषी नहीं है,ये स्वयं दोषी है क्यों की दुसरे की गलती बता देने से आत्मसंतुस्ती हो जाती है की हम तो दोषी नहीं है,और फिर दिल से प्रयाश नहीं होता अपनी कमियों को सुधारने का, अपनी अहमियत जानकर हमारी माँ बहनों को स्वयं से ही प्रश्न पूछना चाहिए की कमी कहाँ है!

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मिहिर जी रामदेव जी के आपके लेख पर मुझे आपकी सोच अच्छी नहीं लगी, किन्तु यहाँ वाकई आपने साबित कर दिया की आपके अन्दर एक बहतर इन्सान और हिंदी साहित्य का जबरदस्त लेखक छुपा है, आप डॉक्टर होगये है ये अच्छी जानकारी मिली है पर कही इसीलिए तो आप रामदेव जी के खिलाफ नहीं है? ताज्जुब है एक प्रबुद्ध और मीमांसा करने वाला युवा कैसे रामदेव जी को समझ नहीं पाया, मेरा अनुरोध है उनके बारे में और जानकारी जुटा कर जब तस्वीर साफ हो जाये तो फिर से लिखना, देखना ये वापसी सबको अच्छी लगेगी, जितनी प्रतिकिर्या तब नहीं मिली होंगी जो रामदेव जी की इस देश को कितनी जरुरत है ये जानकर आपको मिलेंगी, दिल से नेक हो तो देश के लिये भी नेक ही सोचोगे, (शिब्बू आर्य-मथुरा)

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औपचारिकता रखने में मैं विश्वाश नहीं रखती, बात आपको कोई भी बुरी लग रही हो इसमें मेरा कसूर नहीं ये तो उस कुप्रथा और आपका दोष है जिसको आप अपना समर्थन लगातार दे रहे है क्युकी ये आपके धर्म से जुड़ा है, मैं फिर कहना चाहूंगी जिस भी समुदाय में ऐसी कोई खामिया है उसे हटाना होगा. आप पता नहीं इस्लाम से hi kyu jod रहे है ise. kaam sach में kai aise है jo ulta hi है likhne lagu तो mujhe सुबह हो जाएगी एक आध बताना चाहूंगी एक तो सड़क पर नमाज की बात मैंने उठाई ही है दूसरा की सरकार पल्स पोलियो का अभियान रखती है लेकिन आपके समुदाय ने इसका बहिष्कार किया है और सरकार की पोलियो उन्मूलन के अभियान को विफल किया है. तर्क आप लोग क्या देते है आप बेहतर जानते है. महिलाओं को स्कूल कलेग जाने पर भी आप लोगो को आपति है. तलाक की समस्या तो आप जानते ही है आपने लेखक के मुद्दे को kahi और mod diya है और mujhbhi majboor किया की मैं और mudda utha doon. मैं kisi julus aadi jo की galat ही है कोई समर्थन नहीं दे रही लेकिन आपको नहीं lagta की आप in chilo का sahara le kar apni galtion पर parda daal रहे है और bhuna भी रही और jayaj thehrane की galat koshish kar रहे है. jo galat है galat है. mandiro में bhagdar की kahani bahut kam है आपने shayd mandiro का darshan नहीं किया है एक sath tirupati के mandir में lakho लोग darshan karte है पर कोई asuvidha kisi को नहीं hoti na ही कोई bhagdar machtio है na कोई marta है. aarajkata jaha hoti है waha लोग marte है. इस्लाम सड़क na jam kare इसका upaay आप dhundhiye ya tathakathit dharmguru dhundhe क्युकी आप kisi और की bat kaha manenge? farman jari karenge wo तो bat आप tak pahuchegi.. mukhyamantri और dalit की kahani rajnaitik है agar waha भी कोई kami है आप likhiye पर आप yaha भी kisi और की khami gina kar apni kamiyo पर parda daal रहे है. mardo से jyada तो mahilaye jaroor doodh की dhooli hoti है आपके sarthan की jarurat नहीं है inhe..agar mana inke karan inke ghar walo को कोई samasya है tokya तलाक teen baar bol kar उसे chhodna sahi है आप कोर्ट jaiye अपना paksh rakhiye और usbhi रखने dijiye आप kaun hote है faisala lene wale कोर्ट kis liye है? manmaani mat kijiye.. आप mahilon को khula का upyog karne को keh रहे है apne तलाक के durpyog को jayaj karaar dene के liye jab teen bar तलाक कहना को मैं galat manti हो और भी mante है तो आपने kaise soch liya की khula sahi है और hum उसे samrthan denge.. आपको baaar keh रही hu apni bhoolo पर parda mat daliye jaisa आप lagataar karte aa रहे है. samaj के liye तलाक galat है तो khula भी galat है और आपने khula को samne rakh kar apne समुदाय की एक और galti samne rakhi है... dhnyawaad.........

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कबीर जी अभिवादन, १- आपकी भावनाओं की मै कद्र करता हूँ और आपका शुक्रिया करता हूँ की आपने मुझे इस लायक समझा. आपने मेरे लेख पढ़े, यही मेरे लिए बहुत है, आपके कमेन्ट की मुझे कोई लालसा नहीं है. २- ये विचार मंच है, हर किसी को अधिकार है अभीव्यक्ति का. ३- कुछ बातों का जबाब न देना भी बुद्धिमानी होती है. आखिर कीचड़ में पत्थर मारने से अपना दामन भी तो गन्दा होता है. ४- कुछ लोगों ने मुझसे ये भी कहा की आप मुझे कमेन्ट के लिए कहकर राइटर को अप्रत्यक्ष रूप से वोट करने के लिए ही कह रहे है. सच तो आप ही बेहतर जानते है. ५- मै लिखता हूँ अपनी आत्मा को स्वच्छ बनाने के लिए. खुद को साफ़ रखने के लिए, लेकिन कुछ लोग दूसरों को ठीक करने की चिंता में घुले जा रहे है. ६- हर आदमी खुद को ठीक कर ले, तो समाज तो अपने आप ही ठीक हो जायेगा. ७- अन्तिम बात ये की प्रतियोगिता जीतने की शर्त ही ये है की लेख ऐसा हो जो साढ़े पाँच करोड़ लोगों को हिला कर रख दे. धन्यवाद.

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नंदिता जी आदाब, १- वैसे तो ये विचारों के आदान-प्रदान का मंच है लेकिन ये कहना की आपकी बातों से कोई तकलीफ नहीं हो रही है, क्या औपचारिकता नहीं होगी, क्योंकि आपका आशा करना भी तो एक औपचारिकता ही है ? २- क्या औपचारिकता और वास्तविकता, दोनों का दामन आपने नहीं पकड़ रखा है ? ३- हर धर्म में कमी भी आप स्वीकार कर रही है, लेकिन हमें आप कह रही है- "क्यों हर काम उल्टा ही होता है इनका?" आप बताइए की किस प्रकार हमारा हर काम उल्टा ही होता है? ४- तलाक पर आप आग-बबूला हो रही है लेकिन "मर्द की तरह ही औरत भी ‘खुला’ के माद्ध्यम से अपने सौहर से अलग हो सकती है." इस बात को आप बार-बार इग्नोर क्यों कर रही है ? ५- क्या ये बेहतर नहीं होगा की पहले आप अपनी सभी कमियों को दूर कर ले ? ६- तलाक से आपको बहुत डर लग रहा है लेकिन महिला ससक्तिकरण के नाम पर कितने कानूनों का गलत प्रयोग हो रहा है, आपको बताना पड़ेगा क्या ? ७- इस देश में इस्लाम अपनी इबादत के लिए कितनी सड़के जाम कर रहा है ? ८- सभी प्रकार के जुलूसों, धार्मिक आयोजनों, रैलियों, हड़तालों, आदि पर आपका क्या जवाब है ? ९- इस्लाम अपनी इबादत से सड़क न जाम करे, इसके लिए आपके पास क्या उपाय है ? १०- मंदिरों में दर्शनों के लिए गए लोगों के भगदड़ में मारे जाने को आप कैसे देखती है ? ११- तलाक के कारण देश का विकास नहीं हो पा रहा है, लेकिन दलितों के मुख्यमंत्री के राज में भी स्वयं दलित ही करीब ५० फ़ीसदी से ऊपर अशिक्षित है. इस पर आप क्या कहेंगी ? १२- जिन चंद दूध की धुली महिलाओं का दुखड़ा आपने सुना है, क्या उनके मर्दों, उनके घरवालों, उन औरतों की सास, ननद, देवर के दुखड़े को भी आपने सुना है ? १३- वास्तविकता में जीने वाले औचारिकता नहीं किया करते है नंदिता जी. धन्यवाद.

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मुस्लिम समुदाय की जटिल समस्याओं में से एक है ये तलाक़ मुद्दा और चूँकि मुस्लिम औरते ज्यादातर अनपढ़ होती है और अपने हक से अनजान होती है इसलिए उनकी ये समस्या और भी विकराल रूप ले लेती है ,जटिल सामाजिक एवं धार्मिक संरचना कोढ़ में खाज साबित होती है क्यों की मायके के पुरुष सम्बंधी भी उनकी एक सीमा तक ही मदद कर पाते है ,ऐसी ही एक घटना मेरे संज्ञान में है जिसमे औरत आज अपने चार बच्चो का पेट मायके में बनियान सिल कर पाल रही है और उसका पूर्व पति अपनी दूसरी पत्नी और उसके दो बच्चो के साथ अलग रह रहा है,जो शायद ही कभी अपने पहले चार अनपढ़ बच्चो से मिलने आता होगा ,अब आसानी से बच्चो के बारे में अंदाजा लगाया जा सकता है की वो बड़े होकर क्या बनेंगे ! खैर मसला सिर्फ मुस्लिम महिलाओं में जागरूकता का है और हर मुस्लिम लड़की को \"तालीम\" ही उनको भविष्य की हर दुश्वारियों से बचा सकती है और साथ ही उनको अपने पैरो पर खड़ा होना सिखा सकती है !जिसके लिए हालांकि मुस्लिम रहनुमा कहते तो हमेशा रहते है लेकिन उनकी कोशिशे कभी परवान चढ़ते नहीं दिखती !

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क्यों है ऐसे कोई चीज मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड का मामला? हिन्दू का कोई मामला तो किसी हिन्दू बोर्ड का नहीं होता? मैंने तो आज तक नहीं देखा की मुस्लिम पर्सनल बोर्ड कोई ढंग का फैसला ले पाया है अगर ऐसा होता तो तलाक का ये अधिकार ख़तम होता पहले. मैंने जो कहा है मेरी दृष्टि में पूरा उचित है तीन बार तलाक बोल कर आप बिना महिला की बात सुने अलग हो जाते है मजाक नहीं तो क्या है? खुद सुलझा लेते है इसमें उनके अन्दर इस बोर्ड का दहशत है इसलिए. ये किसी संस्था को नहीं मानते चाहे सुप्रीम कोर्ट ही क्यों न हो. मैं ऐसे कई उदाहर गिना सकता हूँ. शरियत का कानून क्या कहता है ये आज़ादी देता किसी मर्द को की वो बिना तलाक दिए दूसरी शादी कर सकता है बिना पहली बीबी को कुछ कारन बताये की क्यों वह शादी कर रहा है. मैं मुस्लिमो का विरोधियो नहीं हूँ मैंने आलेख में भी कहा की मेरा मकसद किसी जाती धर्म को आघात करना नहीं है बल्कि उसमे व्याप्त कुप्रथा के खिलाफ है. अगर मैंने कहा की तलाक के बारे में सोचना चाहिए मुस्लिम बोर्ड को तो गलत क्या है? एक कानून हो हिन्दू मुस्लिम के लिए बूरा क्या है? भारत के उच्चतम न्यायलय का सम्मान सब धर्म करे क्या गलत है?

के द्वारा: mihirraj2000 mihirraj2000

सिर्फ तलाक ही नहीं और भी कई ऐसे मुद्दे है जिस पर मुसलमानों के बुद्धिजीवी वर्ग में बहस हो चुकी है जिस पर सुप्रीम कोर्ट भी ये मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड का मुआमला है कह चुका है ! \" इसके ठीक विपरीत मुस्लिमो में ये शब्द मेरी दृष्टि में एक मजाक है \"आप अपने इन शब्दों का सन्दर्भ ले ,क्या ये उचित कहा जायेगा, मुस्लिमो में ये शब्द शरियत से जुड़े हुए है उनकी जीवन पद्धति का एक हिस्सा है तो आपके लिए मजाक कैसे हो सकते है , ध्यान दे,उनके ज्यादातर मुआमले वो खुद सुलझा लेते है कोर्ट नहीं जाते ,औरतो के लिए ये व्यवस्था शरियत से लागू है लिहाजा लिखने के पहले थोडा परामर्श जरुर कर लिया करे ! ये मेरी सिर्फ एक राय है आपको !

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तुफैल जी हर धर्म में कमी है इस मंच के जरिये विचारों के आदान प्रदान से ही शायद किसी समस्या का हल निकलेगा. बात महिलाओं के साथ तीन बार बोले इस शब्द की हो रही थी जो निसंदेह आपतिजनक है. देश सुधरेगा मेरे और आप से इसमें महिलाये भी है, जिस देश में महिलाओं को किसी खास समुदाय में कोई अधिकार न दिया गया हो उस देश का और कितना विकास होगा आप अनुमान लगा सकते है. बात मंदिर और मस्जिद की आपने उठाई मैंने तो बस इबादत के लिए सड़क जाम करने को गलत ठहराया था. मैं भी महिला हु और अगर मई मुस्लिम होती और इस तरह से तलाक दिया जाता तो क्या बीत टी मैं महसूस कर सकती हु एक डर के साए में जिन्दगी गुजरती मेरी कई मुस्लिम महिला मित्र है जिनका रोना मैंने देखा है..मैं आशा करती हु मेरी बात से आपको कोई तकलीफ नहीं होगी.

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नंदिता जी नमस्कार, अब आप मेरी बात समझ गयी है. मै यही कहना चाहता हूँ की जिस देश में रोटी, कपडा, मकान, शिक्षा जैसी मूलभूत समस्याए मुह बाए खड़ी हो, वहा मंदिर-मस्जिद, तलाक जैसे विषयों पर चर्चा गौण क्यों नहीं होनी चाहिए. निश्चित ही मंदिर-मस्जिद, तलाक आदि विषयों से मुह नहीं मोड़ा जा सकता लेकिन कब ? मुझे लगता है जब रोटी, कपडा, मकान, शिक्षा जैसी मूलभूत समस्यायों पर हम पार पा ले तब. आपकी बातों से मुझे १०० फीसदी इंकार नहीं है लेकिन क्या आप अपने या अन्य धर्मों में व्याप्त कमियों से इंकार कर सकती है ? अध्यात्म दिमाग से ज्यादा दिल की बात करता है. विज्ञान भी ९९ फीसदी के बाद १ फीसदी ईश्वर पर छोड़ते हुए दुआ करने के लिए कहता है. आज जरुरत है साफ़-स्वच्छ बहस की. सभी धर्म मिलकर एक-दूसरे की सहायता करे, कमियों को दूर करे, मानवता का भला करें. न की एक-दूसरे पर तलवार भांजे. क्या इसे बिडम्बना नहीं कहना कहिये की पृथ्वी दिवस के दिन हम धर्म और तलाक पर बहस कर रहे थे ? धन्यवाद.

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श्रीमान विकास जी, आपके दिए हुए सुझावों के तहत अब मैं लेख लिखने के बाद प्रतिक्रिया में jabab nahi deta hoon. सफलता कोई भी पाना चाहेगा. रामदेव जी से पहले भी और बाद में भी मैंने आलेख लिखे पर आपका बहुमूल्य प्रतिक्रिया केवल इन्ही दो विवादित आलेखों पर क्यूं आई? क्या मेरे अन्य आलेख ख़राब थे जो जागरण ने हर आलेख की तरह फीचर किया? भावना भड़काने का आप aarop laga rahe wo bebuniyad hai. mujhe muslim sahitya poora nahi aata मैंने wo likha जो dekhta aa raha hu और wahi likhta hu jisme mujhe dosh lagta hai bad baaki आप log nirnay le. aapki प्रतिक्रिया sar aanko पर. आप kis nakaratmak प्रतिक्रिया की baat kar rahe pata nahi पहले aapne auro की तरह mitr mandali का aarop lagaya tha to मैं aapko bata doon की प्रतिक्रिया jyadatar paksh में hi hote hai मेरे आलेख के. agar आप mujhe muslim sahitya की jankaari uplabdh kara de to badi kripa hogi. जहा औरतो का बलात्कार हो रहा हो इस तीन शब्दों से वह सब ठीक है पर उसके खिलाफ मैं लिखू तो मई काबिलियत से बलात्कार कर रहा हूँ. मेरी समझ है की agar कोई chiz lage की buri है तो aawaz uthao kalam uthao. mujhe muslim mahilaon के prati unke samuday का ye atyachar bura laga so likha.mahilaon की bhalai के liya और आप aarop laga rahe है. विवादित आलेख nahi hota आप log hote है जो इस तरह की bate कर के mahaul का makhol udate है. fir भी आप logo ko मेरे आलेखों से कोई samasya है तो आप jagran manch से aagrah kare की mera आलेख na फीचर kare kyuki kachro की jagah jagran का mukhya prishth nahi kachrapeti है. आप agar मेरे saare आलेखों पर tippani dete तो मैं समझता की आप sach में mujhe achchha lekhak mante है और आपका paksh bhale hi मेरे खिलाफ है पर nishpaksh है. dhnyawaad....

के द्वारा: mihirraj2000 mihirraj2000

मुझे लगता है आप पर जो आरोप, रामदेव पर लिखे गए ब्लॉग के समय लगाए गए थे, वो सही थे आप एक अच्छे लेखक है जो बहूत जल्दी सफलता पाना चाहते है और इसके लिए साम दाम दंड भेद की नीति पर उतारू है ! मैंने आपको पहले भी सलाह दी थी की आप अभी और पढ़े! सर्वप्रथम आपको मुस्लिमो पर कुछ भी लिखने से पहले उनका साहित्य पढना चाहिए था ,या किसी जानकार से जानकारी लेनी चाहिए थी ! जिसके बिना आपका ये लेख अधकचरा साबित हो रहा है और अधकचरी जानकारी लेना और देना दोनों ही खतरनाक होते है ! आपके लेख में नकारात्मक कमेंट्स ज्यादा आते है आप भावनाए भड़का कर अपना लेख ऊँचा ले जाना चाहते है ये नकारात्मक सोंच है आप अपनी काबिलियत के साथ बलात्कार कर रहे है !

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तुफैल जी.नाराज होने की बात नहीं है. सच में विचार आदान प्रदान का मंच है आपने कहा ही एक साथ नमाज पढना जरुरी होता है ऐसा हिन्दू धर्म में भी होता है पर किसी को कोई दिक्कत न हो इसका ख्याल रखा जाता है खास कर के जब कोर्ट का आर्डर हो..पर कोर्ट के आर्डर की भी धज्जी उड़ाई जाती है. हिन्दू या मुस्लमान अपने धर्म का पालन करे पर किसी को इस से दिक्कत न हो अपने अपने घर में भी हो सकता है ये..२ मिनट में कैसा जाम लगता है आप जानते ही होंगे किसी का कोई बहुत जरुरी काम में बाधा आ सकता है..मंदिर और मस्जिद को बड़ा करने का सवाल ही नहीं उठता न उठाना चाहिए लोग स्लम में रहने को मजबूर है और आप मस्जिद मंदिर का विस्तार चाहते है? अगर एक कसबे के १०००० मुस्लिम एक साथ नमाज पढने निकल पड़े तो कितना वि विस्तार छोटा नहीं पद जायेगा? मंदिरों में कोई कभी भी आ जा सकता है पूजा को इसलिए ऐसा मंदिरों के साथ नहीं देखा जाता है आप सोचिये हिन्दू अगर ऐसा सोचने लगे जैसा आपने बोला तो पैर रखने की भी जगह मिल पायेगी..

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नंदिता जी ये मंच विचारों के आदान-प्रदान के लिए ही है, नाराज मत होईये. आपका इशारा है- जब नमाज सड़क पर पढ़ी जाती है. कारण है- १- नमाजियों की तादाद अधिक और मस्जिद की क्षमता कम. ऐसा होता है जुमे, ईद और बकरीद की नमाज में. २- जमात (एक साथ) में नमाज पढना इस्लाम में अकेले नमाज पढने की बनिस्पत सुन्नत (बेहतर) बताया गया है. इसीलिए इन खास नमाजो में हर नमाजी चाहता है की वह जमात (एक साथ) में ही नमाज अदा करे. ऐसा पांचों वक्त की नमाज में नहीं होता है, माहे रमजान को छोड़कर. ३- क्या इस देश में आपके मुस्लिम भाइयो के लिए आपके दिल में इतनी भी जगह नहीं की आप १०-१५ मिनट उनकी नमाज के लिए रुक जाये? ३- सभी प्रकार के जुलूसो, मंत्रियो के आने-जाने, वैवाहिक समारोह आदि में क्या ऐसा नहीं होता है ? तब क्या आम आदमी को परेशानी नहीं होती है ? ४- जिस दिन आप हमारी मस्जिदें बड़ी करवा देंगी उस दिन आपकी ये परेशानी दूर हो जाएगी. ५- मै एक आम इन्सान हूँ और आम ही रहना चाहता हूँ, इसीलिए आम आदमी को और उसके दर्द को समझता हूँ. बाहर निकलने की बात है तो आप मेरा "सफरनामा-२..." पढ़िए. आपको पता चलेगा की मै आम आदमी से कितना जुड़ा हूँ. धन्यवाद.

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नमस्कार तुफैल जी..सिर्फ टिपण्णी करने के लिए ही टिपण्णी नहीं की थी मैंने, आपको नहीं लगता की बंदिशे हर जगह है पर अगर इन बंदिशों के कारन लोग अलग रहने लगे तलाक ले ले कर तो क्या और कैसा समाज निर्माण होगा? क्या एक नियम और कानून हो हिन्दू मुस्लिम के लिए हर चीज का सिर्फ शादी औरे तलाक का ही नहीं आपको नहीं लगता? कभी कभी बात इतनी भयंकर नहीं होती की तलाक बोल कर रिश्ता खतम कर दिया जाये..पर गुस्से में करता है इन्सान सो मेरी समझ से इसे हटाना चाहिए, महिलाओं को इस्लाम में और अधिलकर मिलने ही चाहिए...औरतो को मैं भी जानती हूँ जो मुस्लिम है तलाक लेना चाहती है पर उनके धर्मगुरु बखेड़ा कर रहे है वो भी तब जब मर्द इतना नाकारा है..मैंने बहुत से केस देखे है ऐसे..

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नंदिता जी अभिवादन, यदि किसी धर्म के बारे में आपको पूरी जानकारी नहीं है तो आपको उंगली उठाने से पहले पूरी जानकारी लेनी चाहिए. यह ठीक नहीं है की ब्लॉग लिखना है या टिपण्णी करनी है तो जो जी में आये लिख दिया. इससे आपसी रिश्तों में और देश में माहौल ख़राब ही होगा. इस्लाम धर्म एक विस्तृत धर्म है और औरत को बेइंतहा इज्जत देता है. रही बात तलाक की तो शादीशुदा जिंदगी जब पटरी से उतर जाये और मशक्कत के बात भी पटरी पर न आये तो इस्लाम अलग होंकर जिंदगी बसर करने के लिए कहता है, तो इसमें क्या बुराई है ? मर्द की तरह ही औरत भी 'खुला' के माद्ध्यम से अपने सौहर से अलग हो सकती है. खुदा की इबादत कहीं भी, की छूट देकर इस्लाम धर्म इन्सान को परिस्थिति की बंदिशों से मुक्त करता है. यदि आप और जगह दोनों पवित्र है तो इस्लाम परिस्थिति की बंदिशों से मुक्त करते हुए इबादत की बात कहता है. आपको नहीं लगता की ये बहुत अच्छी बात है. धन्यवाद.

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मिहिर आप बहुत अच्छे लेखक है. हम आपके सभी लेखों को पसंद करते है , मगर क्या सफलता और प्रसिद्ध के लिए इस तरह के मुद्दे ही मिलते है आपको. देश में अन्य कई समस्या है हमे खुशी होगी अगर आप भ्रष्टाचार, महंगाई या नक्सलवाद पर लिखे. किसी धर्म विशेष या व्यक्तिविशेष पर नकारात्मक दृष्टिकोण से लिखने से आपकी ही गरीमा को ठेस पहुचेगी. अपनी लेखनी को और विस्तार दिजीए तथा कुछ बाते समाज के बारे मे भी लिखो. रही बात तलाक की तो वह हिंदु समाज में भी होता है बस बात इतनी है कि हिंदुओं मॆं थोडा कम होता है आपने जिस तरह मुस्लिम समाज के बारे मॆं इस तरह का लेख लिखा है उससे मुझे खेद है. फिर भी मैं चाहुंगा कि आप लिखते रहे और आगे थोडा बहुत ही सही पर समाज के हित मॆं भी लिखेंगे.

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मिहिर जी आपके लेख पर विकास सिंह जी द्वारा अच्छी टिप्पणी की गई है। किसी व्यक्ति के वारे मे एक या दो घटनाओं से कोई आम राय नही बना लेना चा‍हिए। बाबा राम देव एक पुरानी भारतीय विधा को आम लोगों मे स्वीकार्य योग्य बनाया। लेकिन उनके अनेक योगदानों के वावजूद उनका वर्तमान कदम बहुत उत्साहजनक नही है क्योकि जब हम हनुमानगढी जाते है तो हम सभी वहां तैनात साधु महात्मा के पैर छूते है लेकिन जब वही महात्मा चुनाव मे आते है तो शायद जमानत जप्त हो जाती है। यद्यपि यह सही है कि राजनी‍ति कुंजी है जिससें सभी समस्याओं के ताले खुल जाते हैं। लेकिन केवल राजनीति ही समाज सेवा का एकमात्र माध्याम नही है। समाज सेवा को जो तरीका बाबा रामदेव जी द्वारा अपनाया जा रहा था वह अपने आप मे नायाब था लेकिन राजनीति मे आने की घोषणा करके बाबा राम देव जी ने अपनी स्वीकारिता पर प्रश्नो चिन्ह लगा दिया है। यद्यिप योग उनके राजनीति मे प्रवेश का एक अच्छा माध्यम हो सकता है ले‍किन वह कितना कारगर होगा यह समय के गर्त मे है। कही ऐसा न हो कि एक अच्छे व्यक्ति के अनुभवों से समाज बंचित हो जाय। हमारी शुभकामना बाबा रामदेव के साथ है। मेरा अनुरोध है कि किसी व्याक्ति के व्यचक्त्वि के बारे मे एकाएक एकांगी सोच बनाकर प्रचार जो दुष्प्रचार की श्रेणी मे आता है नही करना चाहिए। समाज मे कभी कभी ही अच्छे लोग समाज को प्राप्त होते ऐसे मे केवल प्रचारित होने के लिये किसी के वारे मे एकांगी प्रचार उचित नही है। इस मुददे पर अब और बहस करना उचित नही है। वैसे ही कई ज्वलंत मुददे बहस के लियें हैं उन पर लिखें। अच्छा लिखते हैं लिखते रहिये । यू0पी0 उदय मिशन से अनुराधा चौधरी।

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प्रिय विकास जी..आपकी प्रशंसा के लिए कोटि कोटि धन्यवाद..यहाँ इस ब्लॉग पर एक बहस हुई जो कभी कभी व्यक्तिगत रूप ले ली जो गलत था..इसी बीच में मित्र मंडली की बात लोगो ने उठाई..क्या आप को लगता है की आज के भाग दोड़ के समय में खुद के लिए हमारे पास वक़्त है? फिर मित्र तो जाने ही दीजिये..हाँ अगर ऐसा है भी तो मैं उन लोगो का शुक्रगुजार हु जिन्होंने यहाँ लेख को सराहा ही नहीं बहस भी की,,, अपरिपक होने की बात का मई विरोध नहीं कर रहा आपका सुझाव सर आँखों पर..मैं आगे भी पढता रहूँगा व्यक्तिगत मैंने कभी कुछ नहीं लिया इसीलिए पहले जबाब ही नहीं दे रहा था प[आर विपक्ष ने जो जालसाजी का आरोप लगाया उसका खंडन करना जरूरी था क्युकी जालसाजी वह से हो रही थी,,,पोल मैंने खोल दी.. बाबा का प्रशंसक मैं भी रहा हु पर इधर जो हो रहा था बाबा की तरफ से उस से मैं पिछले १ साल से दुखी था..मैंने वो सरे दुःख को एकाठा किया और यहाँ लिखा..मेरा मकसद किसी की भावना को ठेस पहुचना नहीं था..लेखक एक पक्ष रखता है और आपकी प्रतिक्रिया निर्णय लेती है की क्या त्रुटी है..आपका फिर से शुक्रिया ब्लॉग पढने का और अपनी प्रतिक्रिया देने का..आशा है आप आगे भी स्नेह और सुझाव देते रहेंगे..

के द्वारा: mihirraj2000 mihirraj2000

आप एक अच्छे लेखक है,आखरी तक पढने का मन होता है,लेकिन जैसा आपकी मित्र मण्डली आपको प्रायोजित करती है वैसी बात मुझे तो नहीं लगती,आपमें अभी अपरिपक्वता है आपको अभी और पढना चहिये,आपने अपने एक अनुभव को सार्थक बनवाने का काम किया,लेकिन आप और अच्छा लिख सकते थे यदि आप उनके राजनीति में आने को लेकर कुछ लिखते तो,आप दुसरे लेखको की तरह कमेंट्स नहीं देते आपकी मित्र मण्डली जवाब देती है,ये थोडा अटपटा सा लगता है ! आप और आपकी मित्र मण्डली,,,कमेंट्स को व्यक्तिगत ले लेते है जबकि आपलोगों को उन्हें कोई जवाब ही नहीं देना चाहिए था ! जबकि मेरा अपना व्यक्तिगत अनुभव रामदेव के प्रति बेहद सकारात्मक रहा है लेकिन उनके राजनीती में आने की बात मेरी भी समझ में नहीं आई !

के द्वारा:

मुझे लगता है अब हमें ये चर्चा समाप्त करनी चाहिए.. गलतिया पक्ष और विपक्ष दोनों तरफ से हुई है... मिहिर ने आकर जवाब दिया ये अच्छा किया ... वे एक योग्य लेखक है और उनकी कलम में आकर्षित करने की क्षमता है.. इसमें शक नहीं है... कुछ गलतिया उनसे हो गई.... मगर हमें इस नए उपन्यासकार का उत्साह बढ़ाना चाहिए ... मिहिर हमसभी की शुभकामनाये आपके साथ है.... लिखते रहिये... .. .. अब जबकि प्रिया जी ने कह ही दिया है की पक्ष और विपक्ष दोनों ही मिले हुए है तो हम ये ही कहना चाहते है ""जी हा प्रिया जी हम सभी एक है... हमारे मतों में भेद है मन में नहीं और ये पक्ष विपक्ष का समग्र प्रयास .. राष्ट्रवादी भावनाओ के प्रसार और जागरण की पहल को सार्थक बनाने के लिए है... मिहिर आपको कष्ट हुआ कुछ गलतियों की वजह से उसके लिए हम माफ़ी चाहते है................ शुभकामनाये.....

के द्वारा: NIKHIL PANDEY NIKHIL PANDEY

भाई मिहिर, आप के इस लेख पर सम्लित तरह की प्रतिक्रियाए आई. किसी को ये लेख पसंद आया और किसी ने इसका विरोध किया. जैसा की हम सभी जानते है की आज देश किस दौर से गुजर रहा है, हर तरफ मारकाट, भ्रष्टाचार, जातिवाद, धर्मवाद और अनैतिकता का बोल बाला है. ऐसे समय में अगर कोई इन्सान देश हित के लिए अपना सर्वस्य निछावर करने के लिए आगे आता है, तो हमें इस बात का समर्थन करना चाहिए और कोशिश करनी चाहिए की उसके अच्छे कामो को हम अधिक से अधिक लोगो तक पहुचाये. ऐसा बहुत बार जाता है की कभी कभी हमारे कुछ एक अनुभव अच्छे नहीं रहते लेकिन इसका ये मतलब तो नहीं की हम सरे अच्छे काम भूल कर सिर्फ एक बुरी याद के साथ आगे बढे. मुझे कोई शक नहीं की आप भी ये समझाते होगे की आज देश के हित में क्या है. ये माफ़ी बत्ताती है की आप एक अच्छे इन्सान है, क्यों की माफ़ी मांगने से कोई छोटा नहीं बल्कि और बड़ा हो जाता है. उम्मीद करता हूँ देश को और मजबूत और सही दिशा दिखने वाले लेख आप आगे लिखते रहेगे. धन्यवाद - अरुणेश मिश्र

के द्वारा: Arunesh Mishra Arunesh Mishra

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निखिल जी अप मेरे मित्र ही नहीं भाई सामान है..आपकी बातो का बुरा मान ने का सवाल ही पैदा नहीं होता..मैं आपकी बड़ी इज्ज़त करता हु हो सकता है मेरा लेख आपको अच्छा नहीं लगा..आप प्रतिक्रिया देने के लिए स्वतंत्र है..लेख के पक्ष में भी लोगो ने लिखा ये मेरा सौभाग्य है की itne लोगो ने मेरे पक्ष में bola aur लिखा मैं fir anurodh करता हु sab se manch की garima banaye rakhe..maine doosre har bloger की tarah wo likhne की koshish की jo dekha aur jo mehsoos kiya हो सकता है galti hui हो par मैं likhne के लिए स्वतंत्र हु aur आप प्रतिक्रिया देने के लिए पर जो आरोपों का सिलसिला आपलोगों ने मुझ पर लगाया है उस से जरुर आहात हु.. आपके कबीर साहब ने मुझे एक ही ID से १७ मेल किये कभी रेखा कभी विल्स कभी संजीव दुबे रूमी आदि बन कर आप अगर कहे तो मैं आपको वो सब मेल अग्रेसित कर सकता हु..और आप सब ऐसी जालसाजी का आरोप मुझ पर मध् रहे है..यहाँ तक की kuch prasansko ko meri girlfriend kaha gaya और abhdra bhasha में प्रतिक्रिया लिखा gaya मैं chahta तो वो comment deleat कर सकता tha और एक kiya भी jisme aastha जी पर abhinav जी ने एक lamba apmanit प्रतिक्रिया की thi,,आप yog की baat karte है और सुप्पोर्ट करते है मैं भी योग का विरोधी नहीं हूँ पर आप बताइए बाबा ने क्या शिक्षा दी की किसी लड़की का किसी औरत का मान मर्दन आप करे? अभिनव जी बहुत खूब जानते है उन्होंने क्या लिखा सबूत है मेरे पास..कबीर जी गलती करते वक़्त भूल गए की प्रतिक्रिया के आते ही हमे soochit kiya jata है jagran के dwara की hum use publish karna chahte है की नहीं..आप जानते ही honge kyuki आपको भी milte honge आप भी lekhak है..lekhak apna drishtikon rakhta है baad baki faisla आप लोगो ko karna होता है और आपको bata doo fir से की मेरा kaam subah से sham तक jindgi और maut के bich में rahta है और मुझे blog likhne का samay kaise milta है मैं janta हूँ fir आप khud soche की jis जालसाजी का आरोप aaplog मुझ पर लगा रहे है वो kaise कर सकता हु ये mat samjhiye की मैं safai de raha हु आहात is baat से हु की aisa आपके मित्र gan कर रहे है और आरोप मुझ पर लगा रहे है.. बाबा जी का prashansak मैं भी raha हु maine nition का virodh kiya है,, आप jimmedar lekhak है यहाँ आपको आरोप lagane से pehle sochna chahiye..आप मेरे pratikriyaon की sankhya badhane के लिए प्रतिक्रिया na likhe varan जो aapka पक्ष है rakhe.. आप जरुर apna pyar banaye rakhiye और प्रतिक्रिया dijiye..आपके pratikriyaon के लिए sada aabhari rahunga.. MIHIR

के द्वारा: mihirraj2000 mihirraj2000

बहन दिव्या अपने एक बहोत अच्छा प्रश्न किया जिसका उत्तर मैं आपको देना चाहुगा . ur Q- आप लोगो ने.. बाबा पर बात हो रही थी मिहिर पर नहीं ??????? ans-हमने कब कहा बात मिहिर पर होगी............चलिए कुछ समय के लिए मान लेते है मिहिर ने जो लिखा वो सही है पर \\\'क्या इतनी बात काफी है किसी के व्यक्तित्व को जानने के लिए\\\'.........???? ( और उस व्यग्ति के द्वारा किये गये कार्यो भूल जाये ) देखिये जब कोई बात media में आती है तो वो बात personal नहीं रह जाती (मिहिर ने जो वो उनका व्यग्तिगत अनुभव हो सकता है इसका मतलब ये नहीं आप उस बात को लाखो लोगो के सामने रखे ) (मुझे मालूम है यह भारत देश है यहाँ अब सचे लोगो को कोई आगे बढ़ते देखना नहीं चाहता ) यहाँ सलमान खान जैसे लोगो की इज्ज़त है जो शराब पीकर ४ लोगो पर गाड़ी चढ़ाकर कर मार देते है \\\'चिंगारा को भी मार देते है \\\'और तो और उनके सम्बन्ध underword से भी होते है फिर भी उनको कुछ नहीं होता और बड़े शान से रहते है\\\'उनको देखने क लिए बाकायदा ticket भी लगता \\\'और लाखो लोग उनको आपना idle मानते है.. ऐसे हजारो example आपको दे सकता हु........... सच सच होता दिव्या,,,,,,,,,,,, कहना तो बहुत कुछ चाहता हु पर कितना कहू....????? jai hind jai bharat

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बाबा रामदेव से मिलने के लिए तो रोज ही लाख नहीं तो हजारो लोग मिलने की ख्वाहिश ले के उनके आश्रम में आते ही होंगे ! तो क्या बाबा उन सभी लोग से मिले ? क्या कुछ लोगो से न मिलने के लिए अपना खीझ बाबा पे उतरना ठीक है ? और ये पथरी का इलाज जो मै बताने जा रहा हू बहुत ही कारगर है और बहुत ही सस्ता है जो की कोई भिखारी भी खुद कर सकता है ! रोज सुबह में खाली पेट कुरथी का दाल को १ दिन पानी में भीगा के पीने से १५-२० दिन में ही ये गल के अपने आप पेशाब के रस्ते से बाहर आ जायेगा जो की वो आदमी महसूस भी कर सकेगा की पेशाब के रास्ते से कुछ बाहर आ रहा है ! ये इलाज हमारे १ NRI मित्र ने १ विदेशी महिला को किया थे जिनको डॉ. ने बताया था की आपका ऑपरेशन कर के पथरी निकाला जायेगा ! ये घटना आज से करीब १५ साल पहले की है और उस महिला को उसके बाद आज तक पथरी को ले के कोई समस्या नहीं है उस देश का नाम साउथ कोरिया है ! जो की टेक्नोलोजी में वर्ल्ड में अपना नाम कमाए हुए है ! उस देश के डॉ. ने बोला की ऑपरेशन करना होगा !

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मिहिर आपने बहुत देर में जवाब दिया .. आप एक योग्य लेखक है ये मई पहले भी कह चूका हु न ही मई रामदेव जी को नीत एंड क्लीन बता रहा हु ये साड़ी बाते पहले ही हम कह चुके है.... सवाल ये है की आपने अपने एक निजी अनुभव के वजह से व्यथित होकर कैसे एक इंसान के खिलाफ इतना जहर उगल दिया.... क्या ये सही दिशा में लेखन मन जायेगा.... आपके पुरे लेख में सिर्फ पूर्वाग्रह दीखते है न की तार्किकता .. और यहाँ आपके समर्थको ने ही बात करने का चर्चा करने का लहजा बिगाड़ कर शुरुआत की मुझसे भी कुछ गलतिया हुई... इन सबसे बचा जा सकता था... यदि आप ने इसे एक चर्चा का रूप दिया होता .लेकिन आपने इसे चर्चा का रूप नहीं दिया बल्कि सारे परिणाम पहले से ही तय कर लिए थे... आप बड़े लेखक बने आपकी लेखनी में दम है और आपसे व्यक्तिगत द्वेष किसी को नहीं है .. लेकिन आप अगर किसी बात को समग्रता में रखेंगे तो ही वह सार्थक होगा.... एकपक्षीय दृष्टिकोण रखना लेखक के लिए भी खतरनाक होता है और पढने वालो के लिए भी .. और आपके समर्थक एक भी तर्क न देकर केवल हवा में बाते कर रहे है की रामदेव से ये खतरा है वो खतरा है.... आखिर कुछ मुट्ठी भर लोग है जो उनके विरोध में है जिन्हें आप बुद्धिजीवी मानते है लेकिन क्या वे करोनो लोग मुर्ख है जो उनके समर्थक है ? आप को ये बात समझनी चाहिए थी की किसी मजदूर किसान को योग की जरुरत नहीं होती... उनकी जीवनचर्या है ऐसी .. . और मान लीजिये की उनसे गरीबो को फ़ायदा नहीं हो रहा ... पर क्या किसी को फायदा नहीं हो रहा ? शहर से लेकर गाव तक लोग अनुलोम विलोम और भ्रस्तिकासन , और कपाल भाती कर रहे है माइग्रेन जैसी बिमारिया जिनका एलोपैथ में इलाज केवल नींद की गोलिया और पेन किलर है से आराम मिल रहा है... और दुसरे को छोड़ दे मेरा इन्हेलर छुट गया .. योग से मै 92 से परेशान था और derifailin का injection ही लेना पड़ता था.. तो हम कैसे आपकी बात को समर्थन करे... जो हमें दिख रहा है उसे आप इसतरह से झुठला रहे हो और भविष्य का डर दिखा रहे है ... रही बात जानकारी की तो मिहिर मै आपको बता दू.. बिना वास्तविक जानकारी के मै कोई बात नहीं करता ... और वो भी सभी पहलुओ को माप तौल के....न की एकपक्षीय... चलिए बाबा से गरीबो को फ़ायदा नहीं हुआ... पर जिन्हें हो रहा है उनकी बात क्यों नहीं रखी आपने.. ? और अगर सारी दुनिया अपना बाजार भारत में फैला रही है बाहरी लोग यहाँ आकर अपने इन्वेस्टमेंट से कई गुना धन कमा कर फिर वही आर्थिक शोषण कर रहे है तो रामदेव जी अगर योग को ग्लोबल बना कर उसे धन कमा रहे है तो क्या परेशानी है ...? और अगर राजनीती में वे आते है तो क्या समस्या है... ? ये उनका व्यक्तिगत निर्णय है.... आपकी इच्छा हो आप आइये.... और समस्या है तो उसे केवल उठाइए नहीं उसका समाधान बताइए... आप नोवेलिस्ट है ..आपने कभी किसी के हित की लड़ाई में आवाज उठाई ? रामदे जी ने स्विस बैंक में भारतीय धन को लेन की बात कही उसके बाद सभी दलों ने इस मुद्दे को उठाया और सरकार को इस मुद्दे पर पहली बार स्विस सरकार से गंभीरता से बात करनी पड़ी... ये बात आपने क्यों नहीं उठाई,,, क्या ये सामान्य कदम था ? मिहिर जी ऐसे कई सवाल है कई तथ्य है जिन्हें आप नकार नहीं सकते...और वास्तविकता आप पूरी तरह जानते तो इस तरह एकतरफा आलोचना नहीं करते... ये बहुत आसान सा काम है किसी व्यक्ति पर आक्षेप करना लेकिन बढ़िया ये होगा की पहले हर पहलु पर गौर करे.... किस की बरैया बताये ये तो लेखक की जिम्मेदारी है.. पर उसकी खुबिया भी बताये.... कबीर के एकमात्र आसान से प्रश्न का उत्तर क्यों नहीं दिया किसी ने..क्या किसी को एक भी ऐसा आदमी नहीं मिला जिसे रामदेव जी से फ़ायदा हुआ हो... ? अगर आप अपने समर्थको की बाते सुनेंगे तो आपको पता चल जायेगा ..की मुर्खता भरे जवाब कौन दे रहा है... क्या ये आपको सही लगा किसी को मिलने नहीं दिया गया तो वो बाबा की असलियत बताने लगा , किसी का मरीज नहीं ठीक हुआ तो वो गाली देने लगा ... अब आप ही बताइए... ?आप स्वयं अपने लेख को फिर से ध्यान से पढ़िए तो आपको पता चलेगा की आपका मूल्याङ्कन कितना अधुरा , और तर्कहीन है . मेरे किसी कमेन्ट से आपको बुरा लगा हो तो माफ़ी चाहता हु... मित्र .. आपसे बहत उम्मीदे है... नकारात्मक कलम चलने वाले बहुत है ..यहाँ आपके ही एक ब्लॉग में ऐसा लिखा था... आप तो सकारात्मक लिखे.... कोई भी बात पर्सनल नहीं लीजियेगा मै भी नहीं लेता हु ..और हा अगर विरोध आपके प्रशंषको को अच्छा नहीं लगता तो मै आपके ब्लोग्स पे आगे से कमेन्ट नहीं करूँगा ..... शुभकामनाये ....

के द्वारा: NIKHIL PANDEY NIKHIL PANDEY

कोई खास आश्चर्य नहीं हुआ इस लेख को पढ़कर क्यूंकि गांधी जी को भी कुछ लोग इसिही तरह से अपनी आलोचना का शिकार बनाते थे लेकिन चूँकि उनको भी कोई फरक नहीं पड़ा था और पूर्ण विशवास है की रामदेव जी को भी कोई फर्क नहीं पड़ेगा ये तो भाई लोकतंत्र है ! मई दुसरो की नहीं जानता लेकिन उन्होंने मेरी और मेरे जैसे न जाने कितने लोगो का इन्हेलर फिकवा दिया और सुबह जो प्राणायाम का आनंद है उसे ये विरोध करने वाले नहीं जानते आप सब लोगो को मेरा सादर आमंत्रण है सिर्फ एक दिन मेरे नवाबगंज में आकर मेरे साथ योग करके देखे और फिर विरोध करे ! ये प्रकति किसी से क्या कुछ लेगी ये तो सिर्फ देना जानती है और रामदेव जी तो सिर्फ एक माध्यम है

के द्वारा:

आप के सारे प्रश्नों का जवाब पहले ही निखिल जी दे चुके है लेकिन आप तो सिर्फ अपना तर्क (कुतर्क ) रखना जानती है लेकिन आप की सुविधा के लिए मैं इसे फिर रख रहा हूँ! Scheme for Construction of Individual Room Units under Patanjali Yogpeeth (Trust) You can also construct an Individual Room Unit in the name of yourself/ your parents/ your forefathers or your Institution through donating to Patanjali Yogpeeth (Trust) Scheme for Construction of Individual Room Unit Type of Units : Under the scheme, the Donors will be able to construct three types of Units, Donor will only be able to use this accommodation during the Residential Yog Science Camps of the Institution. इस एक बात से आपके तीन प्रश्नों के उत्तर मिल जाते है,बात ये थी और आपने बना क्या दी ! बाजारीकरण तो बहुत ही अच्छा है कम से कम पैसा विदेशो से आता है जाता तो नहीं और टिकेट तो मैच की भी बैंको में बिकती है ! आप के ५वे प्रश्न का उत्तर मैने आज ही दिया है इसलिए फिर कहूँगा की आप कुतर्को में माहिर है ! गरीबों के साथ फोटो खिचाने से अगर कोई महान हो जाता तो हमारे सारे नेता महान हो जाते ,आप को बता दू की हर सप्ताह एक दिन पतंजलि में गरीबो को दवा मुफ्त या रेट टु रेट दी जाती है ! और रही बात आपा खोने की तो मैंने कभी भी नहीं देखा मैंने पहले ही लिखा है की समस्या मानसिकता की है ! और अब आते है आपके उस्मान जी से सहमत होने पर की लेखक सिर्फ लिखता है सफाई नहीं देता ,ये सिर्फ और सिर्फ तानाशाही वाले शब्द है,इस लोकतंत्र में जवाबदेही से तो राष्ट्रपति भी नहीं बच सकता! सलमान रश्दी और तसलीमा नसरीन के बारे में आप क्या कहेंगे इन्होने भी सिर्फ लिखा था ! खैर अब बहुत हुआ शांतनु से सहमत होते हुए मै अब इसमें नहीं लिखूंगा और आप से कोई उत्तर की आपेक्षा भी नहीं करूँगा ! दिल दुखाने के लिए क्षमा चाहूँगा

के द्वारा:

ॐ हिन्दू धर्म का है इसमें कोई शक नहीं..ये सिख का भी है क्युकी उनकी भी उत्पत्ति हिन्दू धर्म से हुई है और वो ॐ को उल्टा नहीं करते आपको बता दू अगर आप मानते है की मुस्लिम धर्म की उत्पत्ति भी हिंदुत्व से ही हुई है तो आप चेहे तो उल्टा कर ले इसे... मेरे सवालो का जबाब अभी भी नहीं मिला. AC का विरोध बाबा खुद करते है उस केस में वैसा रूम वान्प्रष्ठ में क्यों? २ वन्प्रष्ठ सन्यास का ही एक चरण है ये क्या इस तरह से हो सकता है? २ फ्लैट क्यों बेचे जा रहे है?वो भी पैसे वालो को ही? 3टिकेट का बांको में मिलना क्या बाजारीकरण का नमूना नहीं है? ४ बाबा ने कितनी ही बार इलेक्ट्रोनिक मिडिया में बहस के दौरान आप खोया है मई जानती हु पता नहीं आप लोग वो नहीं देखेंगे. महान आदमी से ऐसी अपेक्षा नहीं होती. ५ योग और औषधि अगर अमीरों के लिए ही है तो इसकी क्या उपयोगिता है इस देश में जहा गरीब ही रहते है? ५ अगर किसी ने किसी गरीब के साथ बाबा की कोई फोटो नहीं देखि तो उसकी मंसुकता गन्दी है आपने देखि है तो बताये कहाँ? आप अपनी मंस्कता के उन्चिन होने का प्रूफ दे? ५ पत्रकारिता में बुरे पक्ष और अछ्हे पक्ष दोनों रखे जाते है जो बुरा लिख दिया क्या वो देशद्रोही है? अगर इस लेखक ने आलेख नहीं लिखा होता तो बहुत से लोगो को जिनमे मैं भी शामिल हु पता नहीं चलता फ्लाट्स और वान्प्रष्ठ का मजाक.और भी कई चीजे. लेख यथार्थता के निकट नहीं होता तो इतने लोग इनके पक्ष में नहीं बोलते.. मई सहमत हु उस्मान से की कोई लेखक सिर्फ लिखता है सफाई नहीं देता.. क्या अब जो विरोध के स्वर उठ रहे है लेखक के खिलाफ मैं भी इसे आप लोगो की तरह टीम का नाम दे दू? जी नहीं ये व्यग्तिगत राय है जो अलग अलग हो सकती है..कोई पक्ष में कोई विपक्ष में आप लोगो को लेखक की तारीफ करनी होगी की कही कोई दुविधा न रहे उन्होंने लिखा और पक्ष विपक्ष में इतनी बहस हो रही है..बस आप तो कहेंगे पूर्वाग्रही और राष्ट्रदोही आपको भी कहने से ही मतलब है..

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भाई साहब शिवेंद्र कोई भी अच्छा लेखक सिर्फ लिखता है बहस करने के लिए आप लोगो और हम लोगो को छोड़ देता है..अगर आपकी भाषा में लेखक ने आग लगा दी है तो आप लोग हवा दे रहे है..कलम के सिपाही का कम सिर्फ अच्छे पक्ष को रखना ही नहीं होता..मैंने भी ये ब्लॉग पढ़ा पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी पर अब देनी पद रही है..पता नहीं कबीर क्यों ॐ को उल्टा तंग रहे है..हमे इसकी जरुरत नहीं कबीर चाहे तो जो करे..आपने तो लेखक को राष्ट्रदोही करार दिया..बाबा रामदेव के पक्ष में लिखते तो राष्ट्र्भाख्त कहलाते?भारत रत्न आप दिलवाते?हसी आती है..और एक बात कोई लेखक सही में लिखता है किसी विषय में खुद को सही दिखने को सफाई नहीं देता वो हम और आप करते है..

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गौरव जी आपने सही लिखा है की भारत की बहुसंख्य आबादी गरीबी रेखा के नीचे जीती है जिनके लिए योग का कोई महत्त्व नहीं है,तो फिर उनके लिए योग जिम्मेदार भी नहीं है !निखिल जी ने सही लिखा है की गरीब लोग खुद इतना परिश्रम करते है की उन्हें योग की जरुरत ही नहीं है ! दिव्या जी आपको और गौरव जी आपको भी बाहर पार्क में या घर की छत में बैठकर सिर्फ १५ मिनट लम्बी सांसे लेने में कितने पैसे देने पड़ेंगे और उसमे से कितने रामदेव के पास जायेंगे! सिर्फ लम्बी साँसे लेने की बात कर रहा हूँ दिव्या जी, हद है यार,आपको योग के बाजारी करण से नुकसान दिख रहा है,लेकिन कितनो को रोजगार मिल रहा है वो नहीं दिख रहा! क्या रामदेव आपको अपने योग शिविर की टिकेट लेने के लिए बाध्य करते है !जिन्हें लेना होता है सिर्फ वही लेते है,और जिन्हें फायेदा हो रहा है उन्हें आप जैसे लोगो की बातो से कोई फर्क नहीं पड़ता,क्यों की समुद्र की गहराई उसके किनारे बैठकर नहीं नापी जाती इसके लिए उसके अन्दर जाना पड़ता है! निखिल जी ने जो लिखा उसे लेख कहते है! जो यथार्थ है जो सच है उसे पेश करे न की अपनी व्यक्तिगत राय को उसमे मिलाकर बड़ा महान बनाने का प्रयाश करे !

के द्वारा:

गौरव जी आपने सही लिखा है की भारत की बहुसंख्य आबादी गरीबी रेखा के नीचे जीती है जिनके लिए योग का कोई महत्त्व नहीं है,तो फिर उनके लिए योग जिम्मेदार भी नहीं है !निखिल जी ने सही लिखा है की गरीब लोग खुद इतना परिश्रम करते है की उन्हें योग की जरुरत ही नहीं है ! दिव्या जी आपको बाहर पार्क में या घर की छत में बैठकर सिर्फ १५ मिनट लम्बी सांसे लेने में कितने पैसे देने पड़ेंगे और उसमे से कितने रामदेव के पास जायेंगे! सिर्फ लम्बी साँसे लेने की बात कर रहा हूँ दिव्या जी, हद है यार,आपको योग के बाजारी करण से नुकसान दिख रहा है,लेकिन कितनो को रोजगार मिल रहा है वो नहीं दिख रहा निखिल जी ने जो लिखा उसे लेख कहते है! जो यथार्थ है जो सच है उसे पेश करे न की अपनी व्यक्तिगत राय को उसमे मिलाकर बड़ा महान बनाने का प्रयाश करे !

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निखिल जी बहस यहाँ आपके बुद्धिजीवी होने न होने का नहीं है..आप निसंदेह जानकर है पर आप सरे पक्ष जान कर भी कभी मानेंगे नहीं क्युकी ये आदत गलत मणि जाती है आज कल के जमाने में. योग के बाजारीकरण से मुझे लाभ तो नहीं हाँ नुकसान बड़ा दिख रहा है.. १ लोगो में इस विधा को ले कर घटता विश्वास. २ लोगो का अन्धविश्वास की सारी बिमारिओं का इलाज़ योग के माध्यम से है ३ ॐ को ले कर उठते विवाद से हिन्दू धर्म का आहात होना आदि... पहली बात की बाबा रामदेव किसी डॉक्टर से ज्यादा महंगे है..उनके शिविर में आम आदमी नहीं जा सकता हाल ही में आयोजित उनके शिविर का टिकेट बैंक से बेचे गए और अंतिम पंगती का शुल्क २५०० रुपया था आप बताये कौन जा पायेगा वही न जिसके पास पैसा है..कितने लोग है ऐसे? मैंने पूरा पढ़ कर ही प्रतिक्रिया दिया था आपको मेरे आपके और प्रकश जी के बिच हुए विवाद का जिक्र करना एक उद्देश्य था जिस से मैं आपको बता पाऊ की एक आदमी जो योग नहीं करता और एक आदमी जो योग करता है परिश्थिति वश एक जैसा वर्ताव करता है..योग ने आप में कोई बदलाव नहीं लाया नहीं तो आप यु उनके कहने पर भी अपना आप नहीं खो देते.. अगर मिडिया प्रायोजित मंच की तरह काम कर रही है तब तो ये भी संभव है की बाबा जी ने अच्छा खासा पैसा मिडिया को दिया मुख्या रूप से इलेक्ट्रोनिक को की उनका प्रचार कर सके और वो टी वी पर रह सके ज्यादातर.मत भूलिए इन्सान को ब्रांड मिडिया बना देती है हो सकता है बाबा भी ऐसा किये हो... देखिये रामदेव जी से पहले भी योग और व्यायाम लोग करते थे और उन लोगो को इस से आराम भी मिलता था..बाबा से निसंदेह कुछ क्या बहुतो को आराम मिला होगा पर ये लोग सच में कितने है मेरे आस पास तो कोई नहीं..मैंने आपको भी देखा बुरा मत मानिये आप भी योग करते ही होंगे.. मैंने आपको अशालीन नहीं कहा वो तो आपके प्रतिक्रिया लिखने के तरीके ने आपको बनाया..आपने गलती की और माफ़ी मांगी ये आपकी नेकी है पर मेरे उतना कहना बस इस लिए था की योग अगर आप करते है जाहिर है करते ही होंगे जब बाबा को इतना मानते है तो क्या योग ने आपको मन पर काबू करना नहीं सिखाया..? अब आप मेरे सवाल का जबाब दीजिये जो बार बार मैं पूछ रही हु और आप अनदेखा कर रहे है..बाबा कहते है AC मत उपयोग करो और वो खुद AC वाला रूम वान्प्रष्ठ आश्रम में लौंच कर दिया..कबीर ने कहा लेखक पर DUAL FACE जचता है तो फिर बाबा पर क्या जचता है? वान्प्रष्ठ ऐसे संभव है?वो कह रहे की बच्चे अपने माँ बाप से उनके बुढ़ापे में जब उनको उनकी सच में जरुरत होगी छुटकारा पा सकते है एक मोटे रकम दे कर पतंजलि में..अच्छी सिख है बाबा को समाज के नाम...

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मित्र निखिल लगता है ये बहस हमरी लम्बी चलेगी खेर जब आपने मन बना ही लिया है तो चलिए योग का बाजारीकरण का मुद्दा उठा है जिसको आप सही ठहरा रहे है आप इस बात को मन ने को तैयार ही नहीं की भारत की बहुसंख्य आबादी गरीबी रेखा के निचे जीती है जिनके लिए योग का कोई महत्त्व नहीं है..पूरा खाना नहीं मिलता बाबा के शिविर में जिसका टिकेट बांको में मिलता है कहा से खरीदेंगे.... मिहिर जी के लिखने को ले कर कोई शक यहाँ किसी को नहीं है सभी ने उन्हें उम्दा लेखक के सम्मान से सम्मानित कर दिया है इस ब्लॉग के काफी पहले.. रामदेव जी के योग पद्धति से बहुतो को आराम मिला होगा इस बात से मैं कहा इंकार कर रहा हु..लेखक ने भी ये नहीं कहा मैं बार बार कह रहा हु..योग की आलोचना नहीं उनके निति और व्यापार की आलोचना हो रही है.. आप से मेरा सवाल है जो दिव्या जी ने भी पूछा था शायद की सर दर्द होता है आपका तो आप कौन सी औषधि खाते है? कोई बड़ी बीमारी का नाम नहीं पूछ बता हु मैं? मेरी जानकारी में भी शल्य चिकत्सा आयुर्वेद में नहीं होता है..बाबा के आलावा शायद ही कोई करता होगा.. आपने अर्थशास्त्र की बात की है तो आपको बता दू की if demand increases twice price increases 4 times... this is the basic law of economics as per my knowledge... खेर मन आपका करेगा तो हम अर्थशास्त्र पर भी बात करएंगे.. आपको पता नहीं है शायद की नीम या दुसरे दातुन से मुह धोना जरुर लाभप्रद है पर बीते समय में ओर्थोदोंटिक प्रोब्लेम्स भी आई क्युकी ये दातों के हर पार्ट में उतना प्रभावशाली नहीं हो पता है जितना की टूथब्रुश.. और माफ़ कीजिये मई सहमत नहीं की कोई अरबपति योग करता है और पतंजलि जा कर अपना इलाज करवाता है..ये हम और आप जैसे मिडिल क्लास के लोग करते है..जो कोई भी चीज बड़ी जल्दी मान लेते है और दिमाग से हटा भी देते है.. लेख को ध्यान से पढ़े और बताये की स्वाइन फ्लू के समय बाबा ने कौन सी दावा दी थी और उस से कितने लोगो की जान बचाई जा सकी थी.. मैं फिर कहूँगा योग से किसी को आपत्ति नहीं है बस नीतिया गलत है..गरीबो की बात आप नहीं कर के अमीरों से पैसा निकलवाने की बात कर रहे है... उम्मीद है आप मेरी बातो का बुरा नहीं मानेंगे और प्रतिक्रिया जरुर लिखेंगे..

के द्वारा:

मित्र गौरव .... जी बेहतर है की यहाँ हम उस मुद्दे पर ही बात करे , यहाँ योग के बाजारीकरण पर चर्चा हो रही है न की मिहिर जी के लेखन कौशल पर....कुछ मूलभूत बाते समझनी पड़ेंगी हमें ,आपकी बात एकदम सही है की हम आज भी सामान्य प्रयोग में अलोपित का प्रयोग करते है इसे कम करना ही रामदेव जी का दीर्घकालिक लक्ष्य है , हमारे देश में प्राचीन अव्य्र्वेदिक पद्धति में कई ऐसे जड़ी बूटिया है जो कई प्रकार के असाध्य रोगों के लिए उपयोगी है ...जैसे... हल्दी आवला, नीम तुलसी , अश्वगंधा , जामुन , इत्यादि बहुत सारी है , पर हमारी सरकारों ने भारतीय चिकित्सा पद्धति को कभी प्रोत्साहित नहीं किया इसकारण आज की पीढ़ी इनसे बहुत दूर हो गई है .. और तो और विरोधी हो गई है... एक उदाहरण आपको दूंगा...... एक प्रसिद्ध पत्रिका में निकला की नीम की दातुन करने से दातो का बाहरी आवरण नष्ट हो जाता है .. इसलिए टूथपेस्ट करे... अमेरिकी वैज्ञानिको का शोध है....उसके बाद हमारे ही शहर में लोगो ने हल्ला मचा दिया की नीम की दातुन खतरनाक है ,,,, पर हम इतने अंधे है की हमने अपने बुजुर्गो को देखने की जहमत नहीं उठाई जो50-60- सालो से नीम की ही दातुन कर रहे है और उनके डाट में आज तक कोई समस्या नहीं हुई .. तो ये इसी तरह प्रचार करा के हमारी प्राकृतिक औषधियों पर अपना नियंत्रण करने उन्हें खोज के पहले पेटेंट करलेने और फिर उन्ही से बनी दावा हमें ही उल्टा कई गुना दामो पर बेच देने की शाजिश होटी रही है .. नीम के पेटेंट को पाने के लिए भारत सरकार ने बहुत मशक्कत की thi.... रामदेव जी भी उन औषधियों को ढूंढ़ कर उन्हें पेटेंट करा रहे है उनसे दवा बना रहे है.... गौरव जी जहा तक कीमत का सवाल है आप जानते है की अभी बाजार में जागरूकता न होने की वजह से उन दवाओ की मांग कम है इसलिए उत्पादन कम है और इसीलिए कीमते ज्यादा है ये तो सामान्य अर्थ शास्त्र है जो सभी के लिए सामान है पर जब मांग बढ़ेगी और उत्पादन बढेगा तो सरकार भी रूचि लेगी ,,प्रोत्साहन देगी तो कीमते घटेंगी इन दवाओ की ... इससे गरीबो तक ही सबसे ज्यादा फ़ायदा पहुचेगा ... और एक बार अगर हमारी ये पद्धति व्यवहार में आ जाएगी तो फिर सबसे बड़ा घटा इन्ही बाहरी कंपनियों को होगा इसलिए वे साम दाम दंड भेद हर तरह से रामदेव जी के खिलाफ खड़ी हो रही है .और भारतीय आयर्वेद को असफल करार देने का प्रचार कर रही है...ये एक वैश्विक साजिश है .. और दुर्भाग्यपूर्ण रूप से हम ही इस साजिश में सहयोग कर रहे है.... और आप ही सोचिये अगर इन दवाओ का फ़ायदा नहीं होता तो क्या वे अरबपति करोंपति जो दुनिया में कही भी अपना इलाज करवा सकते थे वे पतंजलि पीठ में क्यों जाते.... ? उम्मीद है की आपको कोई बात बुरी नहीं लगी होगी...

के द्वारा: NIKHIL PANDEY NIKHIL PANDEY

आपने सच्चाई को लिखने में महारथ हासिल की है वो भी बहुत ही सुन्दर प्रस्तुतीकरण के साथ, आज यु ही नेट सर्फ़ करते करते आपके इन ब्लोग्स का लिंक मिला यु ही खोल कर सोचा देखू और यकीं मानिये आपकी सारी की सारी ब्लॉग मैंने एक ही बार पढ़ लिया..मेरे दोस्तों ने भी जो उस वक़्त मेरे साथ आपका आलेख पढ़ रहे थे सब ने आपकी कोटि कोटि प्रशंसा की और शुभकामनाये दी..हम आशा करते है आपका नोवेल भी आपके ब्लोग्स की तरह ही सफल हो..मुद्दा की बात पर आऊ तो क्या बचा है यहाँ कहने को बस इतना ही कहूँगी की सच कहना बड़ा सहस का कम है सब के बस का नहीं है और हाँ आप में बहुत काबिलियत है..बाबा के नीतिओं की विरोधी मई भी हूँ और मेरी जानकारी में कुछ एक को छोड़ कर सबको बाबा का ये नया नया कार्यक्रम भाता नहीं..उनसे बेहतर मई रविशंकर जी को मानती हूँ जो समाज सेवा के लिए हमेशा प्रयत्नशील रहते है..मुस्लिमो का झुकाव बाबा के प्रति कोई नयी बात नहीं है इनको बाबा से ही खतरा था की अगर धर्म प्रचार में लग गए बाबा तो इनके यहाँ भूचाल आ जायेगा तो एन कें प्रकें बाबा को इन्होने पोत लिया है..बाबा के खिलाफ मैंने पहला आलेख पढ़ा है अब तक और पूर्वाग्रह वाली बात मुझे तो नहीं लगती..अगर है भी तो कुछ सच्चाई होगी ही..आप लिखते रहे क्युकी हमें आपके अगले ब्लॉग का बेसब्री से इंतजार रहेगा...शुभकामनायें...

के द्वारा:

दिव्या जी मै बुद्धिजीवी नहीं हु मगर जो सामने दीखता है उसे ज्यो का त्यों भी नहीं मानता .आपसे एक बात स्पष्ट रूप से कहूँगा की मै किसी भी मुद्दे पर तबतक एक पक्षीय नहीं होता जबतक सारे कोनो से समझ न लू .. क्योकि मुझे अछे और बुरे दोनों पहलुओ पर देखना सही लगता है .. ये मै पहले भी कह चूका हु की मै रामदेव जी को दूध का धुला नहीं साबित कर रहा ... चलिए मान लिया की योग का बाजारीकरण हो रहा है .. तो समस्या क्या है ?और नुक्सान क्या है आप ये बताइए..१००० रुपये का गुटका , तम्बाकू, सिगरेट, शराब, हम पी जाते है अगर महीने में एक बार एक शिविर में एक सप्ताह ५०० -१००० रुपये देकर एक सप्ताह योग कर लिया तो नुक्सान हुआ या फ़ायदा आप ही बताये ? आयुर्वेद पद्धति पहले भी थी आपसे मै सहमत हु पर यह पद्धति हमारे दैनिक प्रयोग से दूर होती जा रही थी ? पतंजलि योग पीठ का एक ये दीर्घकालिक उद्देश्य है की ऐसे प्रशिक्षण केंद्र खोले जाये जहा आयुर्वेद के बारे में अच्छी ट्रेनिंग दी जाये ताकि गावो में जहा अंग्रेजी दवाए ..और डोक्टर का खर्च उठा पाने में ग्रामीण असमर्थ है उनका इलाज आयुर्वेदिक पद्धति से हो सके इससे जहा एक तरफ रोजगार बढ़ेगा ..तो दूसरी तरफ गावो में मदद भी पहुचेगी ..पर ये क्या तुरंत संभव है इसके लिए धन और समय दोनों चाहिए ...क्या aisa नहीं लगता की हम बहुत पहले ही सारे निष्कर्ष निकल चुके है ... हम ये बात पचा नहीं प् रहे की एक आदमी योग को इस स्तर पर ले गयाऔर अब राजनीती में भी जा रहा है ... हम खुद तो कुछ नहीं करना चाहते और और कोई करने चला तो उसकी टांग खीचने लगे .. आपको पता है कितनी जड़ी बूटिया पतंजलि योगपीठ ने पेटेंट कराइ है ... क्यों कराइ है? ये सोचा.? क्योकि इनपे पूरा शोध होता है पीठ में २ बड़े रिसर्च सेण्टर . ,.... क्योकि ये अनमोल जड़ी बूटिया अगर विदेशी लोगो के हाथ लग जाएँगी तो हम फिर उसी तरह रोयेंगे जैसे नीम के पेंटेंट को वापस पाने के लिए मशक्कत करनी पड़ी थी.. आप जानती होंगी हर साल भारत के जंगलो और पहाड़ी स्थलों पर सैकड़ो की संख्या में विदेशी शोधकर्ताओ की टीम आती है है इन्ही जड़ी बूटियों की खोज में .. और एक बात आप से निवेदन है की पहले आप pura padhe तब प्रतिक्रिया दे .. प्रकाश जी से जो बात हुई मैंने उनसे सार्वजनिक माफ़ी मांगी .. और वो भी तब जब पहले बात गलत तरीके से उनहोंने ही कही .. दिव्या जी दूसरी बात मीडिया के बारे में मुझे कुछ कहने की जरुरत नहीं है ..सारा देश जानता है की आज मीडिया एक दम प्रायोजित मंच की तरह कार्य कर रहा है .. और अगर आप ध्यान से पढ़ती तो पता चलता की मैंने ये कहा था की मीडिया का एक पक्ष न की सारा मीडिया ...क्योकि उसका महत्व उतना है मै समझता हु ,जितना की आप ...मानती है लेकिन आज मीडिया जिस गैरजिम्मेदाराना ढंग का व्यवहार कर रहा है वो सभी के सामने है ,, मै इलेक्ट्रोनिक मीडिया की बात मुख्या रूप से कर रहा हु .यद्यपि उसका महत्व न कम था न होगा आपने यु ही मुझे तानाशाह करार दिया.मै तानाशाह नहीं हु . खैर मै किसी बात को यहाँ व्यक्तिगत नहीं लेता न ही आप ले... आप बस कबीर जी की बात का सीधा जवाब दे दे ........ की क्या रामदेव जी से भारत में किसी को फायदा नहीं हुआ है ????/ अगर आपका जवाब ये है की हुआ ?.. तो समस्या क्या है? योग का बाजारीकरण हो रहा है.. रामदेव विदेशी मुल्को से योग सिखा कर धन वसूल रहे है तो वो सिखा रहे है धन ले रहे है .... किसी को गोली मार के अपहरण कर के तो धन नहीं लूट रहे , अगर विदेशी कंपनिया भारत में आकर अपना सामान बेच रहे है तो वो भी अपना योग कौशल बेच रहे है ... क्या दिक्कत है किसी को .. भारतीय शाश्त्रीय संगीत सिखने वाले दिग्गज कलाकार विदेशो में प्रोग्राम देते है , सिखाते है धन कमाते है ..वो भी अपनी योग कला का प्रदर्शन कर रहे है आप सबको क्या दिक्कत है .. वो स्वतंत्र है अपना निर्णय लेने के लिए ,, राजनीती में आये या कही जाये.. उनका निर्णय है .. आप नहीं कुछ कर सकते दुसरे को तो करने दीजिये... आपने मुझे अशालीन ठहरा दिया चलिए एक बार जागरण मंच पर मुझसे गलती हुई प्रकाश जी के साथ ये उसकी सजा है .... और सबक भी की आगे से मै ऐसी पतिक्रिया न दू.. आपको मेरा लेखन भी अच्छा लगा तो धन्यवाद ...

के द्वारा: NIKHIL PANDEY NIKHIL PANDEY

निखिल जी को धन्यवाद्, अच्छा और सार्थक होने में फर्क है आपके इस एक वाक्य ने बहुत कुछ कह दिया है अगर एक मिहिर जी कहानी की तरह,अपनी बात को लिखकर, मिर्च मसाला लगाकर,एक ऐसे व्यक्ति के बारे में गलत लिखते है जिसने टीवी के माध्यम से योग को आम जन तक पहुचाया,और जिसके योग से लाखो लोगो को लाभ पहुंचा, तो मुझे लगता है मिहिर जी सिर्फ आधा गिलास खाली देखने के आदी है भरा नहीं !आपको उनके बारे में भी सोचना चाहिए था जिन लोगो को उनसे लाभ हुआ है, जो आज के समय के ढोंगी बाबा लोगो से अलग है राष्ट्र भक्त है, बाबा तो हजारो मिल जायेंगे लेकिन कितने है जिनकी वजह से आम जनता को फायदा होता है ! समस्या सिर्फ यही नहीं है समस्या वो लोग भी है जो अपने मित्र की तारीफ़ कर रहे है किसी न किसी लाभ को ध्यान में रखकर, इनलोगों को तो सबसे पहले मिहिर जी को आइना दिखाना चाहिए था लेकिन लगता है आज कल ऐसी ही पत्रकारिता का दौर चल रहा है ?

के द्वारा:

भाई मिहिर जी..पहले तो आपको ढेरो बढ़िया की आपने इतना बड़ा सच का आइना दिखाया है हमे..आपको एक सुझाव दूंगा जरूर अमल कीजियेगा जिन्दगी में सफल वही लोग हुए है जो अपनी बात जो की सत्य है बिना कुछ सोचे समझे इमानदारी से कह देते है..दुनिया का नेतृत्व ऐसे ही लोग करते है..आप में सारी सम्भावनाये है..आपकी लेखनी और विचारो को ले कर मेरे मन में कुछ लोगो को छोड़ कर कोई संदेह नहीं है..आज से पहले भी मैंने रामदेव जी के ऊपर ब्लॉग पढ़े है पर उनकी चाटुकारिता में पर आपने काफी साहसी कदम उठाया और अपने अनुभवों के जरिये हमे भी अवगत कराया..भारत में ये हकीकत अब सब जानते है योग भारत की शान है और मेरे ख्याल से आपने बाबा के योग की निंदा नहीं की है पढने वालो को आपका ब्लॉग गन्दा इसलिए लग रहा है की कठोर बाते की है आपने इस साधुओं के देश में..कोई क्रिकेट को धर्म मन बता है कोई सचिन को भगवन कोई बाबा जी को..आदमी का अपना कुछ नहीं रहा..योग जब गरीबो के कम नहीं आ सकता तो क्या जरुरत है इसकी यहाँ? बस इसलिए की हमने उसे जन्म दिया है..अमेरिका में इसकी जरुरत है जहा ७०% खुशहाली है..और लोगो के पास पैसा है..एक गरीब दिन भर कम करता है तो किसी तरह आधा पेट खा कर बाद बाकी अणि पि कर सोता है योग क्या उसकी भूख मिटा सकता है..बाबा को मैंने टी वी पर अश्लील शब्द बोलते सुना है..एक इंटरवियु में जहा वो सम्लेंगिगता पर बोल रहे थे..एक महँ आदमी के मुह से क्रोध में वो अश्लील बाते सुन न मेरे लिए मनो झटका था..आप लिखते रहिये लोग बुरे भी करेंगे पर अकेला आदमी चलता है कारवां तो खुद बन जाता है...

के द्वारा:

आपको सदर नमस्कार निखिल जी...वार्षिक आकडे मैं नहीं जनता आम आदमी हूँ यही देखा है की जो दवा खाते थे आज भी खा रहे है..चाहे सर दर्द ही क्यों न हो..कोला पिने वाले भी पिटे है आज का युवा कोला ही पिता है मैं ये नहीं कह रहा ये सही है..मैं बस बताना चाहता हु कमी कोई नहीं आई है अभी आप देखेंगे कोला की बिक्री..रही बात मिहिर के आलेख की तो बता दू की आपका ध्यान या बाद बकिओ का ध्यान क्यों नहीं गया उन हिजड़ो पर आप ने भी उनकी हालात देखि ही होगी.. आई पी एल का बुरा परिणाम आपने क्यों नहीं गिनाया..ये संजोग है की मिहिर ने लिखा और कुछ हुआ इन लोगो के लिए और आवाज़ उठी इस खेल के खिलाफ.. लेखक की लेखनी लेख को जिवंत और रूचिपूर्ण बनती है..आलेख आप भी लिखते है और बाद बाकि भी पर जो ले इस लेखक की लेखनी है बूरा मत मानिये मैंने बड़े बड़े ब्लोगर्स में नहीं देखा.. कुछ लोगो को आपति है की मसालेदार बाते जागरण मंच छाप रहा है भाई मसाला नहीं है सच में वास्तविकता और परिस्थिति का तड़का लगा देता है लेखक जो हमे अंत तक बंधे रखता है..मैंने कितने ब्लॉग खोले पर पूरा पढ़ नहीं सका...क्यों?लिखने की शैली अरूचिपूर्ण थी.और लोग भी होंगे मेरी तरह.. आपने ही कहा की जागरण पर २०० से ज्यादा ब्लॉग रोज आते है अब आप ही बताये मिहिर जी का हर ब्लॉग कैसे फीचर्ड होता है इतनी संख्या में और यही नहीं हमेशा ज्यादा चर्चित एवं ज्यादा पठित कातेगोरी में भी रहता है..मुझसे बेहतर आप जानते है.. क्या जागरण टीम की क़ाबलियत पर आपको और तुफैल को संदेह है..ये मंच अभी तक का सबसे बड़ा मंच है जहा आपको एक साधारण इन्सान से थोडा ज्यादा बन ने का मौका दिया जाता है.. आपने सार्थकता की बात की है तो बता दू अगर मिहिर बाबा के पक्ष में चाटुकारिता करते तो क्या ये आलेख और कदम सार्थक होता?? जो सच है उसे बताने में कठिनाइयाँ आती ही है और विरोध भी होता ही है..मिहिर जी ने एक छुपे हुए सच को बहार किया है जो मेरी दृष्टि में सार्थकता के सिवा कुछ और नहीं है... वैसे बाबा के पक्ष में और लोगो ने भी लिखे है इस मंच पर मिहिर को जबाब देने के लिए क्या हुआ उन आलेखों के साथ?कहा है वो आज? वो फीचर्ड भी नहीं हुए...जागरण की टीम विद्वानों से भादी हुई है उस पर आप और तुफैल शक की सुई न उठाये..ये मंच नहीं होता तो आज आप लोगो को कोई जानता भी नहीं.. अगर किसी के लिखने से कोई कदम उठ ता है तो आप उसे और उसके आलेख को कोई क्रेडिट नहीं देंगे आपका कदम आपकी सोच क्या पूर्वाग्रह से ग्रसित नहीं है??मेरी बातो का बुरा लगा हो तो माफ़ कीजिये.. मतभेद है मनभेद नहीं..

के द्वारा:

अभिनव जी अभिवादन, वास्तव में जागरण का यह मंच आप जैसे लोगों के लिए ही बना है. जहाँ बहस हो, मतभेद हो लेकिन एक सीमा रेखा के भीतर. मनभेद का तो सवाल ही नहीं होना चाहिए. ॐ और ७८६ का आपका तर्क बेहतरीन है. आपने बहुत बैलेंस करके लिखा है. मुझे लगता है की इस मंच पर बहुत कुछ ऐसा प्रकाशित हो रहा है जो की नहीं होना चाहिए. खुली अभिव्यक्ति का लाभ लेकर बहुत से लोग बहस से कोसों दूर बहुत कुछ अनर्गल अभिव्यक्त कर रहे है. इस मंच पर बहुत कुछ है पढने के लिए, जिसे लोग देखते भी नहीं है. कुछ लोग चट्खारापन अधिक पसंद करते है, लेकिन ये न तो कोई बहस है, न ही अभिव्यक्ति. सामाजिक समस्या और उसका निदान तो दूर-दूर तक भी नहीं. जागरण को इसके लिए व्यवस्था करनी चाहिए. धन्यवाद.

के द्वारा:

गौरव आप अगर कोला और दावा कंपनियों की वार्षिक आंकड़े देखेंगे तो आपको असलियत पता चल जाएगी .. अगर आकडे नहीं मिलते तो मै आपको उपलब्ध करने का प्रयास करूँगा .. आपने मेरा और कबीर का ही नाम लिया है ... तो बताना चाहता हु की लेखक अच्छा लिखता है .. अच्छा और सार्थक होने में फर्क है , किसी मुद्दे पर अगर समग्रता से सोचे तभी लेख सार्थक बनता है .. आपकी कुछ गलत फहमिया दूर करना चाहूँगा .. क्योकि हर दिन जागरण पर २०० से ज्यादा ब्लोग्स आते है और आपने कितने ब्लोग्स पढ़ डाले है ये आपकी बात से पता चलता है धर्म पर लिखना उस दिन से शुरू है जब से जागरण मंच लांच हुआ था .. और उसपे बहुत अच्छे लेख है ... क्या आपको नहीं पता की हिजड़ो पर चर्चा सरकार ke पास काफी समय से चल रही थी .. ipl की बात जहा तक है तो आपको ये पता होना चाहिए की उसका विरोध एक बड़ा वर्ग तबसे कर रहा है जबसे ipl शुरू हुआ है , मिहिर माफ़ी क्यों मांगेगे ? वो अपनी राय व्यक्त करने के लिए स्वतंत्र है और हम अपनी ... ? गौरव जी अगर वैचारिक मतभेद को जगह नहीं दी जाएगी तो सही बात कभी सामने नहीं आएगी... पर मतभेद मनभेद न बने ये ध्यान रखना जरुरी है ... मिहिर जागरण पे आछे ब्लोगेर है और इस नाते मित्र हुए और अगर विरोध है तो बात का विरोध है ,, उन तर्कों का विरोध है जिसके पक्ष में उन्होंने एक भी तथ्य नहीं दिया ? मिहिर का विरोध कैसे हुआ... इसे आपलोग व्यक्तिगत न ले...? कोला आमिर को ३५ क्या ५० करों रुपये दे सकता है क्यों की एक बोतल बनाने में ९० पैसे कास्ट आती है जिसे हम १० रुपये में लेते है ,,, २ रुपये की बड़ी बोतल बनती है उसके लिए ५० रुपये देते है और हमारी ही नदियों से फ्री का पानी लेकर १० पैसे प्रति बोतल की प्रोसेसिंग लगत लगाकर ये उसे १२ रुपये में बेचते है .. तो आप ही बताये .. वे प्रचार के लिए ३५ करोन नहीं देंगे तो कौन देगा ?? हम जिस आउट सोर्सिंग रुपी मजदूरी के पीछे मदहोश हुए है वह है बाजारवाद ... 100 रुपये का काम लेकर हमें लगभग ४ रुपये मिलते है .. क्कभी हमने जानने की कोशिश की है की बाकि 96 रुपये कहा गए ? किसे मिले? या कोला के ९ रुपये .. मिरल वाटर के बचे हुए ९ rupaye 90 पैसे कहा गए .. नहीं की कोशिश ..क्यों की जो बाजारवाद हमें हर तरफ से घेर कर खोखला कर रहा है वहा हम आवाज नहीं उठाते है .. और पूंजीपतियों की तिजोरी भरते जा रहे है .. ये बाजारवाद है गौरव जी , ... आप ही बताइए की अगर बड़ा पूंजीपति वर्ग योग के ही बहाने धन को अपनी तिजोरी से निकल रहा है और उससे देश में आयुर्वेद और योग की पद्धतिय विकसित हो रही है तो इससे अपने देश के लोगो में ऐसी मानसिकता बढ़ेगी की इन पद्धतियों का अध्ययन करे उनके माध्यम से इलाज करे... इससे गाव गाव में इलाज सस्ता होगा ... और आसान होगा... लेकिन इसमें समय लगेगा ... और हमें इंतजार करना होगा.... गौरव जी कोई बात बुरी लगी हो तो क्षमा करे पर आपसे ये ही कहूँगा की समग्रता में समझे केवल एक पक्ष नहीं

के द्वारा: NIKHIL PANDEY NIKHIL PANDEY

निखिल जी सारा कम छोड़ कर आप से इस आलेख पर बहस हो नहीं सकती पर करना मेरी मजबूरी है..आप की प्रतिक्रियाओं से बहुत कुछ जाना मैंने आपको...आप शायद खुद मिडिया लोकल में कम करते है और आप मिडिया पर आरोप लगा रहे है की बस टी आर पी ही सब है..आपको पता भी है की मिडिया किसी राष्ट्र का प्रतिक होता है..उसके तंत्र को चलने में मदद करता है अच्छी बुरी साडी बाते सामने aati है मिडिया से पर aapke swar mujhe तानाशाहों की तरह लग रहे है...मिडिया न हो तो आज बाबा को आप जन भी नहीं रहे होते..और आज हम भी नै जन पते की क्या क्या कर रहे है बाबा.. तथ्य आपकी दृष्टि में क्या होता है..सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीश कहते है प्रूफ नहीं सब्स्तन्सिअल प्रूफ चाहिए आरोपी को दोषी करार देने को,,,आज तक कोर्ट ही नहीं बता पाई क्या है ये प्रूफ? बाबा को क्या दावा में कुछ मिलते देखे तभी ही उन्हें दोषी कहेंगे..??? aayurved बाबा से pehle भी tha wahi bat yog ke sath भी है और बाबा ke bad भी rahega..ab आप बताये जिस योग का गरीबो किजिंदगी से कोई लेना देना नहीं है वो क्या भारत की मुश्किलें दूर करेगा क्युकी ये खुद भारत में गीब ही है ६०%. अम्बानी को कही आने की जरुरत नहीं वो सत्ता बदल देने तक की क्षमता रखते है.. मिहिर मुझसे भी छोटा है और मैं मान सकती हु की बाबा के खिलाफ बाते हो रही है उसके आलेख से पहले भी पर इतना रेस्पोंसे इतनी बहस और इतना सुप्पोर्ट मैंने नहीं देखा..क्युकी मेरा काम भी समाचारपत्रों के साथ खेलना ही है..इस लेखक की क्षमता पर मुझे तो कोई shak नहीं है.. aapke इस jagaran पर chuninda aise लेखक है jisme मै inke aalawa राम जी, तुफैल को ही रखती हूँ सूची में..आपके आलेखों में भी काफी सम्भावनाये है..इतना बताने का कास्ट करे की वान्प्रस्ठ होता क्या है क्या ये AC में sambhav है बाबा को concept nirala है.. मिहिर आज बहुत सरे साईट पर है जो देख मै दांग हो गयी..उनकी सारे ब्लॉग किसी न किसी साईट की शोभा बढ़ा रहे है..

के द्वारा:

दिव्या जी , आप बातो को पर्सनल ले रही है ... रामदेव जी ने कभी ये घोषणा नहीं, और न ही योग ये कहता है की उसके पास हर मर्ज़ का इलाज है ... शारीर की एक समय सीमा होती है .. अगर कोई बुजुर्ग है तो कोई योग उसे युवा की तरह नहीं कर सकता ,,समय के साथ शारीर के अंगो का कमजोर होना ख़राब होना स्वाभाविक है ,, और आयुर्वेद या योग कही ये नहीं कहते की अलोपैथ में सिर्फ खराबिया ही है , कई ऐसी समस्याए है जिनके लिए सिर्फ अलोपैथ ही समाधान है पर रामदेव जी का प्रोजेक्ट ये ही है की हम एलोपैथ पर ही निर्भर न रहे जो हमारी अपनी एक विशिष्ट उपचार पद्धति है उसको भी विकसित करे....अगर हम केवल खुबिया देखे और आप केवल कमिया देखे और उसपे अड़े रहे तो चर्चा में हमसबकी जानकारी अधूरी ही रहेगी . क्योकि कोई भी परफेक्ट नहीं होता .. पिछले कुछ लम्बे समय से पूरा मीडिया तंत्र रामदेव जी के खिलाफ एक मोर्चा खोले हुए है , और हम जानते है की आज कितारिख में मीडिया जितना भ्रष्ट है की वह अपने टी आर पि के लिए किसी भी हद तक जा सकता है ... वह बहुत विश्वसनीय नहीं है.... हो सकता है की रामदेव जी की कोई निजी मह्त्वाकांचा हो .. पर क्या इसी अधर पर पिछले १०-१२ वर्षो में उनके कार्यो पर धुल फेक देना इमानदार व्यवहार होगा....? आपके दादा जी की बात जहा तक है कोई भी पद्धति ये दावा नहीं करती की वह १००% समाधान कर देगी हर पद्धति में कुछ लोग ठीक हो जाते है कुछ नहीं हो पते ... पर जो योग आज पुरे विश्व में jagah bana chuka है आप उसपे ऊँगली नहीं उठा सकती है , आपने जहा तक लेखक के प्रति द्वेष की बात कबीर जी से कही तो ये बता दू आपको ऐसे कई मंच है जहा इस विषय पर मिहिर से काफी पहले, जिस दिन रामदेव जी ने राजनीती में आने की बात कही थी उसी दिन से चर्चा हो रही है और यह बेहद आक्रामक विरोध हो रहा है... मिहिर ने अपनी व्यक्तिगत घटना का और बिना तथ्यों के आधार पर पूरी बात कही पर वह बहुत सारे तथ्य भी है देखने को पक्ष में भी और विपक्ष में भी .. तो मिहिर जी से कोई निजी द्वेष तो किसी को हो ही नहीं सकता है .... ये बात आपको समझ लेनी चाहिए.. बात है तो बात पर तर्क रखिये......कुतर्क नहीं .. , Scheme for Construction of Individual Room Units under Patanjali Yogpeeth (Trust) You can also construct an Individual Room Unit in the name of yourself/ your parents/ your forefathers or your Institution through donating to Patanjali Yogpeeth (Trust) Scheme for Construction of Individual Room Unit Type of Units : Under the scheme, the Donors will be able to construct three types of Units, Donor will only be able to use this accommodation during the Residential Yog Science Camps of the Institution. ये उस रूम व्यवस्था की डिटेल है जिसपे चर्चा हो रही है इसे पढ़े तो पता चल जायगा ....की कोई भी दाता पतंजलि पीठ में इन रूम को बुक करा सकता है पर ये तभी तक के लिए प्रयोग होंगे जब कोई योग शिविर पीठ में आयोजित होगा , या फिर इलाज के दौरान ,,न की आजीवन रहने के लिए . भाई अब अगर अम्बानी जैसे लोग वह जाये तो उनसे धन लेना क्या गुनाह है ..? और जहा तक गरीबो की बात है उन्हें योग की जरुरत नहीं पड़ेगी.. ?

के द्वारा: NIKHIL PANDEY NIKHIL PANDEY

निखिल और कबीर जी मई २ दिनों से प्रतिरिया लगातार देख रहा हु होम पेज पर..ये ही शायद लेखक की जीत है..आपकी जानकारी के लिए बता दू की कल मैंने साडी रत लेखक के ब्लोग्स ko diye yaha tak की सारी pratikriyaon tak ko padha nahi adhyan kiya..और paya 1 hindutv के lekh के bad से ही logo me itne lokpriya ho gaye की और logo ne bhi dharm पर likhana shuru kiya... २ IPL के aalekh के bad delhi me congress vidhayako ka virodhshuru hua is khel ko le kar 3 hizdo पर likhe aalekh के bad sarkar ne unhe penson dene की sochi..kuch to sochi.. 4 dadi और pote के rishte ko marne से bachaya लेखक ne और dadi की izzat badhayi jo ab poto के upeksha me jiti है... 5 un bhartiyo ka bakhan kiya jo bharat me rah kar bharat ka apman karte है pata nahi is me kya galat laga aap logo ko..kya aisa nahi hota है?aaj rashtrabhakti से jyada aap log babaon ko mahatv de rahe है.. ६ उनके ब्लॉग का शीर्षक दुआल फेस है इस से भी लोगो को परेशानी हुई है.. ७ जब प्रतिक्रिया दी जाती है लेखक के पक्ष में तो आप लोग कहते है टीम है..आप लोग चाहते क्या है? मिहिर माफ़ी मांगे? आप खुद कहते है अच्छा लिखता है जब ek aadmi itne poorvagrah में jita है लिखता है तो अच्छा kaise likh sakta है...आप लोग in bato को tay kijiye... baat yog का bazarikaran से juda है और उनके dusre wyaapaar से juda है और इस galatfehmi में mat rahiyega की angreji dwa का market kam hua है..और na ही kola का iska praman तो yahi है की aamir को kola ne ek vigyapan के लिए 35 kadod rupey diye है wo bharat में dikhaya jayega itna paisa koi aise ही nahi deta...

के द्वारा:

निखिल पाण्डेय जी,,, आप शालीनता का पाठ पढ़ा रहे है पर आपकी प्रतिक्रिया का तेवर शालीनता से कोसो दूर है और आपकी प्रकाश जी से जो गरम गरम बाते हुई सब जानते है आप योग करते ही होंगे तो योग मन को शक्तिशाली बनता है किसी की तीखी प्रतिक्रिया झेलने के लिए आप के केस में ऐसा नहीं हुआ और आपने अपने मन का विकार भी दिखा दिया की आपके व्यक्तित्व में योग से भी कोई फायदा नहीं हुआ है...योग और व्यायाम से फायदा होता ही है मेरे हिसाब से लेखक ने ये तो नहीं कहा की ये फालतू चीज है.. आपका सर दर्द करता है काफी तो क्या औषधि खाते है आप? मुझे लगता है कोई भी आम आदमी डिस्प्रिन जैसी गोलिया ही खता है... मई चाहूंगी की लेखक खुद इतनी प्रतिक्रियाओं पर kuch kahe पर आप log itna lamba lamba blog likh रहे है प्रतिक्रिया के roop में की shayad wo padh भी नहीं pa रहे होंगे .. poorvagrah से ya जो भी ho पर agar hakikat laya है लेखक के तो jarur prasansa karni hogi inki himmat की poorvagrah में आप lag रहे है मुझे जो ये kah रहे है की shayd कोई team है inke paksh में..लेखक के मेरे jaise kai prashansak है जो आप logo को jawab de रहे है...आप baba का paksh le तो sahi और मई ek honhar himmati लेखक का p[aksh loo तो galat...waah bhai waah..pehle muslim खुद tay kare om को le kar janma vivad... और haan likhte तो sach में achchha है tabhi तो मेरे jaise kai prasansak unke saath है..इतनी प्रतिक्रिया इतनी lokpriyta shayad ही किसी लेखक की है is manch पर..आप भी achchha likhte है waise..

के द्वारा:

कबीर आपसे मै सहमत हु हम इस मुद्दे पर बेवजह इतना समय दे रहे है.... मिहिर का पतंजलि योगपीठ में एक बुरा अनुभव हुआ और वे पहले से ही अपने पूर्वाग्रहों को लेकर बैठ गए लिखने... आपके एक सवाल का जवाब अभी तक किसी ने नहीं दिया ...क्या किसी भी आलोचक को एक भी ऐसा इंसान नहीं मिला जिसे रामदेव जी से फैयदा न हुआ हो... ? बस आपका ये सवाल का जवाब मिल जायेगा तो मिहिर जी के इस लेख की पोल भी खुल जाएगी... वे अच्छा लिखते है मगर ये मात्र एकतरफा अध्ययन है जिसमे पूर्वाग्रह साफ़ दीखते है....बिलकुल वैसे ही जैसे २-४ बाबा , लोग रैकेट चलते मिले... तो विचारको ने पुरे संत समाज को सर्टिफिकेट पकड़ा दिया व्यभिचारी का....किसी मंदिर मस्जिद स्कूल अस्पताल के निर्माण के लिए २० रुपये चंदा देने से पहले १०० लेक्चर सुना देंगे और कोई किसी तरह करता है तो उसके पीछे पड़ जायेंगे... ये क्या बात हुई ... और हास्यास्पद ये है की यहाँ लोग तर्क की जगह जबरदस्ती मिहिर की बात को सही बताने की कोशिश कर रहे है ..मनो कोई टीम हो ..और अगर कोई विरोध में बोल रहा है तो वे अपनी बात को पक्ष में रखने की जगह पर्सनल लेकर बेवजह का विवाद बना रहे है जिसमे तर्क नहीं है ,मुझसे भी गलती हुई प्रकाश जी से गलत तरीके से बात की ... पर मैंने माफ़ी मांग ली... हम तब बेवजह उलझते है जब हमारे पास तर्क नहीं होते ...अपनी बात के लिए ...जागरण ने अच्छा वैचारिक मंच दिया है अगर आलोचना , प्रतिक्रिया नहीं होगी तो सही बात नहीं निकलेगी , लेकिन सही बात करते समय हमें शालीनता का भी परिचय देना होगा , अगर किसी को अपने मन की भड़ास निकालनी हो तो कई ऐसे मंच है जहा दिल खोल कर गलिय दी जाती है और अशिष्ट भाषा का प्रयोग होता है ..हमें जागरण को इससे बचाना है ....इस मंच पर सभी सदस्य पढ़े लिखे और विचारो से भरपूर है इसमें दो राय नहीं है... किसी के व्यक्तिगत अनुभव और मीडिया के प्रचार के आधार पर अगर हम एक तरफ़ा प्रतिक्रिया देंगे विचार मंथन कहा हुआ... ? इस बात पर अगर वास्तव में निर्णय लेना है तो हमें समग्रता से अध्ययन करना होगा .. मै रामदेव जी को कोई दूध का धुला , या एक दम नीट एंड क्लीन नहीं कह रहा ... पर इतना भी बुरा नहीं मानता jitna मिहिर ने बताया , divya जी पहली बात तो ये है ये समझना होगा की योग की वास्तविक जरुरत किसे है.... गाव के गरीब पर मेहनत करने वाले किसानो और मजदूरों को जो पहले ही से नमक रोटी भी खाते है पर जम के पसीना बहाते है और वे मानसिक शारीरिक रूप से स्वस्थ होते है मजबूत होते है उनकी जीवन चर्या को अगर आप देखेंगी तो आप समझ जाएँगी की उन्हें योग की जरुरत नहीं है क्योकि अभी शुगर , बीपी, माइग्रेन और सारी समस्याए हमारे गावो तक उस स्तर में नहीं पहुची है , ये समस्या मुख्या रूप से शहरो में ज्यादा है क्योकि यहाँ जीवन अनियमित और अव्यवस्थित है लोगो के पास अपने शारीर के लिए समय नहीं है ...इसलिए इसका केंद्र शहरो को बनाया गया है ..दूसरी बात शहरो के मध्यम और उच्च वर्ग के धन को ही हम किसी काम में प्रयोग कर सकते है क्योकि ग्रामीण वर्ग ये खर्च नहीं उठा सकता और उसे योग की जरुरत भी उतनी नहीं है अतः शहरी वर्ग में ही योग का प्रचार ज्यादा हुआ और उनके धन से तमाम कार्यक्रम चल रहे है . चलिए कुछ देर के लिए मान लेते है की योग का बाजारीकरण ...किया गया , पर ये भी तो सोचिये की उसका नुक्सान कहा हुआ है ? ha इस बाजारीकरण से videshi dawa कंपनियों का निकसान हुआ है उनका बाजार कमजोर हुआ है ..और मीडिया में जो शोर है जो विरोध है वो प्रायोजित ही है... बहार से... क्योकि अगर हम तुलसी के काढ़े से सर्दी का इलाज कर सकते है तो क्या जरुरत है हमें अंग्रेजी दावा खाने की जिसका साइड इफेक्ट हमें नुक्सान पहुचायेगा...कबीर का सवाल अभी अनुत्तरित है क्योकि एक इंसान से न मिल पाने के कारन रामदेव जी की इतनी आलोचना हुई .. पर क्या एक भी इंसान ऐसा नहीं मिला है जिसको फायदा हुआ हो ?

के द्वारा: NIKHIL PANDEY NIKHIL PANDEY

जी नहीं कबीर जी बिलकुल नहीं लगता मुझे की लेखक का एक भी आलेख वास्तविकता से दूर है कही भी..भारत में रह कर भारत की बुरे करने वाले अनगिनत है..आपको नहीं दीखता क्युकी आप भी शायद वैसे ही है,,,मेरे दादा जी को भी कोरोनरी ब्लोकेज था सब ने कहा प्राणायाम से ठीक हो जायेगा पतंजलि भी गए हम..पतंजलि का वर्णन एवं चित्रण हूँ बा हूँ है ...१ साल दादा जी ने प्राणायाम किया नियमतः पर अंततः बाई पास ही करवाना पड़ा.. पत्रकारिता का मतलब किसी की चाटुकारिता करना या लिखना नहीं होता कबीर जी...मै खुद पत्रकार हु पर लगता है इस लेखक के सामने मेरा कद छोटा है..आपका आप जाने क्युकी आप मानेंगे नहीं की आप इनकी लोकप्रियता से घबरा गए है..

के द्वारा:

अभिनव जी..मुझे तो पहले अच्छा लग रहा है की इस लेखक के आलेख पर इतनी प्रतिक्रिया आ रही है..पर एक अजीब बात है जो समझ नहीं आ रही वो ये की कोई अपनी प्रतिक्रिया में कह रहा था की बाबा १६ घंटे कम करते है आप कह रहे है २० घंटे कम करते है...सच क्या है? बाबा के ऊपर galat तरीके से दवा बनाने का भी आरोप लग चूका है..आप मानेगे नहीं पर उनकी लोकप्रियता पहले के मुताबिक घटी है.. आपने लेखक के सरे ब्लॉग देखे है पढ़े नहीं है आपको ये याद है की उनका जनम गाँव में हुआ पर ये भूल गए उनकी दादी का निधन हो गया है अब कैसे पूछे बेचारा? आपको पता नहीं पर अंग्रेजी दवाए काफी शोध के बाद बनती है और उनको रेगिस्टर होने में कम से कम ५ साल लग जाता है जहा तक मेरी जानकारी है इतना लम्बी प्रक्रिया उसके निर्माण की क्या १० से मी के कवर पे देना संभव है... आपको लेखक की घटना जिस में इनको गार्ड बहार फेकने की धमकी दे रहा है फ़िल्मी लगती है उसी तरह मुझे बाबा के शिविर में ७००० लोगो का विभिन्न जगहों से आना आपका प्रायोजित कार्यक्रम लग रहा है.. फोटो तो बड़े बड़े सेलेब खिचवा लेते है किसी के साथ और ये ज्यादातर फर्जी बनाये जाते है..बाबा को राजनीती में आना है तो इतना तो करेंगे ही. अगर जो इन्सान भगवा पहन रहा है और मुस्लिमो के साथ बेथ कर ॐ का अपमान करवा रहा है वो और क्या कर सकता है..हिन्दू धर्म खेर बाबा के वजूद से नहीं है आगे भी रहेगा.. ४ किताब पढने से अगर आदमी महँ नहीं हो जाता तो ४ वेड पढ़ कर भी नहीं होता भाई साहब..क्युकी जीवन का मूल मंत्र वेड से नहीं आता हाँ ये नियंत्रण में रखता है हमरे पापी मन को...और अगर ४ वेड पढ़ कर भी बाबा जी इतना ही सोच पाए आज तक तब तो निसंदेह मई किसी हिन्दू को वेड पढने का सलाह नहीं दूंगी.. और मुझे नहीं लगता की जो आदमी इतनी हिम्मत दिखा सकता है की एक अतिलोकप्रिय योग गुरु की आलोचना खुले करे वो आपकी बातो का बुरा मानेगा.. बाते चलती रहेगी बहस आगे भी होती रहेगी..

के द्वारा:

hiii मिहिर देखो भाई किसी की चार अच्छे BAATE बताकर या किसीकी चार बुराई बताकर (भले ही वो सच क्यों न हो) हम किसी वेक्यित्व को परख नहीं सकते और न ही एक ठोस निर्रय दे सकते है. उदाहरण....... शाहरुख़ खान देश द्रोही है -शिव शेना आतंकवाद पर काबू पाने में हम सफल हुए है -कांग्रेस नरेन्द्र मोदी ने गुजरात क लिए कुछ नहीं किया -कांग्रेस / शाई बाबा हिन्दू थे नहीं मुस्लिम थे ??? मुंबई हमले में हमारा हाथ नहीं था - पाकिस्तान ------------------------------------------------------------------------ UR Q? तुलसी और पता नहीं कैसी कैसी पत्तियों के साथ. नुस्खा बता रहे थे और मिडिया उनके पत्तियों को रामबाण बता कर हाईलाईट कर रही थी?? उत्तर- आपने अपने एक लेख में लिखा है की आप गॉव से सम्बन्ध रखते हो \' आपका गॉव भारत में नहीं न है (अपने दादी से पुच्छ लेना की तुलसी,awlaa,नीम,haldi,giloy,का क्या है वो आपको सही से बता देंगी )क्युकी आज से कुच्छ सालो पहले जब अंग्रेजी दावा नहीं था तब हमारे लोग इन्ही चीजों\"आयुर्वेद\" का प्रयोग करते थे.(आप doctor हो न आपको to bs anti biotic pata hoga है न ___________________________________________________________________ ये फूल-पत्तियां केवल बाबा के पतंजलि में ही मिलती है कही और से लिया तो वो नकली होगा और आपके प्राण पखेरू कुछ पहले भी उड़ सकते है???? उत्तर= ptanjali yogpith ki jitni bhi davaye ya aushadhiya ati hai unke lable pe un sare product ki jankariya di jati hai jisse usko banaya jata hai... chahe to aap bhi bana sakte ho...\'kya english medicine k piche likha rehta hai??? humne to pehle kabhi nahi suna ki ye phool-patiya,aushadhiya kewal patanjali m hi milti hai......(bhai baba ramdev khud kehte hai \'ki ye sab khud bana aur uga sakte hai..........) kabhi kabhi kuch aise paudhe humare bich paye jate hai jo har jagah nahi ho sakte....hai na \'jaise,nariyal.apple,orenge, and many more etc......... (yaar kangaru sirf australiya mai hi kyu hota hai) sayad aapne suna nahi hoga......(aap busy rehte hoge doctor jo hai na.....) ___________________________________________________________________ उसने पहले ऊपर से नीचे तक मुझे घूरा और बोला “भाई साहब आप के जैसे यहाँ हर लोग बाबा से मिलने ही आते है पर एक जबाब देते देते मै थक गया हूँ कि बाबा आप जैसे लोगो से नहीं मिलते” मैं थोडा आश्चर्यचकित हो गया और पूछा “तो कैसे लोगो से बाबा मिलते है?” “भाई आप बूरा मत मानो पर वो चीफ मिनिस्टर से नीचे नहीं मिलते कभी कभी उन्हें भी वक़्त नहीं मिलता” “कोई बात नहीं उनके पी ऐ से मिलवा दो” मैंने कहा “कोई नहीं मिलेगा आप से क्यों अपना और मेरा समय ख़राब कर रहे हो?” वो थोडा चिढ के बोला. उसके इतना बोलते ही एक गार्ड मेरे पास आया और बोला भाई तेरे को हिंदी समझ नहीं आती क्या…उठा के फेक दूंगा नहीं तो चुपचाप चला जा” उत्तर-yaar mujhe to ye kisi film ka seen lag raha hai.......... ======================================================= bhai last year mai bhi patanjali yogpith gya tha yov sivir mai bhag lene\'waha karib 7000 hajar log BHARAT SWABHIMAN YUVA SANGATHAN ke sadsya banane k liye india ke kone kone se log aye hue the aur kuch videsho se bhi aye hue the..........BABA RAMDEV UN SABSE MILE aur humare nivedan par sabke sath photo bhi kichwai.......agar yaki na ho to mere paas photo ha dekh lena.........\'aur ha un logo ko jabarjasti nahi laya gya tha ve apne mann se aye the aur bakayda 1100 rs. pupye bhi paid kiya jo uski fees thi....... _________________________________________ पहले ही हिन्दू धर्म को नीचा दिखा चुके है ये कह कर कि ॐ सब धर्म का है. मुस्लिम ये मान ने को तैयार नहीं है और आप महान बन ने के लिए आमादा है?? Ans.humara dharm kehta hai \'VISHWA BANDHUTAWAM\' iska matlab sajhte ho aap....??? iska matlab ye hua pura vishwa hi humare bhai bandhu hai..........\'\'\'yaar tumhare hisab se to apne DHARM ne humari naak kata di yaar.hai na........kyuki sare vishwa nai hajaro jatiya ati....] chalo kisi hindu ne to kaha ॐ sabka hai \' koi muslim kyu nahi kehta ki 786 sabka hai... kyu bhai bhagwan ka bhi patent hone laga kya????? SABKA MALIK EK HAI MERE BHAI...(hinduo k liye swarg aur muslimo k liye jannat sab ek hai) ________________________________________________________________________ tum us insan pe ugli utha rahe ho ji subah 3 baje uthta hai apne liye nahi humare liye...jo dinbhar 20 gante kaam karta hai apne liye nah humare liye.....(aur jante ho khane mai kya khata hai kewal fruit aur kuch nahi) hum padte hai paise kamane k liye wo kaam karta desh ko banane k liye........... (aaj se kuch saal pehle tak kitne log jante the yog k bare mai kitno log jante the pranayan k baye mai , kitne log jante the aushadhio k bare mai......... (jara socho wo insam na ek actor hai.na ek cricketer hai,na ek politisian hai...............phir bhi wo unse adhik faimous hai kyu.......kabhi socha hai........ (us insan ko india ki lagbhag sabhi bhashaya ati hai ........usko sare ved ke jankari hai....... ukso gita yaad hai........ramayan,mahabharat ka gyan ka dhani insan hai.....usko sare rogo k bare m pata hai uska ilaj uske paas hai kya utna gyan tumhare kisi doctor k paas hai........... -------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- (jab aap kisi tarif nahi kar sakte to plz yaar uski burai bhi mat karo........ 4 BOOK PADNE SE KOI GYANI NAH HO JATA MERE BHAI.....SAMJHE AUR HA KISI K BARE BOLNE YA LIKHNE SE KAI BAR SOCH LIYA KARO......... MERI BATO KA BURA NAHI MANANA..............PLZ abhi meri bahut bate adhuri hai............................

के द्वारा:

यार इतने लोगो ने यहाँ प्रतिक्रिया दे डाली फैसला करना होगा की कौन जीता?भाई राटिंग अच्छी है इस आलेख की और ज्यादातर लोग बाबा के खिलाफ है इसलिए मन जायेगा की पक्ष लेखक बाबू का तगड़ा है..लिखते तो है ही अच्छा इस में कोई शक नहीं है हाँ पर शब्दों में आक्रमण के तेवर ज्यादा है..और ज्यादा आक्रामक इस आलेख को आप लोगो की तीखी तीखी प्रतिक्रिया कर दे रही है..मेरा आग्रह है मिहिर से की अपना पक्ष जल्द रखे इन प्रतिक्रिओं पर..मेरा भी मन न है की बाबा विरोधी स्वर यूं ही नहीं उठ रहे है पर आलोचना करते हुए आप लोग थोडा संयम बरते..मई दिर कह रहा हूँ बाबा की नितों का विरोधी अगर ह्रदय को टटोलू तो मैं भी हूँ..मिहिर आपकी लिखने की तारीफ़ जरूर करूँगा सरे ब्लॉग पढ़े आपके सब एक से बढ़ कर एक है..लिखते रहे..

के द्वारा:

निखिल पंडू जी आप से अनुरोध है की प्रतिक्रिया छोटा लिखे मैं बोर हो गया पूरा पढ़ के एक ही बात कई तरह से लिखा है आपने..अगर आपको सरे मर्ज़ का इलाज लगता है तो खाते रहिये नीम और खिलाये भी अपने लोगो को..आप तो ऐसे कह रहे है जैसे कोक और पेप्सी अब बिक ही नहीं भारत में टला लग गया है और विधेशी दवाए जल्दी ही भारत छोड़ कर जा रही है...रामदेव जी ने बंद जो करवा दिया है इनका बाज़ार यहाँ..आपकी इतनी लम्बी प्रतिक्य आपके फ्रासत्रेसन की सूचक है..कृपया दिल पे न ले..निति का विरोध हो रहा है न की बाबा का..लंका में शांति हो ही नहीं सकती रावन से..राम देव जी निसंदेह महापुरुष है पर उनके हालिया बयां और निति उन्हें शक के घेरे में ला रहे है..बाबा रामदेव योग का प्रचार कर सकते है पर इस ग़लतफहमी में न तो आप न बाबा जी रहे की अंग्रेजी दावा बंद हो जाएगी बन न..आप अगर राम देव जी के साथ थे फिर तो भाई आप आम आदमी हो ही नहीं सकते या तो स्टार है कही के आप या फिर उनके संस्था के पहुचे कर्मचारी..आप से मिल कर ख़ुशी हुई..

के द्वारा:

चंद्रकांत जी आप मेरी बुद्धि पर तरस खाने की जगह अगर आप अपनी बुद्धि खोले और दिमाग और आँखे खोल कर देखे तो आप को हकीकत पता चलेगी ....जो योग आज घर घर में पहुच कर लोगो को अपने शारीर ,सेहत के लिए समय निकालने की और अलोपथिक दवाओ के साइड इफेक्ट से बचने का प्रोत्साहन दे रहा है आज दुनिया के कोने कोने में फ़ैल चूका है ..वो आप जैसो को बाजारीकरण लग रहा है..... और ९० पैसे का कोका कोला जो १० रुपये में पीते है लेकर ....वो उदारवाद लगता है हसी आती है श्रीमान जी आप जैसो पे .. आप्जैसे उदारवादियो को बाजारीकरण का मतलब ही पता नहीं है .. किसी देश की पूंजी उसी देश के किसी तरह के विकास में काम आ रही है ..जगह जगह आयुर्वेद की दवाए आसानी से उपलब्ध है लोगो को आराम मिल रहा है वो आपलोगों को दीखता ही नहीं है ...अंग्रेजी बहरी कंपनियों का बाजार घटा है , लोगो ने कोका कोला ,पेप्सी सब पीना कम कर दिया उसका अफ्सोसो है क्या .... मुझे तो यही लगता है जैसे की विदेशी धन में से कुछ कमीशन मिल रहा है आपको भी जो इस तरह बिना समझे बाबा की विरोध में मोर्चा खोल कर बैठे है .... हा जी सर मै काफी कुछ जनता हु उनके बारे में और विनती करूँगा की पहले जान ले फिर बोले .... मै उन्हें कोई नीट एंड क्लीन का सर्टिफिकेट नहीं दे रहा हु .... लेकिन ये कह रहा हु अगले की मेहनत को भी तो देखो यार ये क्या की कलम उठाई और शुरू हो गए आलोचना में.... ये काम तो देश के 98 % बुद्धिजीवी करते ही है ...अरे पहले कुछ करो तो यार फिर आलोचना करना ... बैठ के तो किसी को गली दे सकते है हम्म पर उससे क्या होगा उसपे कोई फर्क नहीं पड़ेगा वो अपना काम करता रहेगा ... आप खुद आइये मैदान में ,कुछ कीजिये फिर सिर्फ आलोचना कीजिये.... अगर घर में बैठ कर भाषण ही देना है तो कम से कम कुछ अच्छा भी तो देखिये उस इंसान में .. या बस न खुद कुछ करेंगे न किसी को करने देंगे .. आप जैसे उदारवादी ऐसे ही है की बहार गोली चल रही हो तो दरवाजे की ओट से देखेंगे छुप के ऐसे समाज नहीं बदलता ....आप पर्सनल न ले ये बात आपसे नहीं हर उस आलोचक से कहना चाहता हु की हर इंसान में कमी और अच्छे होती है अगर आप उसकी बुरे दिखाना चाहते है तो खुद उससे बेहतर करके दिखाइए .. नहीं तो उसकी खूबी को दिखाइए ताकि लोगो में कुछ उत्साह बढे प्रेरणा बड़े .... करोनो लोग जिसके पीछे खड़े है एक आशा और विशवास के साथ ऐसी आलोचनाये कर के आप उन करोनो का विशवास और उत्साह तोड़ रहे है और दूसरी तरफ उस व्यक्ति को भी हतोत्साहित कर रहे है....... किसी की भी हजार गलतिया माफ़ है अगर उसकी एक खूबी से करोणों लोगो को फायदा पहुचता है ...और रामदेव जी के साथ भी ऐसा ही है .... आप किस दुनिया में है सुबह उठिए और देखिये वो बड़े बुजुर्ग जो घर के लिए परेशानी का कारन बने हुए थे खटिया पर पड़े रहते थे अब सुबह टीवी पर रामदेव जी के साथ आसन करते है और अपने शारीर का खुद ख्याल रखते है , अगर कोई व्यक्ति शिविर लगता है तो उसके आयोजन में धन की मांग करेगा ही आप ही सोचिये कोई भी सामाजिक आयोजन हो क्या कोई भी अकेले आयोजित कर सकता है ,,एक -दो बार करेगा फिर चन्दा लगाएगा ही ... आयुर्वेद की जानकारी न हो तो ले लीजिये पहले, आपको पता चल जायेगा की ये कितनी महंगी होती है क्योकि एक तो ये जल्दी मिलती नहीं है और दूसरी बात इनकी प्रोसेस्सिंग बहुत लम्बी होती है ,, तो क्या इन्हें मुफ्त में bata जाये ,नीम के पेटेंट को वापस पाने के लिए सरकार ने इतनी मेहनत क्यों की आपको पता होगा ,,नीम के क्या उपयोगिता है आप जानते होंगे वो केवल पत्ती नहीं है उसमे कई मर्ज़ की दवा छुपी है .... ऐसी बहुत जड़ी बूटिया है , जो धुन्धने के लिए पहाड़ो में जंगली में भटकना पड़ता है ,, ये ब्लॉग लिखने जितना आसान काम नहीं है .... गोरखपुर में जब रामदेव जी आय थे उनके कार्यक्रम में मै भी था , मेरा उनसे कोई व्यक्तिगत सम्बन्ध नहीं है मगर अन्य लोगो के साथ मै भी उनके साथ ही था ..और भाई साहब आपको बता दू १६ घंटे लगातार बिना थके बिना असहज हुए उन्होंने लोगो से बाते की उन्हें देखा सलाह दी.... अलग अलग कार्यक्रमों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराइ और कही भी उनकी वाणी में थकन नहीं दिखी.... क्या ये सब ऐसे ही ? धन से ये सब नहीं आता चंद्रकांत जी ,,ये सब कर्म से आता है ...आलोचक होना सबसे आसान काम है हमारे देश में .. आप मुझपर बुद्धिहीनता या और भी अभद्र कमेन्ट कर सकते है पर इससे सत्य पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा ,, अगर उनके कहने पर हजारो लोग इन बहुरास्ट्रीय कंपनियों की बाजारवादी मार से बचने के लिए अंग्रेजी दवाओ का , नशीले हानिकारक द्रव्यों का सेवन बंद कर सकते है ,, योग कर सकते है ,, तो फिर हम इतनी निष्ठुरता से केवल आक्रामक आलोचना करके क्या साबित करना चाहते है .. आपसे विनम्रता से कहना चाहता हु की विष के डर से अगर सागर मंथन नहीं होगा तो अमृत भी नहीं निकलेगा ... अगर वे राजनीती में जाने की सोच रहे है तो चलो देखलेते है सैकड़ो अपराधी जहा भरे हुए है वह एक बाबा के आजाने से क्या फर्क पड़ेगा , अगर वे भी उनकी तरह निकले तो हम तो फ्री है ही आलोचना की तलवार के साथ (वैसे भी हम और कुछ कर भी नहीं सकते)....और अगर उन्होंने कुछ अच्छा काम किया तो उससे हमर ही भला होगा ... हमें कोई फर्क नहीं पड़ता इस देश का शासन राम चलाये या रावण.... रावण समझ के ही देख लो कम से कम उसकी लंका में शांति तो थी.....चंद्रकांत जी हम खुद कुछ नहीं कर सकते है मगर प्रयोग कर सकते है ,,हमें विष से डर नहीं है पर हा अमृत निकला चाहिए.... जैसे भी हो .... आशा है कोई बात बुरी लगी हो तो क्षमा करेंगे

के द्वारा: NIKHIL PANDEY NIKHIL PANDEY

अंकुर जी योग और व्यायाम से निसंदेह आराम मिलता है राम देव जी से पहले भी लोग योग करते थे हाँ इतना लोकप्रिय नहीं था ये पर मेरा कहना है की बाजारीकरण क्यों हो रहः है?वां प्रस्थ का मतलब होता है वन की तरफ जाना सन्यासी जीवन बिताना जहा तक मेरी समझ है ऐ सी रूम में अगर बाबा वानप्रस्थ करवा रहे है तो ये हमारे ग्रंथो में लिखे वैराग्य से मेल नहीं खाता और ये हमे उस ग्रन्थ का मजाक ही लगेगा..वो हर गरीब से नहीं मिल सकते सच है पर उनकी शिविर जिस में वो कभी कभी आ सकते है कहा आयोजित होते है दूरदरस्त गाँव में..माफ़ कीजिये पर गाँव में अभी भी बाबा को कोई इतना लोग नहीं जानते है..उनके लिए वो एक झड फूक करने वाले बाबा से ज्यादा नहीं है..मेरा कहना तो बस ये है की बाब चमत्कारी पुरुष है उन्हें पहले भारत के गरीबो का होना चाहिए फिर कोई और कदम उठाये..स्वस्थ भारत का सपना देखा था उन्होंने योग को आधार मान कर राजनीती को नहीं..खैर ये भविष्य के गर्व में है की उनकी पार्टी क्या बदलाव ला देगी भारत में..जब उनके योग से आज फिर से लोगो का विश्वास उठने लगा है उस समय राजनीती में आना वास्तव में दुर्भाग्यपूर्ण है..टी वी पर वो आते है किसी भी विषय पर बोलने जिस से उनका कोई लेना देना नहीं होता है..आप ने खुद ही देखा होगा की की स्वाइन फ्लू के वक़्त उनकी दावा ने लोगो की जान नहीं बचायी थी बल्कि आप जिस विदेशी दावा की कोस रहे है वी दावा ने इस महामारी को रोका था..दावा और हकीकत में अंतर होता है...

के द्वारा: