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दादी और टाल, डार्क, हेंडसम

Posted On: 12 Mar, 2010 मेट्रो लाइफ में

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मेरा बचपन गाँव में गुजरा, दादी की गोद में कहानी सुनते हुए. उस समय की दादी लोगो का खास और एक विशेष गुण ये था कि वो अपने पोतों (पौत्रो) से बड़ा प्यार करती थी. सच मानिये ये प्यार ऐसा था की अगर चोट पोते को लगी तो दर्द दादी को महसूस होता था. मैं अकसर पोतिओं (पौत्रियो) को दया का पात्र समझता था जिन पर दादियो के स्नेह की बारिश न के बराबर होती थी. एक और खास गुण है इन दादियो की कि पोता चाहे जैसा भी दिखता हो शक्लो सूरत से, चाहे जिस भी रंग का हो दादियो को वो राजकुमार ही लगता था.
मैं बचपन में भी काफी गन्दा दीखता था, रंग भी लगभग लगभग काला ही समझिये. आस पड़ोस के बच्चे जब एकत्र होते थे खेलने को तो शायद मै ही उसमे सबसे अजीब सूरत वाला होता था. पतला दुबला इतना कि मनो लग रहा हो जीने के लिए संघर्ष रत होऊ. कभी कभी लोगो के मुहं से अपनी बदसूरती के बखान भी परोक्ष रूप से सुन लेता था. दिल बैठ जाता था, दुःख से हलक में एक अजीब दर्द और चेहरा रुआंसा हो जाता था. अब हम पोतो को इन्ही दादियो का तो सहारा था ऐसे में….. रात को दादी कि कहानी सुन कर ही नींद आती थी. कहानी के बीच में ही कह डाला “दादी मै इतना बदसूरत क्यों हूँ?” मेरी बदसूरती कि चोट मुझे लगी थी पर दर्द अचानक दादी के मुख मंडल पर दिखने लगा. उसी दिन समझ आया हम वो तोते है जिनमे हमारी दादियो कि जान बसती है, दादी ने पहले उन लोगो को जम के लताड़ा जिन्होंने मुझे बदसूरत कहने का दुह्साहस किया था फिर मुझे यकीन दिलाया किसी तरह से कि मै बदसूरत नहीं हूँ. दादी ने उस दिन सचमुच एक पते कि बात बताई कि “सूरत कि जरुरत तो लडकियो को होती है, मर्द का गहना तो शीरत होता है”
मैंने पूछा “दादी मेरी शादी भी हो सकेगी?” क्यूकि मेरा बाल मन बड़ा उत्सुक था शादी को ले कर.
दादी ने कहा “सफल इंसान के पीछे दुनिया भागती है लड़की क्या चीज है?”
बहुत मेहनत की, खूब पढाई की और आज शीरत बचाते हुए एक सफल डॉक्टर भी बन गया हूँ. पर यक़ीनन बदसूरत आज भी वैसा ही हूँ. कालेज के समय भी लड़किओं के बीच कभी भी मेरा जिक्र नहीं हुआ.पर कालेज गाँव में तो था नहीं, मैंने अपनी पढाई दिल्ली से की. अब पढाई में अच्छा था तो कुछ लड़की दोस्त भी थी जो मुझमे कम और मेरे नोट्स में ज्यादा इन्तेरेस्तेद थी. मेरी उन्ही दोस्तों में से किसी एक की शादी की बात चल रही थी. उसके पिता जी ने पूछा “तुम्हे कैसा लड़का चाहिए?”
“टाल, डार्क, हेंडसम” ये उसका जवाब था.
मैं उस रात सो नहीं सका और सोचता रहा दादी के उन उपदेशों में तो शीरत और सफलता ही मुख्य थे जो उस लड़की के जवाब में कही भी नहीं था. मै फिर से एक अनदेखे डर से ग्रसित हो गया और फिर से हीन भावना से ग्रसित हो गया. दादी का देहावसान हो गया नहीं तो पक्का उन्ही से जा कर पूछता उपाय और इसी बहाने थोड़ी प्रशंसा भी सुन ने को मिलती.
फिर ये टाल, डार्क, हेंडसम तो रोज सुन ने को मिलने लगा और अंततः एक निष्कर्ष मैंने खुद भी निकल लिया. ये टाल, डार्क, हेंडसम कुछ भी नहीं है, मेट्रोपोलिटन में रहने वाली लडकिया जिन्हें बेब कहलाना पसंद है उनके दिमाग का फतूर है. जब मैंने लडकियो से पूछा क्या मतलब है इन ३ गुणों को जो आप लोगो को चाहिए? जवाब प्रायः किसी के पास नहीं था और फिर मैंने ये जाना की बस ये लोग ये ३ गुण फ्रेज की तरह उपयोग करती है, जिनका मतलब इन्हें भी नहीं पता. एक ने दूसरे के मुह से सुना दूसरे ने तीसरे और फिर मुर्ख बिरदिरी में ये फ्रेज मशहूर हो गया.
हेंडसम की परिभाषा तो किसी के पास नहीं थी. अगर टाल डार्क हेंड सम ही चाहिए तो भारत की हर लड़की को अफ्रीका के नीग्रो से ही शादी कर लेनी चाहिए क्यूकि वो टाल भी काफी है डार्क तो शुभानाल्लाह और हेंड सम भी होंगे ही अगर कोई परिभाषा ही नहीं है तो.कभी कभी तो लगा की इस फ्रेज में औरत की मानसिकता छिपी हुई है. टाल उन्हें इस लिए चाहिए क्यूकि वो खुद काफी कम होती है लम्बाई में इसमें अगर मर्द टाल नहीं हुआ तो बच्चे तो बोने ही होंगे.
डार्क इसलिए चाहिए की उनकी जो थोड़ी सी खूबसूरती है खास कर गोराई वो कहीं खतरे में न आ जाये.
हेंडसम का क्या फंडा है ये तो उन्हें भी नहीं पता तो हम और आप कहा से जान पाएंगे?
आज दादी होती तो पता चलता उसे की जमाना कितना बदल गया है, जहाँ पहले मर्द में शीरत खोजी जाती थी वहां अब उसकी जगह टाल, डार्क, हेंड सम ने ले लिया है. पर दादी की दूसरी सीख सही थी. उस लड़की ने एक अंत में एक मशहूर डॉक्टर से शादी की जिसके कई अस्पताल है. आज भी इस फ्रेज के इतने चलन में होने के बाबजूद सफलता सबसे ऊपर है.
इसी लिए तो कहते है हर सफल इन्सान के पीछे एक औरत होती है,,,,,,जाहिर है होंगी ही……

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48 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Neelam के द्वारा
June 2, 2010

Mala Srivastava के द्वारा
April 15, 2010

hie मिहिर i liked your article. आजकल लडकीयों के dark, tall, handsome का funda ये है की पहले success लडको क लिए होती थी और लडकियों क लिए आवश्यक गुण सिर्फ सुन्दरता होता था ! अब ज़रा time change हो गया है तो लडको का आवश्यक गुण सफलता लडकियों के लिए भी जरुरी हो गयी है single life की बात हो या marriage होने की बात हो ये अब उनको भी चाहिए और vice-versa लडको को भी अब looks ज़रूरी हो गया है क्योकि उनका अधिकार शेत्र पर अब लडकियों ने हक जमा लिया है तो Superiority खत्म लडको की ! अब दोनों की same criteria पर Numbering होने लगी है !

    mihirraj2000 के द्वारा
    April 15, 2010

    आलेख को सराहने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद माला जी.. उम्मीद है आगे भी आपकी प्रतिक्रिया मुझे और मेरे आलेख को मिलती रहेगी..

reshma के द्वारा
March 26, 2010

mihir you are the real blog star..such a maturity in such an age, its really surprising and awesome..you are star blogger….

shekhar के द्वारा
March 22, 2010

Bahut badhiya mihir bhai……….

    mihirraj2000 के द्वारा
    March 22, 2010

    धन्यवाद शेखर भाई..सराहना के लिए तहे दिल से आभारी हूँ.

rohitchaudhary के द्वारा
March 21, 2010

i think mihir u r the witer of reality which touches heart deeply. it’s too good. keep it up

    mihirraj2000 के द्वारा
    March 21, 2010

    thank you very much Rohit..your appreciation boosted me…thanks for valuable comment…

soni garg के द्वारा
March 17, 2010

मेरा ब्लॉग teekhabol के नाम से है और अगर आप इस पहेली को वास्तव मैं समझना चाहते तो आपको एक बार आलोक भदोरिया जी का ब्लॉग पद लेना चाहिए उसके लिए आपको http://www.nbt.in पर जाना होगा वहां ब्लोग्स पर क्लिक करने पर आपको सभी ब्लॉगर दिख जायेंगे वहां आलोक भदोरिया जी खयाली पुलाव के नाम से लिकते है और मैं उनके जिस ब्लॉग को पड़ने की बात कर रही हु उसका शीर्षक है “अगले जनम मोहे बेटा न कीजो” और आपके इस ब्लॉग को मेने एक व्यंग के तौर पर लिया है

soni garg के द्वारा
March 17, 2010

तुम्हारा ये ब्लॉग पद कर एक कहानी याद आ गई ! ध्यान से पड़ना सब समझ आ जायेगा ! एक गाँव में एक जमींदार का एक बहुत बड़ा खेत था जिसमे गाँव के ज्यादातर युवक काम करते थे और दोपहर होने पर उनकी माँए उनके लिए खाना लेकर आती थी ! एक दिन किसी एक युवक की माँ बीमार हो गई, तो उसे ये चिंता होने लगी की आज उसके बेटे को खाना देने कौन जायेगा क्युकी घर में सिर्फ माँ और बेटा ही रहते थे तो उसने ये बात अपनी पड़ोसन को बताई जिसका बेटा भी वही काम करता था ! उस बीमार माँ ने अपनी पड़ोसन से कहा की आज वो उसके बेटे को खाना दे आये पड़ोसन ने हाँ कर दी,थोड़ी देर बाद वो बीमार माँ अपने बेटे के लिए खाना बनाकर उसे पड़ोसन को देने आई और कहा की ये मेरे बेटे को दे देना तब पड़ोसन बोली की मैं तो तुम्हारे बेटे को पहचानती ही नहीं उसे खाना कैसे दूंगी तब उस बीमार माँ ने कहा वहाँ काम करने वाले लडको में जो सबसे सुन्दर लड़का दिखे बस समझ लेना वही मेरा बेटा है और उसे ये खाना दे देना पड़ोसन हाँ में सिर हिला कर चली गई वो थोड़ी देर बाद खेत पर गई और खाना दे कर वापस अपने घर आ गई ! शाम होने पर जब सभी अपने अपने घर वापस आये तो उस बीमार माँ का बेटा घर आते ही अपनी माँ से लड़ने लगा माँ ने पूछा क्या हुआ उसने कहा की आज सारा दिन में भूखा रहा और तू मुझे खाना देने नहीं आई तब माँ ने कहा बेटा मैं तो बीमार थी, और इसलिए मैंने पड़ोसन को तेरे लिए खाना दे कर भेजा था तब बेटा बोला लेकिन मुझे तो खाना मिला ही नहीं ! तब उस माँ को बहुत गुस्सा आया और वो अपनी पड़ोसन से इस बारे में पूछने गई की मैंने तुझे अपने बेटे के लिए जो खाना दिया था वो तुने मेरे बेटे को क्यों नहि दिया ! तब पड़ोसन ने कहा की मैंने तुझसे कहा था की में तेरे बेटे को नहीं पहचानती तब वो माँ बोली की मैंने तुझे कहा था ना की पुरे खेत पर जो युवक तुझे सबसे सुन्दर दिखे वही मेरा बेटा होगा और तू उसे खाना दे देना तब पड़ोसन बोली की पुरे खेत में देखने पर मुझे तो मेरा ही बेटा सबसे सुन्दर लगा तो मैंने उसे खाना दे दिया १ कहानी तो आप समझ ही गए होंगे दादी के लाडले पोते ! I m sure mummy ke bhi utne hi ladle honge waise agar kuch samjh nahi aaye to mera kal ka blog pad lena is murkh biradri ki soch bhi samjh aa jayegi

    mihirraj2000 के द्वारा
    March 17, 2010

    कहानी समझ में आ गयी सोनी जी…सच कहा आपने माँ के साथ भी यही बातें लागू होती है…पर एक बात माओं में होती है जो उन्हें पूज्यनिये बना देती है और वो है उनका बिन भेद भाव वाला प्यार, वो अपनी बेटिओं को भी सामान प्यार करती है… आप अपने ब्लॉग का नाम जरूर लिखा करे थोड़ी कठिनाई होती है खोजने में…मैंने एक बार प्रयास किया था…. कृपया मेरे कटाक्ष को व्यंग के तौर पर ही ले..मेरी दृष्टि में औरतो की बड़ी इज्ज़त है..पर मुझे ये प्राणी एक पहेली लगती है सो मई इन पर लिखता हूँ. धन्यवाद..

    rohitchaudhary के द्वारा
    March 21, 2010

    soni ji ur thought is great which was shown from ur brief story then why did u say urself “murkh biradary”

jayesh के द्वारा
March 17, 2010

bahot badhiya itni kam umra me aisi durdristi man gaye !!!!!!!!!!

    mihirraj2000 के द्वारा
    March 17, 2010

    धन्यवाद जयेश आपने अपना कीमती वक़्त निकाल कर मेरा आलेख पढ़ा…सराहना के लिए तहे दिल से आभारी हूँ…

ajay के द्वारा
March 14, 2010

आज आपके आलेख को पढ़ कर दादी की कमी जो महसूस हुई वो मै लिख नहीं पा रहा हूँ बचपन के वो प्यारे और मासूम दिन याद दिलाने के लिए धन्यवाद….इतनी प्रतिक्रिया है आपकी लेखनी को ले कर मैं और क्या कहू..लिखते रहे…

sudhir के द्वारा
March 14, 2010

long live dadi…..once again congratulating you for such an emotional and funny blog…..you are the best……

bina के द्वारा
March 13, 2010

सच ही लिखा है आपने की हम लड़किओं को दादियों का प्यार न के बराबर ही मिलता है पर हम उनके तथाकथित पोतों से ज्यादा उनकी सेवा करती है..आपने इन रिश्तो के बिच की खायी को पाटने का अनोखा काम किया है….शुभकामनायें…

DR.GAURAV SAINI के द्वारा
March 13, 2010

nice story,really interesting…..GUDLUCK

    mihirraj2000 के द्वारा
    March 13, 2010

    thank you very much Dr. saini…u gave me and my blog your valuable time…it means my blogs are serving its purpose….

sameer के द्वारा
March 13, 2010

really big b ur this blog is so funny..keep writing such type of blog…

abuzar usmani के द्वारा
March 13, 2010

आपका ब्लॉग हकीक़त में दिलचस्प था खास तोर से आखिरी लफ्ज़ की हेर सफल इन्सान के पीछे एक औरत होती है इस जुमले का लुत्फ़ तो बहुत देर तक लेता रहा वैसे दो मानी जुमले काफी मज़ा देतें है ये तो आपका कमाल है की उसको ऐसा इस्तेमाल किया की मज़मून में बहुत खूबसूरती से शामिल हो गया आपका ये लफ्ज़ की ज़ाहिर है होगी ही …….. इसने माने को स्पष्ट केर दिया ……….लिखते रहें

    mihirraj2000 के द्वारा
    March 13, 2010

    सराहना के लिए तहे दिल से आभारी हूँ अबुज़र जी…आपको मेरे ब्लॉग ने थोडा भी हसने पर मजबूर किया ये मेरे लिए उपलब्धि से कम नहीं…प्रतिक्रिया और सुझाव देते रहे….

aman के द्वारा
March 13, 2010

आपके लिखे सारे आलेख पढ़े गजब का आत्मविश्वास है आपमें जो आपके आलेखों से झलकता हा i..आज के दौड़ में दादी की याद किसे आती है …..आपका आलेख फिर से उन रिश्तों को मजबूत बनाने की तरफ अच्छा प्रयास है …..लिखते रहे …. दादी अमर रहे…..

jk69 के द्वारा
March 13, 2010

your creation is very strong and true, Dr.jagdish kumar

    mihirraj2000 के द्वारा
    March 13, 2010

    thank you Dr. Jagdish….intellectual like you liked my work, it is really like any achievement…keep writing your reactions and suggestions…..

sumit के द्वारा
March 12, 2010

if you are with us dadi then all izzzzzzzz welllll. you just reminded me of my dadi mihir….thanx…..god bless you….

K K sharma के द्वारा
March 12, 2010

जबरदस्त आलेख………दादी की कमी तो खलेगी भाई……. पर कोई तो बताये ये ताल डार्क हेंडसम की कहानी आपने भी पूरी नहीं बताई……शुभकामनायें…….

rajesh के द्वारा
March 12, 2010

we miss you dadi…please love your dadi everyone…we are really blessed….long live dadi… congrats mihir…with every blog you are rocking….

geete के द्वारा
March 12, 2010

वाकई दादिया आपलोगों के लिए वरदान से कम नहीं है मिहिर बाबू …दादी का चित्रण बेमिशाल है….par saari mahilayen safalta के peechhe नहीं bhagti….kuch ek aaplogon ko safal banati hain….aalekh achchha है….

Mimansi के द्वारा
March 12, 2010

Dear Mihir…….i liked your blog……ur portrayal of dadi is very realistic and in fact i miss my dadi……being a girl i never received such love and attention which you were privileged to receive. I have been following all ur blogs ……….all of them are just too good…..and shows ur rational ideas…this one is a funny one ……..liked ur sense of humor……. but Mr. Doc i don\’t agree that u are not good looking…and u didn\’t have any girl friends….i mean any frnd who is girl….what i mean to say is that you are better that any \’\'tall dark handsome\" …….. congrats for all ur featured blog.keep writing with lots of lv

    mihirraj2000 के द्वारा
    March 13, 2010

    thank you mimansi….keep writing your comments….

neeraj के द्वारा
March 12, 2010

mihir ji aap wakai ek lajawab lekhak hai aur aapke prastutikaran ne aapko aur lajabab bana diya hai…यह प्रश्न हमें इनसे पूछने का पूरा हक है की ये टाल डार्क हेंडसम का फंडा आखिर है क्या? दादी we miss you….

shaheenrana के द्वारा
March 12, 2010

वपदहू पग ेहल्ोी कपोलग पाब, ेााकप ्ाूग पाब कग जीोपग ॆोीददी कोीद, ोुोी जपोीोग ोमपग पदैुग ूद ेोव कहमप ोज का पोूप साब पाब.

    shaheenrana के द्वारा
    March 12, 2010

    Mey aj pehli bar is blog se juri hu, ap ko phara to bhout hi ziya da acha laga,

    mihirraj2000 के द्वारा
    March 12, 2010

    आपकी प्रतिक्रिया मै समझ नहीं पा रहा हूँ जो आपने पहले लिखी है …दूसरी प्रतिक्रिया समझ पा रहा हूँ . bahut bahut dhnyawad आपका शाहीन जी….कृपया अपनी प्रतिक्रिया देती रहे…

Ram Kumar Pandey के द्वारा
March 12, 2010

मिहिर राज जी, आपके तीन ब्लॉग मैंने पढ़े और पाया कि गंभीर मुद्दे को भी आप रोचक ढंग से पेश कर देते हैं. हालांकि यह थोड़ा कठिन कार्य है फिर भी बेहद सहजता से अपनी बात कहने में आपने महारत हासिल की है. क्या चाहिए ….सीता या आधुनिक पारो??? से मैंने आपको पहली बार पढ़ना शुरू किया और अभी तक आपकी लय में कोइ फर्क नहीं आया. वाकई प्रशंसनीय.

    mihirraj2000 के द्वारा
    March 12, 2010

    धन्यवाद राम जी….मैं काफी आनंद का अनुभव का रहा हूँ …वाकई आप jaise लेखक की प्रशंसा मार्गदर्शन का काम करेगी…मुझे लगता है प्रशंसा के काबिल तो आप है, आप जैसा हिंदी लेखक शायद ही यहाँ कोई है….

aakash के द्वारा
March 12, 2010

बार बार जागरण में आपके आलेख फीचर्ड होने पर आपको ढेरो बधाईया…आपकी लेखनी निश्चित रूप से काबिले तारीफ है इसी वज़ह से आपके आलेख को जगह मिल रही है…आलेख कही न कही हमसे जुड़ा हुआ है आपका, कोई भी इंसान इस से खुद को जुडा महसूस कर सकता है कही न कही …लिखते रहें..शुभकामनायें

    mihirraj2000 के द्वारा
    March 12, 2010

    हौसला अफजाई के लिए शुक्रिया आकाश…कोशिश करूँगा आप लोगो की आशाओं पर खड़ा उतरु…अपनी प्रतिक्रिया देते रहे…..धन्यवाद..

udit के द्वारा
March 12, 2010

what a sarcastic blog really interesting…we love you dadi…once again good job mihir….

    mihirraj2000 के द्वारा
    March 12, 2010

    every one should love his dadi…..they are worth loving…thanks for your appreciation…..

chandrakant के द्वारा
March 12, 2010

ha ha ha mihir such a comic blog…man you proved people wrong who tagged you as an aggressive writer, this of your blog certainly an entertainment package. wishing you a bright future a head…..

    mihirraj2000 के द्वारा
    March 12, 2010

    your reactions are enough to keep myself on track…thanks for your appreciation….keep writing your comments and suggestions….

    roli के द्वारा
    March 20, 2010

    बेहद दिलचस्प!! मिल्स एंड बूंस और उनके टी. दी. एच. (ताल, डार्क, हन्द्सोमे) नायकों की दीवानी लड़कियों (बेशक हम भी शामिल हैं उनमे) पर एक चटपटा और विचारणीय कटाक्ष….और साथ में दादी के लाड, प्यार और युगों युगों से चले आ रहे पक्षपात का भी सटीक चित्रण….लगा जैसे सच में हम भी दादी की चारपाई पर बैठ गएँ हों….बात चाहे कटाक्ष में कही गयी , मजा आ गया….पर एक बात कहूँ…..ताल , डार्क, हन्द्सोमे की परिचाषा सिर्फ इतनी सी ही है…..जिसको दिल चाहे दुनिया में है वो हसीं…… बधाई आपके इस आलेख पर….

    mihirraj2000 के द्वारा
    March 21, 2010

    धन्यवाद रोली…आलेख को सराहने के लिए तहे दिल से आभारी हूँ…आशा है आगे भी प्रतिक्रिया के साथ सुझाव भी मिलता रहेगा..

    prashant singh के द्वारा
    March 24, 2010

    mihir i dont think u r so dark u have true indian colour {as yor pic reveal} i think u used to thinnk about your complexion but the dusky is the most attractive. it totaly depends on face cut .yr story is really true and appreciable.

    mihirraj2000 के द्वारा
    March 24, 2010

    thanks for reading and appreciating the blog prashant…i hope in future too i will get your response…

    amit kumar keshri के द्वारा
    April 3, 2010

    बहुत ही अच्छा लिखा है मिहिर , खाश तौर पर दादी की कहानी और पोता प्यार का वर्णन बहुत ही अच्छा था , रोली आंटी के ब्लॉग से लिंक मिला तुम्हारे इस ब्लॉग का , वरना मुझे तो पता भी नहीं था की तुम इतना अच्छा लिखते हो


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