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बाबा रामदेव ..एक असलियत

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कुछ दिन पहले बाबा राम देव हर समाचारपत्रों, चैनलों, और यहाँ तक की राजनितिक दलों की बैठकों में भी छाये हुए थे. अब आप मुझसे पूछ सकते है भाई ये बाबा राम देव कब सुर्खिओं में नहीं होते? ऐसा ही एक सवाल मेरे एक दोस्त ने काफी दुःख और असमंजस में मुझसे पूछा. बात तो सौ फीसदी सही है की देश चाहे कैसी भी समस्या से गुजरे उसका कोई समाधान किसी के पास हो या न हो पर बाबा राम देव अपने रामबाण के साथ आपको हर चैनल पर प्रवचन देते मिल जायेंगे.
आपको याद होगा की पिछले साल हमारा देश स्वाइन फ्लू नामक बीमारी से बुरी तरह पीड़ित था. कोई दवा कोई बचाव नहीं था लोगो की जान जा रही थी. फिर एक दिन प्रकट हो गए राम देव अपने रामबाण के साथ. तुलसी और पता नहीं कैसी कैसी पत्तियों के साथ. नुस्खा बता रहे थे और मिडिया उनके पत्तियों को रामबाण बता कर हाईलाईट कर रही थी, मुझे पता नहीं वो नुस्खा कितनो की जान बचा पाया. अंदाज़ आप लगा सकते है. और मै आपको यहाँ बताना चाहूँगा की ये फूल-पत्तियां केवल बाबा के पतंजलि में ही मिलती है कही और से लिया तो वो नकली होगा और आपके प्राण पखेरू कुछ पहले भी उड़ सकते है. एक घटना का वर्णन यहाँ करना प्रासंगिक होगा. लोगो को भारत में अब पिकनिक मानाने का मन होता है और वो अगर पैसे वाले है तो पतंजलि योग पीठ चले जाते है. क्या मस्त पिकनिक होती है, स्वास्थ लाभ भी हो जाता है, पवित्र माहोल मिलने के साथ साथ पतंजलि की अद्भुत शिल्पकारी भी देखने को मिलती है. है ना फायदे का सौदा? मैं भी आदत से मजबूर प्राणी हूँ घूमना मेरी फिदरत है और फिर उन अनुभवों को आलेख के रूप में लिखना मेरी मजबूरी क्यूकी मुझे दोहरा चरित्र पसंद नहीं. अब नज़र एक गरीब पर डालते है जो बड़े आशाओं के साथ पतंजलि गया था कि बाबा से मिलने का सौभाग्य प्राप्त होने के साथ साथ उसे अपने गाल ब्लाडर के पथरी से भी मुक्ति मिल जायेगा. ये लूटेरे डाक्टर लोग ऑपरेशन का बहुत पैसा मांग रहे है.
उस भाई साहब से जान पहचान हुई बातो के क्रम में ये सब उन्होंने बताया. मैंने उनसे सहानुभूति जताते हुए कहा कि आपको अगर मेरी जरूरत हो तो मैं चलू आपके साथ वैध के पास जिनसे अभी आपको यहाँ मिलना है? उन्हें तो जैसे बिन मांगे बहुत कुछ मिल गया हो बोले” बाबू चलो आप पढ़े लिखे हो ज्यादा समझ पाओगे”
वैध जी ने कहा “आपकी ये पथरी निकल तो नहीं सकती हाँ हम इसको बढ़ने से रोक सकते है”
मैंने पूछा “वैध जी जहाँ तक मेरा ज्ञान है मुझे लगता है कि अगर कोई बाहरी अनैच्छिक वस्तु जो हमारे शारीर का हिस्सा नहीं है वो अगर शारीर में रहेगा तो किसी हालत में नुकसान ही करेगा”
थोड़ी देर बहस हुई फिर वैध जी ने कहा”वैसे करवाना तो आपको ऑपरेशन ही होगा क्युकी इस पथरी का गल कर निकल पाना असंभव है”
गरीब आदमी थोडा चिढ़ते हुए बोला”पर बाबा तो कहते है कि कोई भी पथरी गल सकता है और गला है, कई लोगो को लाभ हुआ भी है”
मन ही मन में बडबडा रहा था “बाबा टी वी पर कुछ और असलियत में कुछ और”
मैंने पूछा कि ये आप किस दावा कि बात कर रहे थे जो इस पथरी को बढ़ने से रोकेगा.
“ये एक विशेष प्रकार का पौधा है जिसकी पत्ती का सेवन करना होगा.. पत्थरचट्टा नामक जो यही मिलता है हमारे नर्सरी में, बाहर नकली सामान मिल सकता है.एक अरमान का खून हो चूका था उस गरीब का.
वही मैंने देखा लिखा हुआ था “शल्य चिकित्सा कक्ष”. देख के हैरानी हुई ये क्या नौटंकी है आयुर्वेदिक लोग क्या शल्य चिकित्सा भी करते है. फिर एहसास हुआ बाबा चरक से कम थोड़े न है चमत्कारी पुरूष है कुछ भी कर सकते है.
वह आदमी बोला”बाबू बाबा से मिल लेता, चलो देख ही लेता तो आना सफल हो जाता अब भी”
उसके दिल में बाबा के लिए इतना प्यार देख मेरा दिल भड आया. पेपर में पढ़ा था कि बाबा उन दिनों हरिद्वार में ही थे.
रिशेप्शन पर जा कर पूछा “भाई साहब बाबा रामदेव से मिलना था”\
उसने पहले ऊपर से नीचे तक मुझे घूरा और बोला “भाई साहब आप के जैसे यहाँ हर लोग बाबा से मिलने ही आते है पर एक जबाब देते देते मै थक गया हूँ कि बाबा आप जैसे लोगो से नहीं मिलते”
मैं थोडा आश्चर्यचकित हो गया और पूछा “तो कैसे लोगो से बाबा मिलते है?”
“भाई आप बूरा मत मानो पर वो चीफ मिनिस्टर से नीचे नहीं मिलते कभी कभी उन्हें भी वक़्त नहीं मिलता”
“कोई बात नहीं उनके पी ऐ से मिलवा दो” मैंने कहा
“कोई नहीं मिलेगा आप से क्यों अपना और मेरा समय ख़राब कर रहे हो?” वो थोडा चिढ के बोला.
उसके इतना बोलते ही एक गार्ड मेरे पास आया और बोला भाई तेरे को हिंदी समझ नहीं आती क्या…उठा के फेक दूंगा नहीं तो चुपचाप चला जा”
मैंने वह से जाना ही बेहतर समझा. जिस बाबा से लोगो कि इतनी आशाएं जुड़ चुकी है उसके यहाँ व्याप्त इस अराजकता को देख मै दंग रह गया. बाबा को इन टी वी चैनलों से फुर्सत मिले तब तो वो इन लोगो से मिले. कुछ दिन पहले वो खबर में इसलिए थे कि वो अपनी नवगठित पार्टी को आम चुनाव में उतारने वाले है. बाबा आप से कहना चाहूँगा टी वी पर आ कर गोल मोल बाते करना आसान है पर इन गरीबो जिन से ये भारत देश है उनके दुःख दूर करना मुश्किल. आप पहले ही हिन्दू धर्म को नीचा दिखा चुके है ये कह कर कि ॐ सब धर्म का है. मुस्लिम ये मान ने को तैयार नहीं है और आप महान बन ने के लिए आमादा है.
आपने एक स्कीम निकला है वानप्रस्थ का जिसमे लोग अभी आपके द्वारा निर्धारित रकम दे और बुढ़ापे में आ कर ऐ सी कमरे में वानप्रस्थ का मजा ले.ऐ सी में वानप्रस्थ, क्या ट्रेजेडी है? ५ लाख का २ रूम ऐ सी के साथ बिना ऐ सी का रूम भी है कम दामो में. आप से कोई सीखे बिजनेस. लिखना और भी था पर आलेख लम्बा हो चूका है….उम्मीद है आगे दूसरा भाग भी लिखूंगा..



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221 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

indrajeet के द्वारा
February 19, 2017

MUJHASE MILO BHAYEE

indrajeet के द्वारा
February 19, 2017

ekdam सच्चाई लिखा है बाबा को kosh में आना चाहिए

Makarand Bhale के द्वारा
November 11, 2013

Mihir, have you studied about these theory before write anything? you have no idea about anything. go study and then came back.

Ishan patel के द्वारा
December 2, 2011

भाई मिहिर जी आपकी मंशा और प्रयोग दोनों असफल इस मंच पर ऐसे ही तुक्के छोड़ कर अक्सर नए-नए लोग चर्चित होने वालों की लिस्ट में शामिल होते रहे हैं । आपका उद्यम भी इस मायने में बिल्कुल सफ़ल रहा, कि इतने सारे टिप्पणीकार मुफ़्त में पा गए, जिनके एक-एक वोट के लिये यहां बड़े-बड़े स्थापित ब्लाँगर तरसते हैं । आप एक मुर्ख इन्सान है.;ईश्वर आपको माफ करे । क्योकि यह मानवीय स्वभाव है। आपने कुछ थोड़ा सा जानकर या सुनकर अपने विचार बनाए है। किन्तु शायद आप नहीं जानते की इससे देश के हजारो लाखो लोग आहत हो सकते है । अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता हम सभी को है पर असली लेखक वो है जो लिखने के पहले समग्र जानकारी हासिल कर ले ।बाबा झूठे और बेईमानों का पर्दाफाश कर रहा है और गरीबों का भला कर रहा है. ये जो मिहिर राज विदेशी और अंग्रेजों का मानस पुत्र है. अंग्रेज चले गए, इसके जैसे काले अंग्रेज पैदा कर गए, जो आज भी उनके गुलाम हैं और गुलामी जारी करने पर आमादा हैं. हमारी सरकार जनता में फूट पैदा करके उसकी मेहनत की कमाई लूट रही है. अगर आप कोई व्यापार करके देखो, सरकारी तंत्र किस तरह गिद्ध की तरह नोच नोच कर काने को आमादा हो जाता है. आय कर विभाग अगर कर न दो तो सजा देता है कृपया अपनी गलती मने और जनता से माफ़ी मांगे

    Santosh Kumar के द्वारा
    December 2, 2011

    ईशान भाई ,.धन्यवाद आपका …आपकी प्रतिक्रिया का पीछा कर इस लेखक के विचार पढ़ सका ,… मुझे तो लगता है ये केवल पैसे के लिए लिखता होगा ,…आपकी बात से पूरी तरह से सहमत हूँ ,.मुझे नहीं लगता ये माफ़ी मांगेगा ,..क्योंकि बनावटी मूर्खो को अपनी गलतियों का अंदाजा हो ही नहीं सकता ….

sandeepkaushik के द्वारा
April 21, 2011

पहले भाग में जहर घोल के शांति नहीं मिली क्या ? लिखना और \\\’फेंकना\\\’ दोनों अलग अलग चीज़ हैं | कृप्या फेंकना बंद करे | धन्यवाद ||

tejrajprajapat के द्वारा
February 12, 2011

देख भाई तुका राम (मिहिर राज) तेरा काम तो मेरे समझ में आ रहा हा. तेरा काम सिर्फ तुका मरना है बेटा ये बाबा रामदेव देश के लिए जो भी कर रहा है वो सब के आचे के लिए कर रहा है. मुझे लगता है तुझे जलन वाली दवा लेनी चाहिए. जो कोई भी गरीब की मदद करने की कोसिस करता है तुम जैसे को अच्छे नहीं लगते. और तुम जैसे चोर लोग अपने माँ बाप के लिए कुछ नहीं कर सकते वो देश के लिए क्या करेगा ……………….. समझे नथू लाल झंडू बाम वाले

mukul shukla के द्वारा
January 1, 2011

आप जैसे पत्रकारों को क्या कहे जिन्हें बस जनता को मूर्ख बनाना आता है | पथरी का जितना प्रभावकारी इलाज आयुर्वेद और होम्योपैथ में उतना एलोपैथी में बिलकुल ही नहीं है | इसलिए कृपा कर के पैसे ले कर लेख लिखना बंद कीजिये |

आर.एन. शाही के द्वारा
October 27, 2010

भाई मिहिर जी आपकी मंशा और प्रयोग दोनों सफ़ल रहे, इस बात की तो दाद देनी ही होगी । इस मंच पर ऐसे ही तुक्के छोड़ कर अक्सर नए-नए लोग चर्चित होने वालों की ज़मात में शामिल होते रहे हैं । आपका उद्यम भी इस मायने में बिल्कुल सफ़ल रहा, कि इतने सारे टिप्पणीकार मुफ़्त में पा गए, जिनके एक-एक वोट के लिये यहां बड़े-बड़े स्थापित ब्लाँगर तरसते हैं । आप एक अच्छे आलोचक हैं, इसलिये शायद ही आपको नीचे पड़ी गालियों से कोई कष्ट हुआ होगा । मशहूर होना है, तो मशहूर व्यक्ति के व्यक्तित्व का तियां-पांचा करो, प्रसिद्धि स्वयं दरवाज़ा खटखटाएगी । वाह! क्या नुस्खा है । एक भी टिप्पणी पर आपका कोई जवाब नहीं है, इससे भी यही साबित होता है कि आपको सिर्फ़ मखौलबाज़ी का आनन्द लेना था, अभिव्यक्ति के लिये कोई सकारात्मक या नकारात्मक भावना तो कत्तई नहीं थी । भाई साहब रामदेव जी मंच से चिल्ला-चिला कर कहते हैं कि पथरी या गांठ को डिजाल्व करने के लिये दवा के साथ ही आधा-आधा घंटे कपालभाति और अनुलोम विलोम प्राणायाम की साधना काफ़ी लम्बे समय तक करनी होती है । हां, इस श्रमसाध्य तपस्या से जब गांठ या पथरी गलती है, तब फ़िर दोबारा जन्म नहीं ले पाती । जबकि शल्य क्रिया से निकाली गई गांठ-पथरी के पुन: पनपने की नब्बे प्रतिशत सम्भावनाएं होती हैं, क्योंकि पथरी तो निकल गई, शरीर की वह प्रवृत्ति नहीं निकल पाई जिससे गांठ-पथरियां जन्म लेती हैं । यह सब कठिन योग से संभव हो पाता है, न कि वैद्य जी मिनटों में जादू से ठीक कर देंगे, जहां आप कथित मरीज को लेकर गए थे । दूसरी बात कि वह गार्ड क्या कहेगा, आपकी भाषा कहती है कि आप जैसे लोगों को कोई साधारण आदमी भी अपने दरवाज़े पर घास नहीं डालेगा, और आप उस हैसियत से मिलने चले गए जैसे कोई गांव की कुटिया में रहने वाले बाबा से मिलने यूं ही चला जाता है । यहां थोडी ठीक ठाक प्रैक्टिस वाले डाक्टर के पास इतनी फ़ुर्सत नहीं होती कि अपनी बीवी को एंटरटेन कर सके, और आप यह उम्मीद लेकर गए कि तमाम देशों के राष्ट्रपतियों प्रधानमंत्रियों से भी अधिक व्यस्त रहने वाले बाबा रामदेव मिलने के लिये आपका इंतज़ार करते बैठे होंगे, पलक पांवड़े बिछाकार । इस प्रकार की बचकानी बातें कहीं और कृपा कर मत करेंगे । गरीबों के मुफ़्त इलाज़ की वहां और बहुत सारी जगहों पर ट्रस्ट की अलग व्यवस्था है, जिसकी खास प्रक्रिया होती है, अन्यथा हर कोई मुफ़्त इलाज कराने पहुंच जाएगा । खैर आप में कुछ तो है ही, कि मुझे इतना श्रम कर लेक्चर पिलाने के लिये बाध्य होना पड़ा । फ़िर भी आपको साधुवाद अवश्य कहूंगा ।

    bhartiya के द्वारा
    October 27, 2010

    ha ha ha maza aa gaya aapka lekh padh kar. lekhak ke kai kekh padhe, wo dil se to ache insan hain per unki samaj unka sath nahi deti. Unhe abhi aur knowledge lene ki zarurat hai. ADHJAL GAGARI CHALAKAT JAYE.

    bharodiya के द्वारा
    July 27, 2011

    ईस बेचारे को प्रसिद्धि से क्या मतलब । वो तो बाबा को निचा गिराने आया था । कोशिश अच्छी की लेकिन उसने देखा, यहा तो बाबा को बचाने वाले हजारो हाथ है । हाथमे बाम्बू भी है । कौन अपनी जान बचाना नही चाहेगा । वो टिप्पणी देने नही आ सकता ईसे माफ करदो । ईन की जामात को अब गाली से तकलिफ नही होती है, नशा चडता है । तकलिफ होती है जब गाली नही मिलती ।

Bk के द्वारा
October 27, 2010

मीहीर राज गददार है. ईसको फांसी होनी चाहीये. 

    Raj के द्वारा
    October 27, 2010

    Mai Bhagwan se prarthana karta hoon ki mihir raj aur uske jaisa bichar rakhne wale, uske sathi aur sahayogi aur usse ye kam karwane wale, usko paisa dene walo ko jald se jald dardnak maut mile aur kumbhi pak nark nasib ho taki uske blog padhne me, unse argu karne me, samjhane me, sudharne me sache ache aur deshbhakt logo ka samay nast na ho. Jay Bharat.

    bhartiya के द्वारा
    October 27, 2010

    :) RAJ JI WELL SAID. BADA SUKUN MILA AAPKI PRATIKRIYA PADH KAR. VAISE BHI YE BARKHA DATT TYPE KE GADDAR REPORTER AUR NEWS CHANNELS KI ASLIYAT TO SABKE SAMNE AA GAYI HAI. YE SAB NETAAON KE SATH MILKAR NAFRAT FAILATE HAIN AUR KUCH NAHI. IN SABHI KO TO RAM AUR ALLAH DONO PAKAD KE MARENGE :)

    Mansi के द्वारा
    October 30, 2010

    Wow…here we have some some great persons who are pronouncing the death sentence (Mr BK and Raj)..the way you both are talking shows you mental level which actually needs to be developed..people should have tolerance and capability to see the other parts as well and some respect for their ideological adversary….bt ur language shows immatureness inside you great need to improve ur mental status guys may god give you the strength to over come ur intolerance

संजय जोशी देवास के द्वारा
October 25, 2010

परम आदरणीय मिहिर जी सादर वंदे आपका परम पूज्य स्वामी रामदेवजी महाराज के सबंध मे लेख (ब्लाग) पड़ा । ईश्वर आपको माफ करे । क्योकि यह मानवीय स्वभाव है। आपने कुछ थोड़ा सा जानकर या सुनकर अपने विचार बनाए है। किन्तु शायद आप नहीं जानते की इससे देश के हजारो लाखो लोग आहत हो सकते है । अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता हम सभी को है पर असली लेखक वो है जो बोलने /लिखने के पहले समग्र जानकारी हासिल कर ले । सुबह 3.00 बजे से रात्री 10.00 तक बिना विश्राम किए व्यस्त रहने वाले स्वामी रामदेव जी के दैनिक कार्यक्रम पहले से ही तय होते है । सैकड़ो दर्शनार्थी /भक्त प्रतिदिन पतंजलि योगपीठ आते है तथा सभी स्वामी रामदेव जी से मिलना चाहते है । प्रत्येक व्यक्ति से अलग अलग मिलना असंभव है । इसलिए जब स्वामी रामदेव जी जब हरिद्वार मे होते है तब पतंजलि फेज 1 मे अपने भक्तो से अवश्य मिलते है । आप अगली बार धार्मिक मनोरंजन के लिए हरिद्वार जाए तो 12 बजे पतंजलि फेज 1 मे स्वामी जी के दर्शन कर सकते है लोग वहा स्वामी जी से अपनी बीमारियो आदि के बारे मे भी सलाह लेते है । आपने योगग्राम के एसी रूम देखे किन्तु वहा की चिकित्सा पद्धति व स्वस्थ होते लोग नहीं देखे । आपने स्वामी जी को टीवी पर आते तो देखा परंतु उनकी तर्कसम्मत बाते नहीं सुनी । स्वाइन फ्लू को गिलोई नामक आसानी से घर पर लगाई जा सकने वाले सामान्य ओषधि पौधे की मदद से काबू करने वाले स्वामी रामदेव जी ही है। पतंजलि मे आजीवन सेवा दे रहे साधको द्वारा आपसे गलत शब्द कहे गए हो ये संभव नहीं है फिर भी स्वामी रामदेव जी के शिष्य होने के नाते हम आपसे क्षमाप्रार्थी है। योग ने हमे विचारो मे शुद्धता, अल्पज्ञानी को क्षमा जैसे गुण दिये है । किन्तु यदि केवल सस्ती लोकप्रियता के लिए आपने ये किया है तो मे अपने समस्त साथियो से इतना ही कहूँगा की इस प्रकार के धार्मिक भावनाओ से खिलवाड़ करने वाले किसी गुरु या धर्म की आलोचनाओ वाले ब्लाग पर उसी तरह प्रतिक्रिया न दे जिस तरह हम किसी मनोरोगी की बातो को गंभीरता से नहीं लेते है । ध्यान रहे जहा परमपूज्य स्वामीजी ने हमे योग के माध्यम से शांति, क्षमा, संयम जैसे शिक्षा दी है वही उन्होने हमे भारत स्वाभिमान आंदोलन के माध्यम से गलत बातो का पुरजोर विरोध करने का पाठ भी पड़ाया है । आपसे पुनः अत्यंत विनम्र अनुरोध है की आप परमपूज्य स्वामी रामदेव जी को सुने, पढे, जाने फिर किसी राय पर पहुंचे । आशा है आप अपना अगला ब्लाग सोच विचार कर ही लिखेंगे । आप जैसे उपन्यासकार से सकारात्मकता की अपेक्षा है । आप इस संबंध मे मुझसे ईमेल पर भी अपनी शंका समाधान कर सकते है । आपसे विनम्र अपील है की आप परमपूज्य स्वामी रामदेव जी व राजीव दीक्षित जी को लगभग एक हफ्ता सुने । हमे पूर्ण विश्वास है आपके मन मे नकारात्मक विचारो के स्थान पर राष्ट्र प्रेम , विश्वबंधुत्व की भावना का उदय होगा । ओर हमे भारत स्वाभिमान के इस महाअभियान के लिए आप जैसा ऊर्जावान साथी मिलेगा । आप इन वेबसाइटो पर जाकर भी जानकारी प्राप्त कर सकते है । http://www.bharatswabhimantrust.org http://www.divyayoga.com http://www.rajivdixit.com शुभकामनाओ सहित आपका संजय जोशी देवास (मध्य प्रदेश ) email: sanjay.sansansan@gmail.com

    bharodiya के द्वारा
    July 27, 2011

    आप किसे समजा रहे है सन्जयभाइ । ईसे तो ईरादा पूर्वक भेजा हुआ है । किसने भेजा आप जानते है । मनोरोगी की बातो को गंभीरता से नहीं लेते, ठीक है आपकी बात । लेकिन अगर आपके घरमे कुत्ता आ के सन्डास करने लगे तो आप क्या करोगे । जिव दया के कारण उसे मारोगे नही लेकिन भगाने के लिये — हत्त्त कुत्ता — ईतना तो जरुर बोलोगे ।

pitanber के द्वारा
October 24, 2010

मुझे बड़े पीड़ा हुयी और इस पीड़ा को बर्दास्त करने की हमें आदत डालनी होगी ! प्रेस लोबी के लिए की उनको केसे नियंत्रित किया जाये उनके माध्यम से कही गलत मेस्सेज ना चाला जाये ! पिछले 15 वर्षो में और लभग हर रोज चरित्र पर, धार्मिक चरित्र पर, वस्त्रो और कभी भी छिछोरे लेखो से हमला होता ही रहता है ! और छोटे मोटे दूरदराज के पत्रकार आवारा ( *******) की तरेह भोकने को स्वतंत्र है ! आलोचना (क्रिटिक्स) के बिना इस आधुनिक युग में लेख लिखना संभव ही नहीं चाहे जितना देश हित में हो !बिना कंट्रोवर्सी के बिना पत्रकार होता भी नहीं यह मन्ना है पत्रकारों का ! साधारण लेखन व प्रसारित (पब्लिशिंग) को प्रचार ही माना जाता है ! चाहे वेह व्यापर से सम्भंद्धित हो, देश से हो या किसी व्यक्तिगत सम्भंदित लेखन हो कही से भी व्यक्तिगत भावना से प्रेरित लेख नहीं लगना चाहिए ! ये सीमा (गाईड-लाईन) पत्कारो के साथ होती है ! जिसकी आड़ में किसीभी महान या इज्जत दार व्यक्ति को जलील कर पाई जा सकती है या विदेशी मानसिकता से प्रेरित हो धन कमाने के लिए यह अच्छा माध्यम है कितने भी प्रयास कर लो सरे के सरे सिर्फ खाली कुए में चिल्लाने के आलावा कुछ नहीं ! ऐसे में विलाप करना कितना उचित है ! आप खुद फेशला करे अर्थात कीचड़ से बचना है तो जूते डालने होगे ! पीताम्बर 09868420933

kashyap के द्वारा
October 24, 2010

Dear Mihir, Nice way to get popularize your blog…..it has become shortcut to fame and publicity… just like Rakhi Sawant to speak anything on anything mindlessly….. Congrates you succeeded in that….. but as far as reality is concern it far away from your this “fantasy article”…. please do something constructive to get popular dont use such cheap tricks….

bharatswabhiman के द्वारा
October 24, 2010

आपसे निवेदन है की आप सिर्फ एक हफ्ते के लिए राम देव महाराज जी को सुने व् उसके बाद अपने विचार दे| ईशवर ने आपको बुद्धी दी है ,आप स्वयं दूध का दूध और पानी का पानी कर सकते है

rajesh के द्वारा
October 24, 2010

Negative people see only negative things and don’t see or say anything positive. What a BS atricle

pawan1990 के द्वारा
September 27, 2010

yes sir……bade logon ki badi baaten….wo kahaawat hai na”unchi dukaan phike pakwaan”

    bhartiya के द्वारा
    October 27, 2010

    bade logon ki baaten badi hi hoti hain jo choti khopadi me nahi ghus sakti. vaise 1 aur kahawat hai “KAAM KE NA KAAJ KE, DUSHMAN ANAAJ KE”

hemant के द्वारा
September 19, 2010

tumne kya kiya bas burayia hi dekhi dyan se dekho kuch achayia hai jo kafi hai tumare aur mere liye jo kuch sikha sake hame

himanshu के द्वारा
June 18, 2010

Mihir raj, aapka ye lekh jhooth ka pulinda hai, mangadhant hai, mai dawa krta hu ki aap ptanjali gaye hi nahi, jo vyvhar aapne btaya hai jo aapke sath wha par hua aisa sambhav hi nahi hai, aap fraud hai

neha के द्वारा
June 15, 2010

सब पाखंडी बाबा है…

    bharatswabhiman के द्वारा
    October 24, 2010

    नेहा जी आपसे निवेदन है की आप सिर्फ एक हफ्ते के लिए राम देव महाराज जी को सुने व् उसके बाद अपने विचार दे| ईशवर ने आपको बुद्धी दी है ,आप स्वयं दूध का दूध और पानी का पानी कर सकते है |

    bhartiya के द्वारा
    October 26, 2010

    aapne to vaisi hi baat kar di jaisa kai log kahte hain ki ladkiyan moorkh hoti hain. ab aap iska samarthan karti hain ya nahi wo to nahi pata per pahle to pakhand ka arth batayiye aur ye bhi ki aap apane jeevan me kitne logon se namrata se vyavahar karti hain ya desh ke liye kya kiya hai. apani budhdhimatta utni hi dikhayiye jitni zarurat ho. yadi aitraz ho to proof ke sath aayiye, baat awashya karenge. vaise lagta nahi ki aapme itani samajh hogi ki aap tark (argument ) ke aadhar per apani baat rakh payengi. thode books magzine padhiye tab thodi sad budhdi aayegi. eshwar aapka bhala kare

    Kamal Jat के द्वारा
    December 22, 2010

    नेहा , आप आपको ऐसा नही बोलना चाहिए ! आपने कैसे कह दिया की सब पाखंडी बाबा हैं आपने कितने बाबाओ को देखा हैं जो कह दिया की सब पाखंडी बाबा हैं ?…..ये बाबा नही अवतार हैं भगवन ने अवतार लिया हैं मूर्खो ….. पहचानो ? सब को आपने जैसा सबको क्यों समजते हो …जो बाबा की आलोचना करता हैं वो दरुखोरो और लुटेरो से भी गया गुजरा हैं क्यों की वो भी बाबा जी की आलोचना नही करते हैं ! हे देव पुरस ऐसे लोगो को सद बुद्दी दो…इनको माफ़ करना ………

rajni chauhan के द्वारा
June 9, 2010

mana har insaan mei kami hote hain… per agar koi kaam samaj seva ke liye karta hain tho uske badle logo se paise kyun leta hain… baba ramdev ke shivir mei seats bikti hain…and samaj seva karta hain, logo ka kalyan karta hain tho sirf ministers se he kyun milta hain..wo ministers ka kalyan karna chahta hai ya aam logo ko?? aur waise bhi jab bhi kisi baba ki sachai samne aati wo.. wo sabse bada ayyash and fraud nikalta hain.. phir wo maha purush kaise hua????

    rakesh के द्वारा
    October 25, 2010

    .  रजनी जी, अगर बाबा पैसे नहीं लेगा तो समाज सेवा कैसे करेगा? आमिर और सक्षम लोगों से पैसे लेकर बाबा झूठे और बेईमानों का पर्दाफाश कर रहा है और गरीबों का भला कर रहा है. ये जो मिहिर राज विदेशी और अंग्रेजों का मानस पुत्र है. अंग्रेज चले गए, इसके जैसे काले अंग्रेज पैदा कर गए, जो आज भी उनके गुलाम हैं और गुलामी जारी करने पर आमादा हैं. हमारी सरकार जनता में फूट पैदा करके उसकी मेहनत की कमाई लूट रही है. अगर आप कोई व्यापार करके देखो, सरकारी तंत्र किस तरह गिद्ध की तरह नोच नोच कर काने को आमादा हो जाता है. आय कर विभाग अगर कर न दो तो सजा देता है, पर लिए गए ज्यादा कर का भुगतान सालों तक नहीं होता है. क्या इस बात का कोई जवाब है आप लोगों के पास?

    bhartiya के द्वारा
    October 27, 2010

    is moorkhta pporn article per to jawab dene ki bhi ichcha nahi hoti. per kya karen in agyaniyon ne desh ko is halat me phucha diya hai, ab aur nuksan na pahuchayen isliye jawab dena padta hai. minister se na milen to kya aap apani jama poonji de dogi unhe samaj seva karne ke liye? flood me, bhookhon ko khana khilane me paise ki zarurat padti hai, vaise aapko kya pata hoga aaj tak kisi ko free me 2 roti khilayi ho tab na. refuji camp 1 din ke khane me lakhon ka kharch aata hai, wo kya aap dengi? aur aapko to itani bhi tamij nahi hai ki jo insan thoda bhi kuch kar raha ho uske liye thode tamij se bat karen. camps me sabhi ki entry free hoti hai, han kisi ko aage baithane ka shauk hai aur wo daan bhi dena chahta hai to paise se kisi ko khujali nahi hoti jo mana kar de. kabhi apane gahne , kapade kharidana chod kar kisi 1 bachche ko god lekar parvarish karo tab samajh aayegi samaj seva. baithe-2 dimag kharch karne se nahi. abhi bhi samajh na aaya ho ya koi confusion ho to reply awashy karna, promise ki aapka sara confusion dur kar denge

sameer raj के द्वारा
June 6, 2010

सही कहा आपने ये ये जितने भी बाबा है न भारत मे सभी धोखेबाज है जी.अछा आलेख.

    bhartiya के द्वारा
    October 26, 2010

    Sabhi baba dhokhebaz hain, sabhi neta dhokhebaaz hain, sabhi police wale dhokebaz hain, sabhi prashashnik adhikari dhokebaz hain, poora system dhokhebaz hai. to bhayiya aap alag kaise nikal gaye. apane star per sabhi kahin na kahin desh ke sath gaddari kar rahe hain aur apane paap chupane ke liye dusare per ungali uthate hain. ab ya to aap jaise log keechad me kamal hain to bhai aapko shat shat naman hai, kripya ghar desh ko is durdashaa se bachaayiye mahan aatma… yadi nahi to achche prayaason ko gaali dekar apani gaddari ko jag jahir mat karo…. jis logon ke dwara bhagat singh ko atankvadi kaha jata ho, unse koi medal milne ki koi awashyakata nahi hai

zulqurnain Malik के द्वारा
June 6, 2010

You are really great mind writter, you know which subject people will response your mail. very profesional, you are really commercial writer, but leave some respected person,

jainpawanjain के द्वारा
May 21, 2010

मिहिर राज जी शायद आप को लिखने से पहले थोडा तो सोचना चाहिए था क्या आपको पता भी है की आप क्या लिख रहे हैं ये जो भी आप कह रहे हैं ये सब मन गड़ंत कहानिया है कृपया अपने दुसरे लेख में अपने विचार badaliye

    aakash के द्वारा
    June 4, 2010

    आज बहुत दिन बाद आपको प्रतिक्रिया देने के लिए क्षमा चाहता हु मिहिर जी..जो जैसा है उसको वैसा कहते रहे..कोई तो सच्चाई का बिगुल बजाएगा..

    bhartiya के द्वारा
    October 27, 2010

    haan bhai 1 raja harishchandra the 1 aap aur apke mihir ji hain bas antar ye hai ki haishchandra ji parakrami, sachcharita, vidwan aur samajhdar the. ab kalyug ka thoda to asar padega hi.

vibha chauhan के द्वारा
May 18, 2010

बाबा रामदेव का ज्ञान ही उनकी ही नहीं सबकी समस्या है. खप पंचायत की एक गोत्र में शादी न हो इस मांग को ये कहते हुए समर्थन दे रहे है की खून के रिश्ते में शादी स्वस्थ के लिए ठीक नहीं, ये हम भी जानते है पर एक गोत्र में तो कोई खून का रिश्ता नहीं होता कोई खून नहीं होता तो शादी क्यों नहीं हो सकती. ये रूढ़िवादी सोच के प्रचारक है जो योग से भटक कर राजनीती कर रहे है. आपका आलेख पोल खोलता हुआ बेहद अच्छा प्रयास है.

    Ashwini Soni के द्वारा
    October 26, 2010

    विभा जी, मेरा आपसे निवेदन है की कृपया करके पहले अपने ज्ञान को वैदिक और वैज्ञानिक दोनों माध्यमों से बढ़ाएँ उसके बाद अपनी बात रखे| एक गौत्र की उत्पत्ति कैसे हुई और उस गौत्र वाले सभी लोग एक खून के कैसे हुए इसके लिए आपको पहले गौत्र की परिभाषा पढ़ना पड़ेगी| बिना हाथ-पैरों वाले कमेंट और लेख लिखना बहुत आसान है लेकिन समाज और देश में जो चल रहा है उसकी असलियत और उससे लड़कर उसे ठीक करना बहुत कम लोग कर रहे है और जो कर रहे है उन्हे आप जैसे लोग बदनाम करने में कोई कसर नहीं छोड़ते है| यह पूरी तरह से अंग्रेज़ो की बनाई हुई शिक्षा पद्धति का नतीजा है की हम लोग आज भी हमारे धर्म और संस्कृति पर गर्व नहीं कर पा रहे है बस बिना किसी बात की तह तक पहुंचे उसका विरोध और समर्थन शुरू कर देते है| अगर आपको या किसी और को भी इस बारे में गलतफहमी है तो मुझसे संपर्क करें मुझे पूरा विश्वास है की आपकी गलत फहमी दूर होगी| अश्विनी सोनी 9300869298

    bhartiya के द्वारा
    October 27, 2010

    It is agreed that legally speaking there is no ban on same Gotra marriages but medical experts across the world and from different religions feel that same gotra marriages may lead to genetic disorders. Azad.K.Kaushik , Professor of Immunology, told this scribe that essentially, marriages within a gotra reflect inbreeding with significant health consequences. Kaushik is of the opinion based on an in depth study and survey on the issue that inbreeding generally increases pre-reproductive mortality and crude mortality increases with inbreeding in proportion to the mortality rate. Morbidity increases significantly with inbreeding in many diseases, studies in many countries has revealed this. According to Kaushik, studies from southern India have clearly shown that a marriage within a Gotra or close relations contributes considerably to infant mortality and morbidity and hence for these reasons, marriages within a Gotra or closely related clans are not advisable because of genetic defects that are likely to occur. Kaushik told that great Rishis of India had created the Gotra system to ensure that inbreeding does not occur and it stands to scrutiny of modern science also. In fact because of Gotra system and marriages outside Gotra, northern India has few genetic diseases as compared to others areas. Kaushik feels that in Europe and North Amercia, genetic counselling prior to marriage is conducted and it is consistent with Gotra system to maintain genetic diversity. Supporting the demand, Kaushik hoped that it is important to understand many Indian traditions that have a strong scientific basis and should not be discarded in the name of modernity. Another expert Dr. Lalji Singh, former director of Center for Cellular and Molecular Biology, Hyderabad, while warning about the consequences of same gotra marriages said that if the same are not checked coming generations will be affected by genetic diseases, adding that same Gotra marriages are non-scientific and may invite hundreds of diseases. He said that even the Parsi community has started realizing the consequences of same Gotra marriages. The Head of Psychiatry department of Pt.B.D.Sharma University of Health Sciences, Rohtak in Haryana is of the opinion that marriages between same Gotra or close relations might lead to genetic disorders. Even in agriculture sector hybridization is behind strong and quality crops. Murrah buffalo, the pride of Haryana is also the result of hybridzation . The Ministry of Environment and Forests has also given instructions that every Zoo shall endeavour to keep and maintain animals of various species in their collection in such a sex ratio that optimizes breeding and helps in developing self -sustaining population of each species. Rishi Dayanand has also opposed the marriages between the same Gotra in Satyaarth Parkash. Even Guru Ramdev has also opposed the same gotra marriages. Media is projecting the issue as issue of Jat community whereas it is fact that every community be the Gujjars, Rajputs, Banias., Brahmins and Punjabis opposes the same Gotra marriages.

    bhartiya के द्वारा
    October 27, 2010

    Madam Vidbha Chauhan, Hope you will read the above mail given in detail for Gotra and marriage. aap jaise logon se sabhyata se bat karne ki mujhe koi bimari nahi hai. roodhiwadi soch to aapki hai jo angrejon ke peeche dum hilane walon ki wajah se paida hui hai. jo bhartiya hokar apane sanskriti ko nahi janta, uski gahrayi ko nahi janta use chullu bhar pani me doob marna chahiye. apane strong words likhane ke liye koi kshama nahi maagenge. kyonki aap jaise nirlazz logon ne bharat ke santon ka mazak udaya hai, uski sanskriti ko pakhand bataya hai. netaaon ke joote khane ki aisi aadat pad gayi hai ki agar koi unka virodh kare to bura lagta hai. aise logon ke ghar me 1 na 1 gaddar jarur hoga jo nettaon se mila hoga tabhi itani taklif hoti hai inhe. kis kitab me likha hai ki yogi rajniti me nahi aa sakta? aur yog se bhatakana kya hota hai, yog ka A,B,C,D malum nahi aur chale aaye comment karne

    Kamal Jat के द्वारा
    December 23, 2010

    RAJNITI KON KAR RHA HAIN ?????????? pAGAL WO AAPKO SAMJAA RHA HAIN ESE LOGO KA

Saraswati के द्वारा
May 12, 2010

I really appreciate the posting. Well, u r right, the behaviour at the reception and by the guard was not right. Reason could be anything but this kind of behaviour harm the status of Baba also. I appreciate the endevour of Baba Ramdev\’s spreading awareness of the Yog which result in opening job opportunities for youth also. But at the same time it is his responsibility to organize his centre in such a manner, so that anyone can\’t store it as a bad experience especially our poor and genuine people with real hope. Well, I don\’t understand why publicity make them so unsocial?

shibbu arya-mathura के द्वारा
April 26, 2010

श्री अरुणेश मिश्र जी ने जो “रामदेव जी युग पुरुष असली असलियत” की हैर्डिंग से लिखा हे वही देश की आवाज़ है, आपका दूसरा लेख जो शायद आपके पारिवारिक नोकर की आपकी वास्तविक श्रद्धा है वो वाकई अच्छा है, आप में नेक इन्सान हा इसलिए लिख रहा हु रामदेव के बारे में पुनः शोध करो, (शिब्बू आर्य)

PREETI के द्वारा
April 20, 2010

Sir,please tell me one thing that who is complete in this world?Have you ever met that person who is faultless?No one in this world.Then may be some fault also in Baba Ramdev.I also agree with you but one thing you’ve missed is that he did good of many peoples.We can’t forget his good work.We are also responsible for this ‘TRUTH’ because we gave chance them for doing so.Sorry sir I write that what I thought & what is right according to my point of view.But one suggestion I want to give to you is that never look at only one point of anything.That’s all!!!!

    Kamal Jat के द्वारा
    December 23, 2010

    यदि कोई सम्पुरण नही हैं तो कमसे कम ये एक आदमी अगर अछा काम तो कर रहा हैं आपने अपने देश के लिए क्या किया आज तक एक मिनट के लिए सोचना और बताना ?/ कुछ भुई नही ना, यहा लेखा लिखना आसान हैं करना बहुत कठिन हैं मेडम, कहले में जाता भी क्या इन्सान का जीभ ही तलवे के लगती हैं लेकिन जब करते हैं तो मालूम चलता हैं ………..कमसे काम उन नेताओ से तो अछा हैं जो करते कुछा भी नही ……आप उंके बारे में क्यों नही बोलते हो… ? ….एक अछा काम करता हैं तो उसमे कमी निकालने में जुट जाते हो ……………………….आपको महंगा लगता हैं तो मत खरीदो….

shashank के द्वारा
April 17, 2010

baba ramdev ka haaliya kadam sach mr prashanshniye nahi hai..unke mahapurush hone me bhi koi sandeh nahi..likhne ki shaili achchhi hai aapki..

Aman के द्वारा
April 15, 2010

मिहिर जी आपने जो लिखा है वो ज़माने को पसंद नहीं ऐसा ही वाकया याद आ रहा है जब ओशो आये थे लाइट में तो उनके प्रशंषको को लगता था की सेक्स आम होगा इसकी आज़ादी होगी और वेद जिसका अपमान ओशो करते थे उन्हें अनुकरण कर सब करेंगे पर ऐसा हुआ नहीं वही बात मैं देख रहा हु राम देव जी के और उनके प्रशंषको के साथ…न तो अंग्रेजी दावा का कुछ बिगड़ा है न बिगड़ेगा योग जो करते है करेंगे ही..जो नहीं करते नहीं करेंगे..योग का सहारा ले कर राजनीति करना और इसमें आना वाकई दुर्भाग्यपूर्ण है..

    laxmi के द्वारा
    April 18, 2010

    humne bhoot sai logon ko dekha hai padya bhi hai ek bat samgh mein nahi aati ki woh apne aap to zindgi mein kuchh kar nahi saktai hein dusra karey to unmey bhaoot taklif honey lagti hai baba ram dev nei ex bat ko to logon mein rakha hai woh hai rashtra bhakhti jise hindustani bhool gaye they. auyerveid ko bhi log bhultei ja rahe they.aab aagar kuchh kami hei to heum use pachh kion nahi pa rahe

    neelam के द्वारा
    October 24, 2010

    hume Osho Ji kuch bate yad aa rhi h,, ——–yadi koi insan chor nhi h,,koi use chor kahta h to ,,usse bura nhi lagna chahiye ,,kyoki vo h hi nhi,, isliye vase aap Swami Ramdev ke bare kuch b nhi jante h,, pahle unke bare me jane or samjhe


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